लाइव न्यूज़ :

आम पकने से पहले क्यों झड़ जाते हैं? जानिए असली वजह

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 25, 2025 13:07 IST

ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है।

Open in App

ऑस्ट्रेलिया में हर मौसम में आम उत्पादकों को उस समय भारी नुकसान होता है, जब पेड़ों से बड़ी संख्या में फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं। ये आम न तो ठीक से पकते हैं, न ही उपभोक्ताओं तक पहुंच पाते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह की क्षति होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले फल गिरना आम की कम पैदावार का एक बड़ा कारण है, क्योंकि केवल करीब 0.1 प्रतिशत फल ही परिपक्व हो पाते हैं। इससे उत्पादकों को खासा नुकसान होता है और संसाधनों की बर्बादी भी होती है। लगातार जलवायु परिवर्तन के साथ यह समस्या वैश्विक महत्व की हो गई है, जो खाद्य सुरक्षा से लेकर किसानों की आय तक को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में आम एक उच्च-मूल्य वाली फसल है, जहां हर साल 63,000 टन से अधिक उत्पादन होता है, जो अर्थव्यवस्था में लगभग 22 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का योगदान देता है। हालांकि, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के कारण आम की फसल को अस्थिर जलवायु में अधिक जोखिम है। सूखा, लू और पत्तियों का झड़ना जैसी स्थितियां उस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिसके कारण फल गिरते हैं। शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि तनाव के दौरान पेड़ों में हार्मोनल असंतुलन और कार्बोहाइड्रेट की कमी पैदा हो जाती है।

फल के विकास के लिए आवश्यक शर्करा की आपूर्ति बाधित होने पर पेड़ अपने अस्तित्व को प्राथमिकता देता है और फल गिर जाता है। शोधकर्ताओं ने इसे एक आणविक “क्विट सिग्नल” बताया है, जो पेड़ को फल का साथ छोड़ने का संदेश देता है। यह संकेत जीन गतिविधि और हार्मोनल संकेतों के जटिल नेटवर्क से जुड़ा है। इस प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक आम के डंठल (पेडिसल) के ऊतकों में जीन गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं, जहां पेड़ और फल के बीच पोषक तत्वों और संकेतों का आदान-प्रदान होता है। फल झड़ने की समस्या के लिए शोध में पौध वृद्धि नियामकों (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स) के उपयोग को एक प्रभावी उपाय बताया गया है। ये हार्मोन के कृत्रिम रूप होते हैं, जो तनाव की स्थिति में पेड़ों में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। परीक्षणों में पाया गया कि फूल आने के शुरुआती चरण में इनका प्रयोग अधिक प्रभावी रहा, जिससे पैदावार में 17 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अभी जारी है और समीक्षा के बाद अगले वर्ष प्रकाशित किया जाएगा। इसका उद्देश्य आम की नई किस्में विकसित करना नहीं, बल्कि अपरिपक्व फल गिरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को समझकर किसानों को बेहतर प्रबंधन के उपाय सुझाना है। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस शोध का लाभ केवल आम तक सीमित नहीं रहेगा। सेब, संतरा और एवोकाडो जैसी अन्य फसलों में भी पर्यावरणीय तनाव के कारण फल झड़ने की समस्या होती है। आम में इस प्रक्रिया की बेहतर समझ से वैश्विक स्तर पर कई फसलों को लाभ मिल सकता है।

टॅग्स :हेल्थ टिप्स
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम

स्वास्थ्यक्या हीटवेव के दौरान आपकी किडनी को खतरा है? पीक गर्मी आने से पहले जानने हैल्थ टिप्स की ज़रूरी बातें

स्वास्थ्यWorld Hearing Day: जम्‍मू कश्‍मीर में सुनने की क्षमता में बढ़ती कमी पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, जानें वजह

स्वास्थ्यWorld Hearing Day 2026: लंबे समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल आपकी सुनने की शक्ति को कैसे पहुंचा सकता है नुकसान

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यऑटिज्म : समझ और स्वीकार्यता की जरूरत

स्वास्थ्यफोर्टिफाइड चावल : पोषण या स्वास्थ्य पर संकट ?

स्वास्थ्यचीनी का सेवन कम कीजिए और खाना बनाते समय तेल का प्रयोग 10 प्रतिशत तक घटाएं?, प्रधानमंत्री मोदी बोले-छोटे प्रयास करिए और मोटापे को दूर भगाएं?

स्वास्थ्यसाल 2024 में 34539 लोगों की मौत हार्ट अटैक?, दिल्ली पुलिस और iLive Connect में करार, हृदय बीमारी पर वार

स्वास्थ्य1 अप्रैल से महंगी होंगी दवाइयां; पेनकिलर और एंटीबायोटिक के लिए देने होंगे इतने रुपये, जानें कितनी ढीली होगी जेब