लाइव न्यूज़ :

भारत आया West Nile virus, जानें इस जानलेवा वायरस के लक्षण, बचाव, इलाज

By उस्मान | Updated: March 18, 2019 07:23 IST

केरल में एक सात साल के एक लड़के को वेस्ट नील वायरस (West Nile virus) का संक्रमण होने का मामला सामने आया है। दिल्ली के मशहूर जरनल फिजिशियन डॉक्टर अजय लेखी बता रहे हैं कि यह वायरस क्या होता है और इंसान के लिए कितना खतरनाक है।

Open in App

केरल में एक सात साल के एक लड़के को वेस्ट नील वायरस (West Nile virus) का संक्रमण होने का मामला सामने आया है। इस मामले की जांच के लिए एक केंद्रीय दल को वहां भेजा गया है, जो इसकी रोकथाम में प्रशासन की मदद भी करेगा। राज्य के मलप्पुरम जिले के बच्चे का इलाज कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने अधिकारियों को इस बीमारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए केरल सरकार को हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिये हैं।

इस मामले के प्रकाश में आने से राज्य में दहशत फैल गई है। दिल्ली के मशहूर जरनल फिजिशियन डॉक्टर अजय लेखी बता रहे हैं कि यह वायरस क्या होता है और इंसान के लिए कितना खतरनाक है। 

वेस्ट नील वायरस क्या है? (What is West Nile virus)

यह वायरस एक मच्छर के काटने से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है और इसके अधिकतर मामले उत्तर अमेरिका में सामने आये हैं। वायरस के संक्रमण के शिकार लोगों को बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी आना और त्वचा पर निशान पड़ना आदि शिकायतें होती हैं।

वेस्ट नील वायरस के लक्षण (symptoms of West Nile virus infection)

वेस्ट नील वायरस से संक्रमित पांच में से चार लोगों में कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि ऐसा माना जाता है कि इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति को काफी लंबे समय तक बुखार रह सकता है। हालांकि इसके लक्षणों में बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी आना और त्वचा पर निशान पड़ना आदि की समस्या भी हो सकती है। 

वेस्ट नील वायरस का इलाज (How is West Nile virus treated)

वेस्ट नील वायरस संक्रमण के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। अधिक गंभीर मामलों में गहन अस्पताल देखभाल की आवश्यकता होती है।

वेस्ट नील वायरस से मौत का खतरा (Risk factor of West Nile virus) 

वेस्ट नील वायरस गंभीर बीमारी का कारण तब बनता है, जब यह रक्त / मस्तिष्क को बाधित करता है और मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी को संक्रमित करता है। वायरस दिमाग के कामकाज को बाधित करता है जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। 

कहां से आया वेस्ट नील वायरस

वेस्ट नील वायरस को पहली बार 1999 में न्यूयॉर्क शहर में पाया गया था। यह ज्ञात नहीं है कि अमेरिकी वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई थी लेकिन यह मध्य पूर्व में पाए जाने वाले उपभेदों से सबसे अधिक निकटता से संबंधित है।

टॅग्स :हेल्थ टिप्सकेरलमेडिकल ट्रीटमेंटमोदी सरकारअमेरिका
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारवायनाड पुनर्वासः 200 से अधिक लोगों की मौत और 5.38 करोड़ रुपये खर्च?, कांग्रेस ने धनराशि का हिसाब किया सार्वजनिक

भारतअल्पसंख्यकों पर हमला करने वाले लोगों के साथ सीएम विजयन?, राहुल गांधी ने कहा- 140 में से 100 सीट जीतकर बनाएंगे सरकार?, भाजपा 0 पर आउट?

कारोबारपश्चिम एशिया संघर्षः भारत मजबूती से उभरा और हालात का डटकर मुकाबला किया?, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- युद्ध से करोड़ों लोग परेशान, वीडियो

कारोबारकेरलम विधानसभा चुनावः वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत?, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे?, देखिए किस दल ने क्या दिया तोहफा?

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यऑटिज्म : समझ और स्वीकार्यता की जरूरत

स्वास्थ्यफोर्टिफाइड चावल : पोषण या स्वास्थ्य पर संकट ?

स्वास्थ्यचीनी का सेवन कम कीजिए और खाना बनाते समय तेल का प्रयोग 10 प्रतिशत तक घटाएं?, प्रधानमंत्री मोदी बोले-छोटे प्रयास करिए और मोटापे को दूर भगाएं?

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम