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सर्दी के मौसम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती न बनाएं, 4 तरीका अपनाकर आनंद लें?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 3, 2025 14:21 IST

यह मौसमी बदलाव सिर्फ असुविधा की बात नहीं है बल्कि ये लोगों की ऊर्जा, मानसिक स्थिति और दिनचर्या में भी व्यवधान डाल सकते हैं।

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ठळक मुद्दे‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’ या मौसमी भावात्मक विकार (एसएडी) एक ऐसी स्थिति है।शरद ऋतु और सर्दियों के महीनों के दौरान अवसाद जैसे लक्षणों को बढ़ा देती है। ‘विंटर ब्लूज़’ मनोदशा में हल्की, अस्थायी गिरावट को संदर्भित करता है।

नई दिल्लीः सर्दियां नजदीक आ रही हैं और ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ खत्म हो रहा है। ऐसे में लोग छोटे दिन, ठंडे मौसम और ‘विंटर ब्लूज़’ के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। ‘विंटर ब्लूज़’ सर्दियों के महीनों में होने वाली उदासी और कम ऊर्जा महसूस करने की स्थिति है, जो मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश की कमी के कारण होती है। हालांकि, यह मौसमी बदलाव सिर्फ असुविधा की बात नहीं है बल्कि ये लोगों की ऊर्जा, मानसिक स्थिति और दिनचर्या में भी व्यवधान डाल सकते हैं।

‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’ या मौसमी भावात्मक विकार (एसएडी) एक ऐसी स्थिति है जो शरद ऋतु और सर्दियों के महीनों के दौरान अवसाद जैसे लक्षणों को बढ़ा देती है, जबकि ‘विंटर ब्लूज़’ मनोदशा में हल्की, अस्थायी गिरावट को संदर्भित करता है। कनाडा में लगभग 15 प्रतिशत लोग विंटर ब्लूज़ का अनुभव करते हैं, जबकि दो से छह प्रतिशत लोग एसएडी से पीड़ित होते हैं।

हालांकि एसएडी का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि यह प्राकृतिक रोशनी की कमी से जुड़ा हुआ है। रोशनी के कम स्तर से मस्तिष्क में सेरोटोनिन हार्मोन (जो मूड, नींद और भूख को नियंत्रित करता है) कम हो जाता है जबकि दिन में मेलाटोनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे सुस्ती और थकान होती है।

सर्दी के मौसम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती न बनाकर, इसे एक अवसर के रूप में बदलने के लिए कुछ तरीके निम्नलिखित हैं:

1. समय को दोस्त बनाएं, दुश्मन नहीं सर्दियों में लोग अक्सर सुस्ती और निरुत्साहित सा महसूस करते हैं, लेकिन छोटी-छोटी दिनचर्याओं का पालन करने से मदद मिल सकती है। शोध से यह साबित हुआ है कि संरचित गतिविधियां, चाहे वह छोटी ही क्यों न हों, प्रेरणादायी होती हैं।

आप हर सप्ताह कुछ समय अपने लिए निर्धारित कर सकते हैं जैसे किसी दोस्त के साथ कॉफी पीना, लाइब्रेरी जाना या पसंदीदा टीवी शो देखना। इसके अलावा, ‘‘बॉडी डबलिंग’’ का तरीका भी अपनाया जा सकता है इसका तात्पर्य है कि किसी और के साथ समान कार्य करना फिर चाहे वह व्यक्तिगत तरीके से हो या ऑनलाइन माध्यम से।

2. बाहर जाना न भूलें जब तापमान गिरता है, तो घर में रहने का मन करता है लेकिन ठंड में भी थोड़ी देर बाहर रहना कई लाभकारी प्रभाव डालता है। प्राकृतिक रोशनी, यहां तक कि बादल वाले दिनों में भी हमारी जैविक घड़ी को ठीक करने, नींद सुधारने और मूड को स्थिर करने में मदद करती है।

कोशिश करें कि रोज कम से कम 10 मिनट बाहर जाएं और तेज चलना, स्केटिंग करना आदि गतिविधियां करें। एसएडी से पीड़ित लोगों के लिए, तेज रोशनी थेरेपी भी एक प्रभावी उपचार साबित हुई है और इसके बारे में चिकित्सक से सलाह ली जा सकती है।

3. खुशी के पल संजोए खुशी एक ऐसी भावना है जिसे कुछ लोग स्वाभाविक रूप से महसूस करते हैं, लेकिन इसे विकसित भी किया जा सकता है। तारतम्य बैठाते हुए गतिविधियां करने से खुशी पैदा हो सकती है। यह तब होता है जब चुनौती और कौशल एकदम संतुलित होते हैं।

आपका शौक चाहे जो भी हो- पजल्स, वीडियो गेम्स, खाना पकाना, पेंटिंग या कविता, इसे तालमेल बैठाते हुए करने से मस्तिष्क के, सकारात्मक भावनाओं से जुड़े हिस्से सक्रिय होते हैं। खुशी केवल व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक भी हो सकती है।

4. शांति के पल तलाशें सचेत अवस्था में रहने और ध्यान से सर्दियों के मौसम में तनाव और अवसाद को कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित ध्यान और गहरी सांस लेने के अभ्यास से मानसिक शांति मिलती है। अध्ययन बताते हैं कि 10 मिनट का ध्यान हर दिन करने से तनाव में काफी कमी आ सकती है। साधारण तरीकों से ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, जैसे सुबह उठते ही पांच गहरी सांसें लेना, या फिर दिन के अंत में कुछ मिनट खुद के साथ बिताना।

सर्दी का मौसम केवल संघर्ष का नहीं, बल्कि सीखने, अनुकूलित करने और अपनी मानसिक सहनशीलता को बढ़ाने का एक अवसर हो सकता है । ठंड और छोटे दिनों के प्रभाव को कम करने के लिए इन साधारण लेकिन प्रभावी तरीकों को अपनाकर हम सर्दियों को और अधिक अर्थपूर्ण और खुशहाल बना सकते हैं।

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