जम्मूः कैंसर को लेकर जम्मू कश्मीर नई चिंता में है क्योंकि प्रतिदिन 35 से 38 नए मामले सामने आ रहे हैं। इसे केंद्र सरकार ने भी माना है और डाक्टरों का कहना है कि अगर जल्द ही रोकथाम के लिए उपाय नहीं किए गए तो स्थिति भयानक होने का खतरा है। हालांकि विश्व कैंसर दिवस के मौके पर, जम्मू कश्मीर के जाने-माने आन्कोलाजिस्ट डा जूहर अहमद ने केंद्र शासित प्रदेश में कैंसर के लगातार बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई है, साथ ही रोकथाम, शुरुआती जांच और एडवांस्ड इलाज के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया है। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है।
औसतन, हम केंद्र शासित प्रदेश में हर दिन लगभग 35 से 38 नए कैंसर के मामले देख रहे हैं, और आने वाले सालों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। डा जहूर ने कहा कि घाटी में फिलहाल बड़े सरकारी टर्शियरी केयर अस्पतालों और कुछ प्राइवेट संस्थानों में कैंसर के इलाज की सुविधाएं हैं। वे कहते थे कि आवश्यक इलाज के ज्यादातर तरीके जम्मू कश्मीर में उपलब्ध हैं।
केवल कुछ बहुत ही एडवांस्ड टेक्नोलाजी जैसे प्रोटान रेडियोथेरेपी यहां उपलब्ध नहीं हैं, जो पूरे देश में बहुत कम सेंटर्स में सीमित हैं। डा जहूर अहमद कहते थे कि जम्मू कश्मीर में कैंसर के बढ़ते मामलों की गति बहुत खतरनाक है। हालांकि राज्यसभा में भी यह जानकारी दी गई है कि जम्मू कश्मीर में महिलाओं को होने वाले कैंसर में धीरे-धीरे लेकिन लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि पिछले पांच सालों में ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर के मामलों में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई है। राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र शासित प्रदेश में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर बना हुआ है। मामलों की संख्या 2021 में 908 से बढ़कर 2025 में 938 हो गई।
इसी अवधि के दौरान, ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतें भी धीरे-धीरे बढ़ीं, 390 से बढ़कर 403 हो गईं। सर्वाइकल कैंसर के मामले, हालांकि तुलना में काफी कम थे, लेकिन उनमें मामूली बढ़ोतरी का रुझान दिखा। रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या 2021 में 70 से बढ़कर 2025 में 73 हो गई, जबकि मृत्यु दर काफी हद तक स्थिर रही, 2021 और 2022 में 38 मौतों से बढ़कर 2023 के बाद से 39 मौतें हो गईं।
ओवेरियन कैंसर में भी इसी तरह साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की गई। मामले 2021 में 371 से बढ़कर 2025 में 383 हो गए, जबकि इसी अवधि में मौतें 226 से बढ़कर 234 हो गईं। डाक्टरों का कहना है कि ओवेरियन कैंसर का अक्सर शुरुआती लक्षणों के अस्पष्ट होने के कारण एडवांस्ड स्टेज में पता चलता है, जिससे मृत्यु दर अधिक होती है।