Indore: कल्पना कीजिए, एक साधारण निर्णय कई जिंदगियां बचा ले। यही करिश्मा कर रहा है इंदौर, जो अंगदान में न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश का नेतृत्व कर रहा है। 2025 में प्रदेश के कुल 350 अंगदानों में से 195 केवल इंदौर में हुए, जो कुल का 55% से अधिक है। यह आंकड़ा इंदौर को केंद्रीय भारत का 'ऑर्गन डोनेशन कैपिटल' बनाने में निर्णायक साबित हो रहा है।यह सफर 2016 से शुरू होता है जब मध्य प्रदेश में अंगदान 172 थे, जो 2025 तक 350 हो गए—दोगुनी से अधिक वृद्धि।
इंदौर अंगदान सोसायटी के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 से 2025 तक यहां कुल 8227 अंग एवं ऊतक दान हुए: 5859 कॉर्निया, 291 स्किन, 273 बॉडी, 20 हृदय, 5 फेफड़े। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार, इंदौर के 11 अस्पताल प्रदेश के 20 पंजीकृत केंद्रों में अग्रणी हैं।सफलता का मूल है इंदौर अंगदान सोसायटी, जो 2010 से परिवारों को सहारा दे रही।
दानकर्ता परिवारों को स्वास्थ्य बीमा, नकद सहायता और सामाजिक सम्मान मिलता है—गार्ड ऑफ ऑनर सहित। स्कूलों, नर्सिंग कॉलेजों में अभियान चलते हैं, काउंसलर प्रशिक्षित होते हैं। 2025 में 'ग्रैंड वॉकाथॉन' ने 6100 लोगों को जोड़ा, वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। महाराजा यशवंतराव अस्पताल जैसे केंद्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत है, त्वचा एवं आई-बैंक सक्रिय।
इसी कड़ी में इंदौर के 65 ग्रीन कॉरिडोर (2025 तक) ने समय बचाया। नवंबर 2025 में एक वकील के दान से लिवर, किडनी, कॉर्निया 8-9 मिनट में पहुंचे। 2015-2025 में 57 कॉरिडोर इंदौर के बने, जो अन्य राज्यों तक अंग पहुंचाते।फिर भी चुनौतियां बाकी हैं। मृतक दान अभी भी कम हैं—2023 में मात्र 25। राष्ट्रीय स्तर पर लाखों लोग अंगों का इंतजार कर रहे हैं।
लेकिन इंदौर के जागरूक नागरिक इन बाधाओं को पार करने के लिए आगे आ रहे हैं। सामुदायिक अभियानों में सक्रिय भागीदारी, स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता और दानकर्ता परिवारों को मिल रहे सम्मान ने शहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। जनवरी 2026 में मिताशा फाउंडेशन ने एक लाख प्रतिज्ञाएं ले एक नया कीर्तिमान गढ़ा। इंदौर साबित कर रहा, अंगदान से मौत हार जाती। एक शहर की यह यात्रा पूरे देश के लिए प्रेरणा है—आइए, जीवन दान करें।