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स्पर्म के बाद अब पॉटी डोनेट करके हर महीने 1 लाख कमा सकते हैं, इससे बच सकती है मरीज की जान, जानिये कैसे

By उस्मान | Updated: January 21, 2019 14:54 IST

आपको यह बात हैरान कर सकती है लेकिन आपकी पॉटी के जरिये किसी बीमार व्यक्ति को स्वस्थ किया जा सकता है और इसके बदले आपको अच्छी खासी रकम भी मिल सकती है। चलिए जानते हैं कैसे।  

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आप यह तो जानते होंगे कि ब्लड, प्लाज्मा, एग और स्पर्म डोनेट किये जाते हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पॉटी यानी मल भी डोनेट की जा सकती है? आपको यह बात हैरान कर सकती है लेकिन आपकी पॉटी के जरिये किसी बीमार व्यक्ति को स्वस्थ किया जा सकता है और इसके बदले आपको अच्छी खासी रकम भी मिल सकती है। चलिए जानते हैं कैसे।  

अमेरिकी कंपनी OpenBiome पॉटी डोनेट करने वालों को सालाना 13 000 डॉलर यानी करीब 10 लाख रुपये तक डे रही है। दरअसल यह मल उन मरीजों को दिया जाता है, जो सी डिफिसाइल C. difficile नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से बहुत बीमार हैं। यह बैक्टीरिया गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संकट पैदा कर सकता है। दरअसल डॉक्टर सी डिफिसाइल से पीड़ित लोगों में इस पॉटी का इस्तेमाल करते हैं।

 

पॉटी से कैसे हो सकता है रोगी का इलाजदिल्ली के मशहूर जरनल फिजीशियन डॉक्टर अजय लेखी के अनुसार, इंसान की आंतों में गुड और बैड दोनों तरह के बैक्टीरिया होते हैं। जब आंतों में किसी कारण गुड बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं, तो बैड बैक्टीरिया की वजह से आंतों में सी डिफिसील बैक्टीरिया पनपने लगता है जिससे आपको जह से डायरियाया दस्त और कोलाइटिस जैसी गंभीर आंत संबंधी बीमारियों का खतरा होता है। इसके लक्षणों में पतले दस्त, बुखार, भूख में कमी, मिचली और पेट दर्द आदि शामिल हैं। 

पॉटी से  90 फीसदी इलाज संभवडॉक्टर केवल उन्हीं लोगों की पॉटी का इस बीमारी के लिए इस्तेमाल करते हैं जिनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा होती है। डॉक्टर मरीज के लिए इसका इस्तेमाल एंडोस्कोपी, नाक की नलियों या निगली हुई कैप्सूल के माध्यम से करते हैं।

आमतौर पर इस बैक्टीरिया से होने वाले इन्फेक्शन को एंटीबायोटिक के जरिये 20 से 60 फीसदी ठीक किया जा सकता है लेकिन हालत गंभीर होने पर फेकल माइक्रोबियल ट्रांसप्लानेशन (एफएमटी) Fecal Microbial Transplantation का इस्तेमाल किया जाता है। इस इलाज में अच्छे बैक्टीरिया वाली पॉटी को मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, पॉटी ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया से बेहतर इलाज की संभावना लगभग 90 फीसदी है।

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