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इस दिवाली नहीं मिलेंगे मोदी रॉकेट, दीपिका फुलझड़ी, बाहुबली छुरछुरी, सिर्फ चलेंगे Green Crackers

By उस्मान | Updated: November 1, 2018 11:52 IST

कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में लोग सिर्फ 'ग्रीन क्रैकर्स' का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर 'ग्रीन क्रैकर्स' को लेकर खूब मजाक बनाया जा रहा है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि क्या दिवाली के दिन सिर्फ हरे रंग के पटाखे फोड़ सकते हैं। लेकिन आपको बता दें कि 'ग्रीन क्रैकर्स' का मतलब हरे रंग के पटाखों से नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा है कि दिल्ली में दिवाली पर केवल 'ग्रीन क्रैकर्स' Green Crackers यानी कम प्रदूषण वाले पटाखे ही बेचे जाएंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि यह फैसला सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के लिए है। बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में दिवाली के दिन रात 8 से 10 बजे तक पटाखों की इजाजत दी जाएगी। एक हफ्ते बाद इस फैसले को बदलते हुए कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में लोग सिर्फ 'ग्रीन क्रैकर्स' का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर 'ग्रीन क्रैकर्स' को लेकर खूब मजाक बनाया जा रहा है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि क्या दिवाली के दिन सिर्फ हरे रंग के पटाखे फोड़ सकते हैं। लेकिन आपको बता दें कि 'ग्रीन क्रैकर्स' का मतलब हरे रंग के पटाखों से नहीं है। 'ग्रीन क्रैकर्स' का मतलब होता है कि सरकार द्वारा निर्मित ऐसे पटाखे जो कम आवाज और कम प्रदूषण करते हैं। 

इन दिनों दिल्ली-एनसीआर का मौसम पूरी तरह बिगड़ा हुआ है। आसपास के पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा फसल जलाने से धुंआ दिल्ली की तरफ बढ़ रहा है जिसकी वजह से दिल्ली की हवा जहरीले हो गई है। दिल्ली में बुधवार की दोपहर थोड़ा सुधार देखने को मिला लेकिन मंगलवार की शाम 401 के 'गंभीर' स्तर को छूने के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स या वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 360 तक बना रहा। गुरुग्राम को छोड़कर, दिल्ली के अन्य इलाकों में भी वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ। गाजियाबाद, फरीदाबाद और नोएडा ने 400 से नीचे एक्यूआई दर्ज की। हालांकि, गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता 414 के एक्यूआई के साथ 'गंभीर' रही।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साफ चेतावनी दी है कि दिवाली आने तक हवा और ज्यादा जहरीली हो सकती है। इसके अलावा लोगों को गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने और निर्माण का काम रोकने को कहा है। इतना ही नहीं सरकार की धुंआ निकालने वाली फैक्ट्री पर भी नजर है। डॉक्टर और एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस जहरीली हवा से लोगों को अस्थमा, खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में डबल्यूएचओ की एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि पिछले साल जहरीली हवा के कारण भारत में लगभग एक लाख बच्चों की मौत हो गई थी। जाहिर है अगर इस बार भी लोग प्रदूषण को रोकने में विफल हुए तो, लाखों की मौत हो सकती है। 

 'ग्रीन क्रैकर्स' Green Crackers क्या हैं? 

1) ग्रीन क्रैकर्स आम पटाखों की तुलना में कम हानिकारक और कम खतरनाक हैं। वे कम फैलते हैं  उत्सर्जन और कम आवाज करते हैं।

2) पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नए फायरक्रैकर्स आम पटाखों की तुलना में 30 प्रतिशत कम प्रदूषण करते हैं।  

3) इन्हें ग्रीन पटाखों के रूप में इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका रासायनिक निर्माण होता है जो पानी के अणुओं का उत्पादन करता है, जो कम फैलते हैं और धूल को अवशोषित करते हैं। 

4) ये पटाखे नाइट्रस ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों को 30- 35 प्रतिशत तक कम करते हैं। 

5) ये पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) द्वारा तैयार किए गए हैं। 

6) वैज्ञानिक पिछले साल से इन क्रैकर्स पर काम कर रहे थे। इन्हें बनाने में 65 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

7) सेफ वाटर एंड एयर स्प्रिंकलर (एसडब्ल्यूएएस), सेफ थर्माइट क्रैकर (स्टार) और सेफ मिनिमल एल्यूमिनियम (एसएएफएएल) नामक तीन प्रकार के पटाखे बनाए गए हैं। 

8) सभी तीनों पटाखों की आवाज आम पटाखों की आवाज की तुलना में बहुत कम है। 

9) ग्रीन क्रैकर्स 25 से 30 फीसदी सस्ते हैं और इसे बेचने वाले इस कीमत में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।  

10) इस तरह के पटाखे सिर्फ दिवाली पर ही नहीं बल्कि पूरे साल शादी-विवाह जैसे अवसरों पर भी उपलब्ध होंगे।  

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