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COVID-19: कोरोना से बचने के लिए गलती से भी न खायें ये 2 दवाएं, कभी भी आ सकता है हार्ट अटैक

By भाषा | Updated: May 27, 2020 10:14 IST

वैज्ञानिकों का दावा है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवाओं के एक साथ सेवन से मौत का खतरा है

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कोरोना से बचने के लिए कई देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली इस दवा पर अभी विवाद चल रहा है और कई लेकर अध्ययन होने बाकी हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने माना है कि कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए प्रस्तावित हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन का साथ में सेवन घातक हो सकता है और यह मिश्रण ह्रदय तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। 

एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। अमेरिका में वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) डेटाबेस का अवलोकन, पूर्वव्यापी आकलन किया जिसमें दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव संबंधी 2.1 करोड़ केस रिपोर्ट थी। 

इन रिपोर्टों में 14 नवंबर 1967 और एक मार्च 2020 के बीच 130 देशों की इलाज की रिपोर्टें शामिल थीं। अध्ययन में जिन मरीजों ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, एजीथ्रोमाइसिन ली या दोनों दवाओं का सेवन किया उनके दिल पर दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव का अध्ययन किया। 

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के साथ एजीथ्रोमाइसिन लेने खतरनाक

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन अकेले या साथ में लेना प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यत: एजीथ्रोमाइसिन लेकिन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के सेवन से भी ह्रदय की गति में बदलाव जैसे घातक प्रभाव देखने को मिले। 

वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों के साथ में सेवन से और भयंकर प्रभाव देखने को मिले। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का कई महीनों तक सेवन करने से जानलेवा दिल का दौरा पड़ने जैसा असर भी देखा गया। यह अध्यय ‘सर्कुलेशन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। 

भारतीय डॉक्टर भी दे चुके हैं चेतावनी

ऐसे समय जब पूरी दुनिया के विशेषज्ञ कोविड-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के प्रभाव और उसकी क्षमता पर काम कर रहे हैं कई विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यह कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए ‘संजीवनी बूटी’ नहीं है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। पूरी दुनिया में इस महामारी से लड़ने के लिए टीका विकसित करने की कोशिश चल रही है। 

फिलहाल कोई विशेष दवा नहीं होने के कारण हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए एक प्रमुख दवा के रूप में उभर कर आया है। इन सबके बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर निर्भरता को रोकना होगा, क्योंकि अभी तक कोई ऐसा वैज्ञानिक तथ्य नहीं है जो यह साबित करे कि कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में यह लाभकारी है। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के पूर्व निदेशक और भारत के शीर्ष सर्जनों में से एक डॉक्टर एम. सी. मिश्रा का कहना है, ‘‘सिर्फ ऐसे उदाहरण हैं जहां डॉक्टर कोविड-19 के लिए विशेष दवा/इलाज नहीं होने के कारण हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को अन्य एंटी-वायरल (एचआईवी या अन्य वायरस के इलाज के लिए बनी दवाएं) दवाओं के साथ मिलाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।’’ 

मिश्रा ने बताया, ‘‘लेकिन कई जगहों से ऐसी सूचना है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के कारण मरीजों की हृदय गति में असमानता आ गयी है और इसके कारण दिल का दौरा भी पड़ सकता है।’’ एम्स के ट्रॉमा सेंटर में तैनात अस्पताल की कोविड-19 टीम के प्रमुख सदस्य युद्धवीर सिंह इस बात से इत्तेफाक रखते हैं।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से दिल का दौरा पड़ने का खतरा

उन्होंने बताया, ‘‘दुनिया में अकेले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने या फिर उसे एजिथ्रोमाइसिन के साथ मिलाकर दिए जाने पर मरीजों की मौत होने की खबरें हैं। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन शरीर में पोटैशियम के संचरण को रोक देता है और हृदयगति को धीमा कर देता है, इसके कारण दिल का दौरा भी पड़ सकता है या हृदय गति से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं। 

कई महत्वपूर्ण अध्ययनों में यह बात कही भी गई है।’’ एम्स में एनेस्थेसिया के सहायक प्रोफेसर ने कहा कि कोविड-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के उपयोग के संबंध में अलग-अलग खबरें/सूचनाएं आ रही हैं। 

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