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Coronavirus: कोरोना वायरस की बेचैनी से निपटना है तो करें योग और ध्यान, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने दी सलाह

By भाषा | Updated: March 16, 2020 12:44 IST

coronavirus outbreak: दुनिया भर में कोरोना वायरस के 1.69 लाख मामले सामने आए हैं, 6500 से ज्यादा लोगों की मौत इस खतरनाक वायरस के चलते हो चुका है.

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ठळक मुद्देअमेरिका में कोविड वायरस के करीब 3700 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, इस वायरस से वहां 69 लोगों की मौत हुई है.कोरोना वायरस के चलते चीन में 3200 से ज्यादा, इटली में 1800 से ज्यादा, ईरान में 700 से ज्यादा मौतें हुई हैं.

अमेरिका के एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान ने कोरोना वायरस से जुड़ी व्यग्रता से निपटने के लिए योग, ध्यान लगाने एवं सांस पर नियंत्रण की सलाह दी है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं बचाव केंद्र (सीडीसी), राज्य एवं स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकार के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के कम से कम 3,485 मामले हैं। घातक वायरस से मरने वालों की संख्या 65 पर पहुंच गई है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने अपने नये स्वास्थ्य दिशा-निर्देश में कहा है कि योग, ध्यान एवं सांस लेने पर नियंत्रण, “शांत होने के कुछ सही एवं आजमाए हुए तरीके हैं।” ‘कोरोना वायरस की व्यग्रता से निपटने’ विषय पर लेख इस हफ्ते प्रकाशित हुआ है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के संकाय एवं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डेविड गेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन के बोर्ड प्रमाणित मनोरोग चिकित्सक जॉन शार्प ने कहा, “ नियमित ध्यान बहुत राहत देने वाला है।” उन्होंने कहा, “ अगर आप योग नहीं करते हैं? जब तक मन करें तब तक कोशिश न करें। कई बार कुछ नयी चीजें करना और नयी गतिविधियों का पता लगा कर आप लाभ ले सकते हैं। योग स्टूडियो और पॉकेट योग जैसे ऐप पर विचार कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि वायरस को लेकर बुरी ही खबरें आएंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बात सुनें जो उन्हें सही रास्ता दिखा सकते हैं। इस बीच, विश्व हिंदू कांग्रेस अमेरिका ने कहा कि उसने कोविड-19 की वैश्विक महामारी के चलते उत्पन्न चिंता एवं मानसिक स्वास्थ्य के विषयों से निपटने के अपने प्रयासों के तहत पूरे उत्तरी अमेरिका में हवन और प्रार्थनाएं आयोजित की।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की ओर से जारी स्वास्थ्य दिशा-निर्देश रिपोर्ट की तरफ इशारा करते हुए एक सामुदायिक आयोजक, अनिल शर्मा ने कहा, “ आसन, ध्यान और प्राणायाम उस बेचैनी को कम कर सकता है जो पृथक रहने को लेकर लोगों में पैदा हो रही है।” 

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