पटनाः नीतीश सरकार के द्वारा नीट छात्रा की हुई संदिग्ध मौत के मामले की सीबीआई जांच के लिए सिफारिश किए जाने पर छात्रा के परिजनों का बयान सामने आया है। परिजनों का कहना है कि पूरे मामले में जो काम पटना पुलिस की एसआईटी कर रही थी, वही काम सीबीआई भी करेगी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी सीबीआई जांच की मांग नहीं की है और पुलिस की नाकामी के बाद सरकार ने अपना चेहरा बचाने के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश की है। परिजनों को सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है। परिजनों का कहना है बिहार पुलिस ने सारे सबूत और साक्ष्य मिटा दिए हैं और केस को सीबीआई को सौंपा है। इस कारण से कभी भी मामले का खुलासा नहीं हो सकेगा। परिजनों की यह आशंका जायज भी है, क्योंकि पहले भी कई मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
लेकिन आज तक उनका खुलासा नहीं हो सका है। दरअसल, छात्रा की मौत मामले में पटना पुलिस की घोर लापरवाही के कारण नीतीश सरकार की काफी आलोचना हो रही है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई पहले भी कई मामलों की जांच कर चुकी है और इनमें से कुछ मामले ऐसे भी हैं, जो या तो वर्षों तक लटके रहे या उनमें सबूतों के अभाव में क्लोजर रिपोर्ट लगानी पड़ी।
उनमें बॉबी हत्याकांड, शिल्पी-गौतम हत्याकांड, नवरुणा चक्रवर्ती अपहरण कांड और मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस जैसे चर्चित मामले शामिल हैं। शिल्पी-गौतम हत्याकांड 3 जुलाई 1999 को पटना के एक सरकारी बंगले के बाहर एक कार से दो शव बरामद हुए थे। दोनों शव अर्धनग्न हालत में थीं।
लड़की की पहचान वीमेंस कॉलेज की छात्रा और मिस पटना रह चुकी शिल्पी जैन (23 साल) के रूप में हुई। वहीं दूसरी लाश गौतम नामक युवक की थी, जिनके पिता डॉक्टर थे। गौतम राजद की युवा शाखा से जुड़े थे। जिस बंगले के बाहर कार खड़ी थी, वह बंगला तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के साले साधु यादव का था।
पहली नजर में ही दुष्कर्म और हत्या का मामला नजर आ रहा था, लेकिन इसमें काफी राजनीति देखने को मिली। शिल्पी जैन-गौतम सिंह हत्याकांड में सत्ता के दबाव के आगे सीबीआई को भी हथियार डालने पड़े। सीबीआई ने इस मामले को आत्महत्या बता कर फाइल बंद कर दी थी। वहीं, मुजफ्फरपुर में हुए नवरुणा चक्रवर्ती अपहरण कांड की घटना ने बिहार ही नहीं पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था।
यहां 17-18 सितंबर 2012 की रात को कुछ बदमाशों ने अतुल्य चक्रवर्ती के घर में घुसकर सोती हुई नवरुणा (12 साल) को अगवा कर लिया था। खास बात यह थी कि घरवालों को इसकी भनक तक नहीं लगी और सुबह जब परिवार जागा तो बेटी गायब थी। अपहरणकर्ताओं ने कोई फिरौती नहीं मांगी। इसी वजह से मामला और ज्यादा पेचीदा हो गया था।
इस अपहरण कांड को लेकर राष्ट्रव्यापी बवाल हुआ था। बिहार पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन कोई सफलता मिलता नहीं देख इसका जिम्मा सीआईडी को दे दिया गया। अंततः हाय तौबा मचाने के बाद जांच का जिम्मा सीबीआई ने संभाला था। 26 नवंबर 2012 चक्रवर्ती निवास के पास ही एक नाली से एक स्केलेटन बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने नवरुणा का बताया गया।
आज तक इस मामले का खुलासा नहीं हो सका है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस मामले में अदालत ने ब्रजेश ठाकुर और 18 अन्य को कई लड़कियों के यौन शोषण एवं शारीरिक उत्पीड़न का दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को पॉक्सो कानून के तहत गुरुतर लैंगिक हमला और सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया।
अदालत ने मामले के एक आरोपी को बरी कर दिया। आरोपियों में 12 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं। आश्रय गृह ठाकुर द्वारा चलाया जा रहा था। हालांकि इस मुख्य मामले में सजाएं हुई हैं, लेकिन जांच के कुछ पहलुओं पर सवाल उठे थे। सीबीआई ने बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति और अन्य कुछ प्रभावशाली लोगों को लेकर जो जांच की थी, उसमें कई कड़ियों को जोड़ा नहीं जा सका या कुछ लोगों को पर्याप्त सबूत न होने के कारण राहत मिल गई, जिसे लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने असंतोष जताया था।
जबकि 11 मई 1983 को हुई बॉबी हत्याकांड काफी चर्चा में थी। श्वेतनिशा त्रिवेदी उर्फ बॉबी बिहार विधानसभा में टाइपिस्ट के रूप में काम करती थी। वह काफी सुंदर थी और उसके कई नेताओं के साथ अच्छे संपर्क भी थे। अचानक से उसकी संदिग्ध मौत की खबर सामने आई। आधिकारिक तौर पर मौत का कारण 'हार्ट अटैक' बताया गया और बिना पोस्टमार्टम के महज 4 घंटों में लाश को चुपचाप दफना दिया गया।
यहीं से शक की सुई तेजी से घूमने लगी थी। दिवंगत आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल उन दिनों पटना के एसपी हुआ करते थे। कब्र खुदवा कर उसमें दफन बॉबी की लाश निकलवाई और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। किशोर कुणाल अपनी किताब में लिखते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने उन्हें फोन कर मामले की जानकारी लेनी चाही थी।
तब किशोर कुणाल ने उनसे कहा था कि 'सर आप चरित्र के मामले में अच्छे हैं, इस केस में इतनी आग है कि आपके हाथ जल जाएंगे। किशोर कुणाल की जांच पूरी हो पाती, उससे पहले ही कुछ विधायकों के दबाव में जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई ने अपनी जांच के क्रम में मामले के आरोपियों को अभयदान दे दिया। इस केस ने पटना से दिल्ली तक की सियासत में भूचाल ला था। यह महज कुछ उदाहरण मात्र हैं। ऐसे कई और मामले हैं, जिसमें सीबीआई जांच अंजाम तक नहीं पहुंच पाई और फाईल क्लोज कर दिया गया। ऐसे में नीट छात्रा मौत मामले को लेकर भी लोगों में आशंकाएं उठने लगी हैं।
तेजस्वी यादव ने कसा तंज, कहा-कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले
बिहार सरकार के द्वारा पटना के शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की हुई संदिग्ध मौत की जांच की जिम्मेवारी सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अब विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। इसी कडी में नेता प्रतिपक्ष और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने सरकार से पूछा है कि 'जंगलराज' चिल्लाने वाले अब कहां हैं? तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य, अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता।
पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज़्ड तंत्र की विफलता है, जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते है। उन्होंने आगे लिखा है कि 'नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जांच भी बंद कर दी।
यही इस मामले में होना है। कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले? बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा? क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के ज़रिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होगी?'