जम्मूः प्रदेश में पुलिस द्वारा आतंकियों की तलाश में लगाए जा रहे पोस्टर लोगों में दहशत पैछा करने लगे हैं। पहले ही कठुआ के उपायुक्त द्वारा इंटरनेशनल बार्डर पर पाक गोलाबारी की आशंका जताते हुए 5 किमी की सीमा पटटी में रात को लोगों के आने जाने पर लगाए गए प्रतिबंध से भी दहशत का माहौल है। अब जबकि खुफिया सूत्रों ने अंदेशा जताया है कि पाकिस्तान से जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों का एक फिदायीन दस्ता भारतीय सीमा में घुसा है। आतंकियों का ये समूह सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की फिराक में हैं। ऐसे में सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पूरे कठुआ जिले में और आसपास के क्षेत्रों में सेना व पुलिस से लेकर अन्य सुरक्षाबलों के ठिकानों व प्रमुख इमारतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस संबंध में आतंकियों की फोटो वाले पोस्टर कठुआ जिले में चिपकाए गए हैं। एक दिन पहले ही जिला मजिस्ट्रेट कठुआ ने हीरानगर सेक्टर में पहाड़पुर से करोल कृष्णा बार्डर पोस्ट के बीच 5 किमी के दायरे में रात की आवाजाही पर दो माह के लिए प्रतिबंध लगाया है।
रात नौ बजे से सुबह छह बजे के बीच सीमा क्षेत्र की सड़कों पर बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रतिबंधित है। सूत्रों ने बताया कि आतंकी षड्यंत्र के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कठुआ शहर में जगह-जगह दीवारों और खंभों पर संदिग्ध आतंकियों के पोस्टर लगाए गए हैं। इस बीच, लोहाई मल्हार के मलाड़ इलाके में तीन संदिग्धों की मूवमेंट भी देखी गई है।
जबकि पुलिस ने आतंकवाद रोधी अभियान तेज करते हुए डोडा जिले में भी सक्रिय आतंकवादियों के बारे में सूचना देने के संबंध में कई अहम स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह का नाम भी शामिल है।
दरअसल हालिया मुठभेड़ और क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है। पोस्टर डोडा के प्रवेश बिंदु पर गणपत पुल, नागरी, डेसा और ठाठरी समेत प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए संवेदनशील इलाकों में और भी नोटिस लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह पोस्टर अभियान चेनाब घाटी क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिलों में हाल के वर्षों में कई मुठभेड़ हुई हैं, क्योंकि आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में फिर से गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की है, जहां पहले आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।