पटनाः बिहार में सड़कों का जाल बिछ जाने के बाद हादसों की बढ़ती तादाद ने आम लोगों की परेशानी में डाल दिया है। बिहार में सड़क हादसे में पिछले 7 वर्षों (2019-2026) में 50,000 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। बिहार सड़क हादसों को लेकर विधान परिषद में गंभीर चिंता जताई गई। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में राज्य में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। तेज रफ्तार, गलत तरीके से वाहन चलाना और नेशनल हाईवे पर 1,044 से अधिक ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) इसके प्रमुख कारण हैं।
इन हादसों में 18-35 आयु वर्ग के युवाओं की सर्वाधिक मौतें होती हैं। विधान पार्षद महेश्वर सिंह के सवाल का जवाब देने के लिए राज्य के पथ निर्माण विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने आंकड़े प्रस्तुत किए। इस पर महेश्वर सिंह ने कहा कि अगर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर यकीन करें तो वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक राज्य में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 50,941 है।
जबकि इनमें घायल होने वालों की संख्या 44,000 के करीब है। इसमें भी खास बात यह है कि 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 50 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन्होंने इन हादसों में अपनी जान गंवाई है। बिहार में सड़क हादसे के प्रमुख कारणों में लगभग 45 फीसदी से अधिक हादसे तेज गति के कारण होते हैं।
बिहार में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं नेशनल हाईवे पर होती हैं, जैसे एनएच-31, एनएच-28, एनएच-30, एनएच-57 और एनएच-19 पर स्थिति ज्यादा भयावह होती है। हदसों में संभावित क्षेत्र के रूप में खगड़िया, अररिया, पटना, जहानाबाद, किशनगंज और रोहतास जैसे जिलों में हादसों की संख्या अधिक है।
हालात यह हैं कि छोटे कस्बों से लेकर राज्य राजमार्गों और राजधानी की चौड़ी सड़कों तक, हादसे आम खबरें बनते जा रहे हैं। सरकार ने भी माना है कि दुर्घटनाएं लगभग सभी प्रमुख सड़कों पर हो रही हैं और इसे लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। पथ निर्माण विभाग ‘ब्लैक स्पॉट’ के तौर पर चिन्हित किया है, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं और जान-माल का नुकसान बढ़ रहा है।
विभागीय स्तर पर इन ब्लैक स्पॉट्स पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है। कहीं मोड़ दुरुस्त किए जा रहे हैं, कहीं डिवाइडर मजबूत किए जा रहे हैं, तो कहीं प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी संकेतों को बेहतर बनाने की कवायद चल रही है। सरकार का दावा है कि सड़क सुरक्षा को महज कागजी कवायद नहीं रहने दिया जाएगा।
व्यापक जागरूकता अभियान की तैयारी है, ताकि लोग ट्रैफिक नियमों की पाबंदी को अपनी आदत बनाएं। सड़कों पर जरूरी सुरक्षा निर्देश, रिफ्लेक्टिव साइनेज और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। जहां जरूरत महसूस होगी, वहां ज़ेब्रा क्रॉसिंग की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।