नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग के एक पूर्व कनिष्ठ अभियंता (जेई) और उसकी पत्नी को एक दशक से अधिक समय तक 33 नाबालिग लड़कों (जिनमें से कुछ की उम्र महज तीन साल थी) के यौन शोषण के लिए मौत की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम अदालत ने इन अपराधों को ‘दुर्लभतम’ मामला करार देते हुए राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को वर्ष 2010 से 2020 के बीच बच्चों का यौन शोषण करने और बाल यौन शोषण सामग्री तैयार करने का दोषी पाया।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बांदा स्थित विशेष अदालत ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग के एक पूर्व जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी को एक दशक से अधिक समय तक 33 नाबालिग लड़कों, जिनमें से कुछ की उम्र तीन साल जितनी कम थी के यौन शोषण के लिए मौत की सजा सुनाई। पीओसीएसओ अदालत ने इन अपराधों को "दुर्लभतम" करार दिया।
राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को 2010 से 2020 के बीच बच्चों का व्यवस्थित रूप से यौन शोषण करने और बाल यौन शोषण सामग्री तैयार करने का दोषी ठहराया। भारतीय दंड संहिता और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) के प्रावधानों के तहत दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए, उन्हें गंभीर यौन उत्पीड़न, अश्लील सामग्री के लिए बच्चे का इस्तेमाल, बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का भंडारण, और अपराध में सहायता एवं आपराधिक षड्यंत्र जैसे अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई।
सीबीआई ने एक बयान में कहा कि निचली अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को 33 पीड़ितों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। सीबीआई ने आगे कहा, "अदालत ने आरोपियों के घर से जब्त की गई नकदी को पीड़ितों में बराबर-बराबर बांटने का भी आदेश दिया है।"