लखनऊः उत्तर प्रदेश के हार बड़े शहर में गैस सिलेंडर को लेकर हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. आम लोग एक-एक सिलेंडर के लिए परेशान हैं. अब तो पेट्रोल के लिए भी पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढने लगी है. बीते 24 घंटे से राज्य में पेट्रोल की किल्लत को लेकर फैली अफवाह के चलते लोग पेट्रोल पंप पर तेल लेने पहुंच गए. पेट्रोल पंपों पर भीड़ को देखकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल-डीजल की कमी न होने की एडवाइजरी जारी कर यह बताना पड़ा कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. इसके बाद भी लोगों का पेट्रोल पंपों पर आना थमा नहीं है.
कुल मिलाकर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पाने को लेकर अफरातफरी और गैस वितरण के दौरान भारी अव्यवस्था तथा कालाबाजारी का माहौल है. जबकि प्रशासन के बड़े अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. सत्तारूढ़ दल के नेता भी गैस की आपूर्ति कराने और गैस तथा पेट्रोल-डीजल की किल्लत को लेकर फैलने वाली अफवाहों से जनता को शांत करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं.
जबकि विपक्षी नेता इस मामले में योगी सरकार की आलोचना का कोई मौका छोड़ नहीं रहे. जिसके चलते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को योगी सरकार पर हमला बोलते हुए यह दावा किया कि यूपी में एलपीजी का मतलब लापता गैस है. राज्य में गैस न मिलने से लोगों को खाना बनाने के लिए गैस और चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है और मुख्यमंत्री तथा उनके मंत्री परेशान जनता को उनके हाल पर छोड़कर पूजा-पाठ करने में जुटे हैं.
लोग हुए परेशान तो प्रशासन हुआ सक्रिय
फिलहाल यूपी के हर शहर में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं. लोग गैस सिलेंडर पाने के लिए परेशान है और हर जिले में 900 रुपए का मिलने वाला गैस का सिलेंडर खुलेआम दो-दो हजार रुपए में मिल रहा है. गैस सिलेन्डर पाने के लिए लोगों का गैस एजेंसी संचालक से झगड़ा भी हो रहा है. ऐसे विवादों के तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.
पुलिस को ऐसे विवादों को लेकर परेशान होना पड़ रहा है. गैस की किल्लत के चलते राज्य के हजारों स्कूलों में बच्चों को मिड डे मिल नहीं मिल पा रहा है. लखनऊ ऐसे शहर में बनी चटोरी गली की आधे से अधिक खाने-पीने की दुकानें बंद है. तमाम होटलों में खाने के मेन्यू से कई डिस हटा दी गई है.
लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस को गैस का सिलेन्डर पाने के लिए जिले के डीएम की मदद लेनी पड़ रही है. यहीं हाल लोकभवन और विधानसभा की कैंटीन का भी है. इन दोनों ही जगहों पर गैस सिलेन्डर पाने के लिए प्रशासनिक अफसरों की मदद ली गई, तब कही उक्त भवनों में बैठने वाले अफसर तथा मंत्रियों के स्टाफ आदि को चाय-पकौड़ा मिल सका है.
आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर आदि शहरों में गैस से चलने वाले तमाम उद्योग बंद होने की करार पर पहुंच गए है. आगरा के पेठा बनाने के कारोबार आधा हो गया है. फिलहाल गैस की किल्लत से परेशान लोगों को परेशानी को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को कहा है कि राज्य में गैस और पेट्रोल-डीजल तथा आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.
इसलिए जिलों के अफसरों को पारदर्शिता के साथ गैस, पेट्रोल-डीजल तथा आवश्यक वस्तुओं का वितरण सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. किसी भी तरह की कालाबाजारी की शिकायत पर गंभीरता से जांच की जाए और दोषी पाए गए व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा कर कठोर कार्रवाई की जाए. लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि हर व्यक्ति को गैस उपलब्ध कराई जाएगी और किसी को भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी.
यूपी में एलपीजी का मतलब लापता गैस : अखिलेश
यूपी में रसोई गैस की किल्लत से जूझ रहे लोगों की दिक्कतों का संज्ञान लेते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को सूबे की योगी सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होने रसोई गैस की किल्लत को लेकर गैस एजेंसियों के सामने लगी लंबी लाइनों को लेकर यह कहा कि यह भाजपा सरकारों की नाकामियों को उजागर कराने की लाइनें हैं.
भाजपा के लोगों ने देश के लोगों को लाइनों में लगाने के अलावा दिया ही क्या है. पहले लोग नोटबंदी को लेकर लाइन में लगे. अब गैस और पेट्रोल-डीजल पाने के लिए भी लाइनों में लगे हुए हैं. इसकी वजह भाजपा की सरकारों की लापरवाही है. डबल इंजन और ट्रिपल इंजन वाली भाजपा की सरकारों ने एलपीजी संकट को लेकर कुछ भी तैयारी नहीं की.
अब तो 14 किलो का सिलेंडर भी 10 किलो का आ रहा लेकिन उसकी भी कीमत पहले से बहुत ज्यादा ली जा रही है. उत्तर प्रदेश में तो बाबा की सरकार में एलपीजी का मतलब लापता गैस है. गैस न मिलने से लोगों को खाना बनाने के लिए गैस और चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है.
जबकि सरकार कह रही है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है पर गैस है कहा. अखिलेश के मुताबिक सूबे के लोग योगी की बातों में न आएं उनकी चला चली की बेला है. वो योगी नहीं हैं, उन्होंने शंकराचार्य का अपमान किया. अब जल्दी ही जनता इन्हे सबक सिखाएगी.