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एस्सार स्टील से 24 बैंकों का होगा पैसा वसूल, 38429 करोड़ रुपये का है बकाया कर्ज

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 16, 2019 08:41 IST

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील तथा आर्सेलर मित्तल के वकील हरीश साल्वे ने इस फैसले को मार्गदर्शक (लैंडमार्क) बताया है। भारत की 18 सरकारी बैंकों का बकाया कर्ज 12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट का एस्सार स्टील का अधिग्रहण इंग्लैंड की आर्सेलर मित्तल कंपनी को सौंपने का आदेश24 बैंकों का 38429 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज वसूल होने का रास्ता साफ

सर्वोच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील का अधिग्रहण इंग्लैंड की आर्सेलर मित्तल कंपनी को सौंपने का आदेश देते हुए नेशनल कंपनी लॉ अपेलिट ट्रिब्युनल का 22 जुलाई, 2019 का आदेश खारिज कर देने के बाद देश के 24 बैंकों का 38429 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज वसूल होने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है मामला

साल 2017 में आर्थिक स्थिति खराब होने पर एस्सार स्टील को कर्ज देने वाले बैंकों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्य़ूनल (एनसीएलटी) से दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया था। एनसीएलटी ने 2017 में ही कंपनी बेचने के लिए बोलिया मंगाई। लंदन को उद्योगपति लक्ष्मीनिवास मित्तल की आर्सेलर मित्तल ने एस्सार कंपनी को 42 हजार करोड़ रुपये में खरीदने की तैयारी दर्शाई।

इसका एस्सार स्टील के प्रवर्तक शशि व रवि रुईया ने विरोध किया और कंपनी पर बकाया 54 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भरने की तैयारी दिखाई। इसके चलते मामला दो वर्ष कोर्ट में लंबित रहा। इस वर्ष एस्सार को स्टील को कर्ज देने वाली 24 बैंकों ने अपनी एक समिति स्थापित की और आर्सेलर मित्तल से मिलने वाले 42 हजार करोड़ रुपये में से किस बैंक का कितना कर्ज वसूल होगा, इसकी सूची बनाई। 

इसका एनसीएलटी ने विरोध किया जिसके चलते मामला अपलेट ट्राब्युनल में गया। इस पर एनसीएलटी ने सभी बैंकों को समान रकम वितरित करने का निर्णय दिया। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। यह निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायलय ने कर्ज बकाया रखने वाली कंपनी की संपत्ति बेचकर कर्ज वसूल करने के लिए जो 330 दिन की समयसीमा निर्धारित की थी, उसे भी खारिज कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील तथा आर्सेलर मित्तल के वकील हरीश साल्वे ने इस फैसले को मार्गदर्शक (लैंडमार्क) बताया है। भारत की 18 सरकारी बैंकों का बकाया कर्ज 12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस निर्णय के बाद बैंकों की समिति का फैसला अंतिम रहने से भविष्य में कर्ज वसूली करना बैंकों के लिए आसान होगा। 

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