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खुले बाजार खरीद से जुड़ी सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता अप्रैल-जून तिमाही में बढ़कर 209 मेगावाट पर

By भाषा | Updated: September 28, 2021 18:21 IST

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नयी दिल्ली, 28 सितंबर देश में अधिक खपत वाले बड़े उपभोक्ताओं को सीधे उत्पादकों से बिजली खरीद की सुविधा से जुड़ी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्थापित क्षमता 2021 की दूसरी तिमाही में करीब सात गुना बढ़कर 209 मेगावाट रही। एक साल पहले इसी अवधि में यह 27 मेगावाट थी। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

स्वच्छ ऊर्जा के बारे में जानकारी देने वाली मेरकॉम इंडिया की ‘सोलर ओपन एक्सेस मार्केट’ (उत्पादकों से सीधे सौर ऊर्जा खरीदने से संबद्ध बाजार) के बारे में दूसरी तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार बड़े बिजली ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिये लगायी जाने वाली सौर परियोजनाओं की क्षमता 2021 की दूसरी तिमाही में 209 मेगावाट रही। यह एक साल पहले इसी तिमाही में 27 मेगावाट थी।

इसमें कहा गया है कि ऐसी परियोजनाओं की क्षमता जून 2021 में 4,500 मेगावाट को पार कर गयी है।

रिपोर्ट के अनुसार निर्माणधीन और प्रस्तावित ‘सोलर ओपन एक्सेस’ परियोजनाओं की क्षमता करीब 1,000 मेगावाट होने का अनुमान है।

नयी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ और ओड़िशा को भी शामिल किया गया है। इसमें कंपनियों के लिये बिजली की सीधी खरीद वाला बाजार, संशोधन, कीमत प्रवृत्ति और उभरते कारोबार मॉडल से जुड़ी नीतियों को शामिल किया गया है।

कोविड महामारी की दूसरी लहर के कारण तिमाही आधार पर 2021 की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में स्थापित क्षमता करीब 50 प्रतिशत कम रही।

हालांकि प्रस्तावित लंबित परियोजनाओं और सरकार की हरित, सौर ऊर्जा बाजार से सीधे बिजली खरीद को बढ़ावा देने की पहल को देखते हुए इस प्रकार की परियोजनाओं में तेजी की उम्मीद है।

इस साल पहली छमाही (जनवरी-जून) में खुली खरीद व्यवस्था से जुड़ी 628 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं स्थापित हुईं। यह 2020 की पहली छमाही में स्थापित 47 मेगावाट क्षमता से 12 गुना अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार 2021 की पहली छमाही में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक संख्या में खुली खरीद व्यवस्था वाली परियोजनाएं लगायी गयीं। उसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान रहा।

मेरकॉम इंडिया के अनुसार बाजार में सीधे उत्पादकों से सौर बिजली खरीद का सबसे बड़ा बाजार कर्नाटक रहा। उसके बाद, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान रहा। ऐसे बाजार में इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी करीब 73 प्रतिशत है।

कई कंपनियां निजी उपयोग के लिए बिजली परियोजनाएं जगह की कमी समेत विभिन्न कारणों से लगाने में असमर्थ होती हैं। वे खुले बाजार में सीधे उत्पादकों से बिजली खरीदकर अपनी मांग को पूरा करती हैं। नवीकरणीय ऊर्जा खुले बाजार से खरीदने की गति तिमाही-दर-तिमाही बढ़ रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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