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मध्य प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण, प्रति व्यक्ति आय ₹1,69,050 और दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन, देखिए 16 मुख्य बातें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 17, 2026 20:20 IST

स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राज्य का GSDP ₹7,81,911 करोड़ आंका गया है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है।

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ठळक मुद्देप्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था बना है।आय ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है, जो आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार का संकेत है।द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा है।

भोपालः मध्य प्रदेश विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया और जानकारी दी। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था बना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राज्य का GSDP ₹7,81,911 करोड़ आंका गया है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था का रूप ले लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के हवाले से कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी शासन और दूरदर्शी नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमान में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर 16,69,750 करोड़ रुपये पहुंचा, जो 2024-25 के 15,02,428 करोड़ से 11.14% अधिक है। स्थिर (2011-12) मूल्यों पर यह 7,81,911 करोड़ होकर 8.04% की वास्तविक वृद्धि दर्शाता है। प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर 38,497 से बढ़कर 1,69,050 रुपये तथा स्थिर मूल्यों पर 76,971 रुपये हो गई, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है।

क्षेत्रीय योगदान में प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा प्रचलित मूल्यों पर 43.09% (6,79,817 करोड़, 7.31% वृद्धि), द्वितीयक 19.79% (3,12,350 करोड़, 9.93% वृद्धि) तथा तृतीयक 37.12% (5,85,588 करोड़, 15.80% वृद्धि) रहा। स्थिर मूल्यों पर तृतीयक क्षेत्र 40.28% के साथ प्रमुख है। प्राथमिक में फसलें 30.17%, द्वितीयक में निर्माण 9.22%, तृतीयक में व्यापार-होटल 10.35% का योगदान रहा।

वित्तीय मोर्चे पर 2,618 करोड़ का राजस्व अधिशेष, राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66%, कर राजस्व में 13.57% वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3% अनुमानित है। कृषि में खाद्यान्न उत्पादन 14.68% बढ़ा, उद्योग में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित कर 1.17 लाख करोड़ निवेश से 1.7 लाख रोजगार सृजित होंगे।

स्वास्थ्य में मातृ मृत्यु दर 142/लाख, शिक्षा में ड्रॉपआउट शून्य (कक्षा 1-5)। नगरीय विकास में अमृत 2.0 से 24,065 करोड़ आवंटन। यह सर्वेक्षण मध्यप्रदेश को संतुलित विकास का मॉडल बनाता है, जहां ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्र फल-फूल रहे हैं।

* प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था बना है।

* वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

* स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राज्य का GSDP ₹7,81,911 करोड़ आंका गया है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है।

* वर्ष 2011-12 से 2025-26 की अवधि में प्रति व्यक्ति शुद्ध आय ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है, जो आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार का संकेत है।

* वर्ष 2025-26 में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा है।

* प्राथमिक क्षेत्र का कुल मूल्य ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर ₹6,79,817 करोड़ हो गया है, जिससे 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

* द्वितीयक क्षेत्र का GSVA ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर ₹3,12,350 करोड़ हो गया है, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

* तृतीयक क्षेत्र में सर्वाधिक 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और इसका कुल मूल्य ₹5,85,588 करोड़ तक पहुँच गया है।

* राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है तथा राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

* कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देता है।

* वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

* राज्य में दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँच गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

* औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिनसे ₹1.17 लाख करोड़ के निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजन की संभावना है।

* राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं, जो नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

* अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं।

* स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय ₹34,112 करोड़ रहा है तथा 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं।

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