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फरवरी में ही गुलाबी और सफेद रंग के हल्के शेड्स में चमक रहे कश्मीर के बाग, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

By सौरव गांगुली | Updated: February 28, 2026 13:11 IST

बारिश हो सकती है और तापमान में काफी गिरावट आ सकती है, जो जल्दी खिलने वाले फूलों को परखेगा।

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ठळक मुद्देअभी कश्मीर पर कोई खास वेस्टर्न डिस्टर्बेंस असर नहीं डाल रहा है।साल के इस समय के हिसाब से तानमान सामान्‍य से अधिक बना हुआ है।सर्दियों और शुरुआती वसंत में बारिश के लिए जरूरी हैं।

जम्मूः कश्मीर के बाग, जो गुलाबी और सफेद रंग के हल्के शेड्स में चमक रहे हैं, इस साल नार्मल से ज्‍यादा गर्म फरवरी के बाद असामान्य रूप से जल्दी खिल रहे हैं। हालांकि अभी घाटी में कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कोई भी अचानक मौसम सिस्टम समय से पहले खिलने वाले फूलों को गंभीर रूप से परख सकता है और फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। स्‍वतंत्र मौसम विज्ञानी‍ फैजान आरिफ कहते थे कि अभी हालात स्थिर हैं। उनका कहना था कि अभी कश्मीर पर कोई खास वेस्टर्न डिस्टर्बेंस असर नहीं डाल रहा है।

आसमान काफी हद तक साफ है, और साल के इस समय के हिसाब से तानमान सामान्‍य से अधिक बना हुआ है। हालांकि, हम एक ट्रांजिशनल फेज में हैं। अगर कोई माडरेट या स्ट्रान्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बनता है, तो इससे बारिश हो सकती है और तापमान में काफी गिरावट आ सकती है, जो जल्दी खिलने वाले फूलों को परखेगा।

जानकारी के लिए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्स्ट्राट्रापिकल सिस्टम जो आमतौर पर फरवरी और अप्रैल के बीच जम्मू कश्मीर पर असर डालते हैं, सर्दियों और शुरुआती वसंत में बारिश के लिए जरूरी हैं। मौसम के डेटा से पता चलता है कि इस दौरान इस इलाके में आम तौर पर कई बार हल्की से लेकर तेज वेस्टर्न डिस्टर्बेंस देखने को मिलते हैं, जिससे अक्सर थोड़े समय में ही 3–6 डिग्री सेल्सियस का उतार-चढ़ाव होता है,

साथ ही मैदानी इलाकों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होती है। हालांकि, इस साल, किसानों के फील्ड आब्जर्वेशन के मुताबिक, घाटी के कई हिस्सों में गर्मी की वजह से बादाम, चेरी और दूसरी फलों की फसलों में फूल अपने तय समय से लगभग 10–20 दिन पहले आ गए हैं। कीमती सेब की फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है,

क्योंकि सेब को अच्छे से फूल आने के लिए 1000 से 1,600 चिलिंग आवर्स की जरूरत होती है। बागवानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की बढ़त से वसंत में होने वाली गड़बड़ियों से पहले बचाव का समय कम हो जाता है। कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स एसोसिएशन के चेयरमैन, बशीर अहमद बशीर कहते थे कि किसान सावधानी से आसमान पर नजर रख रहे हैं। 

उनका कहना था कि अभी मौसम अच्छा है, और कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस नहीं है। लेकिन अगर अभी कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आता है और बारिश होती है या तापमान में अचानक गिरावट आती है, तो यह निश्चित रूप से फल लगने के स्टेज को टेस्ट करेगा। पीक ब्लूम के दौरान हल्की बारिश भी पालिनेशन में रुकावट डाल सकती है और पंखुड़ियां गिर सकती हैं।

शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलाजी आफ कश्मीर के एक एक्सपर्ट ने बताया कि फलों के पेड़, खासकर सेब – जो जम्मू कश्मीर में 1.6 लाख हेक्टेयर से अधिक इलाके में फैले हैं – एक जैसे फूल और अच्छी पैदावार के लिए सर्दियों के सही चिलिंग आवर्स पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

एक्सपर्ट का कहना था कि जब सर्दियां गर्म होती हैं, तो चिलिंग आवर्स में जमाव कम हो सकता है, जिससे फूल एक जैसे नहीं खिलते। अगर इसके बाद अचानक बारिश होती है या फूल आने के दौरान तापमान गिरता है, तो पालिनेशन एफिशिएंसी पर असर पड़ सकता है, जिससे आखिर में फल लगने और पैदावार कम हो सकती है।

याद रहे जम्मू कश्मीर की इकानमी में हार्टिकल्चर का अहम योगदान है, अकेले सेब का प्रोडक्शन भारत के कुल सेब प्रोडक्शन का लगभग 70-75 परसेंट है और इससे लाखों किसान परिवारों को मदद मिलती है। पैदावार में थोड़ी सी भी गिरावट का बड़े पैमाने पर आर्थिक असर हो सकता है।

यही कारण है कि अभी के लिए, शांत आसमान के नीचे फूल लहरा रहे हैं, जो शुरुआती वसंत का नजारा दे रहे हैं। लेकिन कश्मीर के मौसम में — जहां वेस्टर्न डिस्टर्बेंस तेज़ी से आ सकते हैं — असली चुनौती फूलों में नहीं, बल्कि इस बात में है कि क्या मौसम उन्हें अच्छी फसल बनने देगा।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरमौसमभारतीय मौसम विज्ञान विभागमौसम रिपोर्ट
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