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लॉटरी पर 28% की एकसमान दर से जीएसटी, पहली बार मतदान के जरिए लिया गया निर्णय

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 19, 2019 08:40 IST

सूत्रों ने बताया कि लॉटरी पर एकसमान जीएसटी के मुद्दे को लेकर मतदान का प्रस्ताव केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने दिया था.

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ठळक मुद्देराज्यों के मंत्रियों ने कहा कि जीएसटी संग्रह में कमी का कारण आर्थिक नरमी है इसका कारण जीएसटी दर का कम होना नहीं है. बकाए को लेकर राज्यों ने कहा सरकार डिफॉल्ट की राह पर गैर भाजपा शासित राज्यों ने जीएसटी व्यवस्था के तहत राजस्व क्षतिपूर्ति के बकाए को लेकर केंद्र को आड़े हाथ लिया

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने राज्यों तथा निजी क्षेत्र की लॉटरी के लिए 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का निर्णय लिया है. जीएसटी परिषद ने पहली बार मतदान के जरिये किसी मुद्दे पर निर्णय लिया. राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने जीएसटी परिषद की 38वीं बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि लॉटरी की नई दर मार्च 2020 से प्रभावी होगी.

जीएसटी परिषद की इस बैठक में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी मुद्दे पर बहुमत से निर्णय लेने के लिए मतदान का सहारा लेना पड़ा. इससे पहले जीएसटी परिषद की 37 बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर एकमत से निर्णय लिए गए. राज्यों को जीएसटी के तहत राजस्व संग्रह में कमी के लिए मिलने वाली क्षतिपूर्ति पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के आमने-सामने आ जाने के बाद लॉटरी के मुद्दे पर एक राय नहीं बन पा रही थी.

जीएसटी परिषद ने बुने गए तथा बिना बुने गए थैलों पर जीएसटी की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने का भी निर्णय लिया. पांडेय ने बताया कि बैठक में औद्योगिक पार्क स्थापित करने में सुविधा के लिए औद्योगिक भूखंडों के दीर्घकालिक पट्टों पर ऐसे निकायों को जीएसटी से छूट देने का निर्णय भी किया गया, जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है. अभी तक सिर्फ उन निकायों को छूट मिल रही थी, जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है.

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तथा राज्य स्तर पर शिकायत निपटान समितियों का गठन करने का भी निर्णय लिया गया, जिनमें केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी दोनों के अधिकारी शामिल होंगे. इनके अलावा व्यापार एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल रहेंगे. परिषद ने जुलाई 2017 से जीएसटीआर-1 के तहत विवरण दाखिल नहीं करने के मामलों में जुर्माने में ढील देने का निर्णय लिया है. अभी लॉटरी पर कराधान में दो तरह की व्यवस्था है. इसके तहत राज्य की लाटरी की राज्य में बिक्री पर 12 प्रतिशत और राज्य के बाहर की बिक्री पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है.

उन्होंने बताया कि 21 राज्यों ने 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का समर्थन किया, जबकि सात राज्यों ने इसका विरोध किया. लॉटरी उद्योग लंबे समय से 12 प्रतिशत की दर से एकसमान कर लगाने तथा पुरस्कार की राशि को कर मुक्त करने की मांग कर रहा था. उसका कहना था कि दोहरे कर से लॉटरी उद्योग की वृद्धि पर असर पड़ रहा है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉटरी के मुद्दे पर संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर कहा कि एकमत की परंपरा रही है लेकिन यह नियम नहीं है. उन्होंने कहा, ''इस परंपरा को बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए.'' उन्होंने कहा, ''यह (मतदान) परिषद ने नहीं थोपा, इसे मैंने भी अध्यक्ष होने के नाते नहीं थोपा, ऐसा एक सदस्य के अनुरोध पर किया गया.''

सूत्रों ने बताया कि लॉटरी पर एकसमान जीएसटी के मुद्दे को लेकर मतदान का प्रस्ताव केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने दिया था. अधिकतर राज्य जीएसटी स्लैब, दर में वृद्धि के खिलाफ जीएसटी परिषद की आज महत्वपूर्ण बैठक में ज्यादातर राज्यों ने जीएसटी स्लैब में बदलाव या वृद्धि का विरोध किया. उनकी दलील थी कि दरों में वृद्धि से नरमी की सामना कर रही अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

राज्यों के वित्त मंत्रियों ने राजस्व संग्रह में गिरावट और जीएसटी क्षतिपूर्ति भुगतान में विलंब को लेकर भी चिंता जताई. सूत्रों के अनुसार राज्यों के मंत्रियों ने कहा कि जीएसटी संग्रह में कमी का कारण आर्थिक नरमी है इसका कारण जीएसटी दर का कम होना नहीं है.

बकाए को लेकर राज्यों ने कहा सरकार डिफॉल्ट की राह पर गैर भाजपा शासित राज्यों ने जीएसटी व्यवस्था के तहत राजस्व क्षतिपूर्ति के बकाए को लेकर केंद्र को आड़े हाथ लिया और कहा कि 'सरकार डिफॉल्ट (भूगतान में चूक) की राह पर है.'' उनका कहना है कि जीएसटी परिषद की बैठक में राज्यों के जीएसटी के बकायों का समय पर भुगतान करने की कोई गारंटी नहीं दी गई, संविधान संशोधन के जरिये राज्यों को केंद्र की तरफ से जीएसटी में राजस्व क्षतिपूर्ति की गारंटी गारंटी दी गई है.

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