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सरकार रियल्टी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बिल्डरों की मांग पर विचार करेगी: आवास सचिव

By भाषा | Updated: May 28, 2021 19:06 IST

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नयी दिल्ली, 28 मई आवास और शहरी मामलों के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि सरकार रियल एस्टेट उद्योग की परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा 6-9 महीने तक बढ़ाने सहित विभिन्न मांगों पर गौर करेगी।

उन्होंने पिछले सात वर्षों में सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत 1.12 करोड़ घरों का निर्माण, प्रवासी श्रमिकों के लिए किफायती किराये के मकान योजना का शुभारंभ, किफायती आवास के लिए बुनियादी ढांचे का दर्जा और 100 स्मार्ट सिटी के बारे में प्रकाश डाला।

मिश्रा रियल एस्टेट कारोबारियों के संगठन नारेडको द्वारा आयोजित एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

नारेडको के प्रतिनिधियों ने कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र में मांग और आपूर्ति दोनों को पुनर्जीवित करने के लिए सचिव के समक्ष कई मांगें रखीं।

इनमें परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा 6-9 महीने तक बढ़ाने, मार्च 2023 तक सभी भवन अनुमतियों का विस्तार, अचल संपत्ति पर सरकारी करों को युक्तिसंगत बनाने और सीमेंट तथा स्टील की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की मांग शामिल हैं।

रीयल एस्टेट क्षेत्र पर कर्ज की ऊंची दर के बारे में उन्होंने कहा कि हम सरकारी शुल्कों को कम करने का प्रयास करेंगे। उन्हेंने स्टील और सीमेंट के दामों में भारी वृद्धि के बारे में आवास विकास कंपनियों की शिकायत पर कहा कि वह इस मुद्दे को संबंधित मंत्रालयों के सामने उठा चुके हैं। इसे वे फिर देखेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.13 करोड़ घरों की मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें से 48 लाख मकान बन चुके हैं और लोगों को उनका कब्जा दिया जा चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि अचल सम्पत्ति विकास क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 200 अरब डालर का योगदान कर रहा है। यह एक हजार अरब डालर के योगदान की दिशा में बढ़ रहा है।

नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि कोविड19 की दूसरी लहर से निर्माण कार्य धीमा हुआ है। निर्माण स्थलों पर आधी संख्या में मजदूर ही काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हालाता को देखते हुए आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष में समय बढ़ाया जाए। गौरतलब है कि रेरा

(भू-सम्पत्ति विकास विनियमन कानून के तहत) के तहत परियोजनाओं को एक तय समय में पूरा कर मकान का कब्जा न देने पर दंड का प्रावधान है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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