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Electric Vehicle Policy: ‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति’ को मंजूरी, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने की घोषणा, जानें फायदे

By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 15, 2024 16:17 IST

Electric Vehicle Policy: सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति’ को मंजूरी दी है। 

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ठळक मुद्देसीएनजी और पाइप वाली प्राकृतिक गैस में मिश्रण अनिवार्य होगा।2023 में 49.25 प्रतिशत बढ़कर 15,29,947 इकाई हो गई। ईवी उद्योग ने 2022 में कुल 10,25,063 वाहन बेचे थे।

Electric Vehicle Policy: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बड़ी घोषणा की है। सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति’ को मंजूरी दी है। देश में नवीनतम तकनीक वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का निर्माण होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह नीति प्रतिष्ठित वैश्विक ईवी निर्माताओं द्वारा ई-वाहन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए बनाई गई है। 4,150 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कम से कम 25% घटकों के साथ ईवी के लिए स्थानीय विनिर्माण स्थापित करने के लिए तीन साल की अनुमति देगी।

जो कंपनियां इन आवश्यकताओं को पूरा करती हैं, उन्हें $35,000 और उससे अधिक कीमत वाली कारों पर 15% के कम आयात शुल्क पर प्रति वर्ष 8,000 ईवी आयात करने की अनुमति दी जाएगी। भारत आयातित कारों पर उनके मूल्य के आधार पर 70% या 100% का कर लगाता है। ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाने और मेक इन इंडिया पहल का समर्थन करने की उम्मीद है।

सरकार ने भारत को विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को मंजूरी दे दी जिसमें न्यूनतम 50 करोड़ डॉलर (4,150 करोड़ रुपये) के निवेश के साथ देश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों को शुल्क में रियायतें दी जाएंगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि ईवी नीति के जरिये भारत को ईवी के विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने और टेस्ला समेत विभिन्न वैश्विक ईवी विनिर्माताओं से निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

इस नीति के तहत ई-वाहनों की विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों को कम सीमा शुल्क पर सीमित संख्या में कारों को आयात करने की अनुमति दी जाएगी। इस रियायत के लिए कंपनी को न्यूनतम 50 करोड़ डॉलर (4,150 करोड़ रुपये) का निवेश करना जरूरी होगा जबकि निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी।

बयान के अनुसार, “आयात के लिए स्वीकृत ईवी की कुल संख्या पर शुल्क में दी गई रियायत उस कंपनी की निवेश राशि या पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन राशि 6,484 करोड़ रुपये में से जो भी कम हो, तक सीमित होगा।" इसके मुताबिक, “यदि निवेश 80 करोड़ डालर या उससे अधिक है, तो प्रति वर्ष अधिकतम 8,000 की दर से अधिकतम 40,000 ईवी के आयात की अनुमति होगी।

वार्षिक आयात सीमा से बची रह गई इकाइयों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।” योजना दिशानिर्देशों के तहत परिभाषित डीवीए (घरेलू मूल्यवर्धन) और न्यूनतम निवेश मानदंड हासिल न करने की स्थिति में बैंक गारंटी लागू की जाएगी। कंपनी की तरफ से जताई गई निवेश प्रतिबद्धता को छोड़े गए सीमा शुल्क के बदले में बैंक गारंटी से समर्थित होना होगा।

मंत्रालय ने कहा, "इस नीति से भारतीय उपभोक्ताओं को नवीनतम तकनीक तक पहुंच प्रदान की जा सकेगी। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देगी और ईवी कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर ईवी परिवेश को मजबूत करेगी। इससे उत्पादन की उच्च मात्रा, अर्थव्यवस्था के विस्तार, उत्पादन की कम लागत और आयात में कटौती, कच्चे तेल की आयात कम होगी, व्यापार घाटा कम होगा, विशेषकर शहरों में वायु प्रदूषण कम होगा और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"

बयान में कहा गया कि यह नीति प्रतिष्ठित वैश्विक ईवी निर्माताओं द्वारा ई-वाहन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार की गई है। नीति के अनुसार, एक कंपनी को "भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और ई-वाहनों का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के लिए तीन साल का समय मिलेगा, और अधिकतम पांच साल के भीतर 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन हासिल करना होगा।"

टॅग्स :Electric VehiclesGovernment of India
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