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बोझ से राहत की ओर: IFC पर बड़ी राहत, 25% भुगतान पर NOC?, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह का बड़ा फैसला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 20, 2026 18:33 IST

दिल्ली जल बोर्डः पिछले कुछ वर्षों में IFC की गणना प्रणाली में बदलाव-ऑक्यूपेंसी आधारित मॉडल से फ्लोर एरिया आधारित मॉडल में-काफी बढ़ोतरी हुई।

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ठळक मुद्देदिल्ली जल बोर्डः  लोगों को तुरंत राहत मिलेगी जिनके प्रोजेक्ट्स ऊंचे IFC के कारण रुके हुए थे।दिल्ली जल बोर्डः आम नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा।दिल्ली जल बोर्डः बिल्डिंग अप्रूवल और प्रोजेक्ट्स में लगातार देरी हो रही थी।

नई दिल्लीः दिल्ली के आम उपभोक्ताओं और डेवलपिंग एजेंसियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (IFC) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक नीति सुधार को मंजूरी दी है। लंबे समय से IFC की उच्च दरें दिल्ली में निर्माण और पुनर्विकास के लिए बड़ी बाधा बनी हुई थीं। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में DJB ने एक अंतरिम लेकिन प्रभावी समाधान लागू किया है, जिससे उन लाखों लोगों को तुरंत राहत मिलेगी जिनके प्रोजेक्ट्स ऊंचे IFC के कारण रुके हुए थे।

मुख्य निर्णय

अब उपभोक्ता और डेवलपर्स बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के समय कुल IFC का केवल 25% भुगतान करके प्रोविजनल NOC प्राप्त कर सकेंगे। शेष राशि को बाद में, पानी के कनेक्शन के अंतिम स्वीकृति के समय लागू दरों के अनुसार समायोजित किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में IFC की गणना प्रणाली में बदलाव-ऑक्यूपेंसी आधारित मॉडल से फ्लोर एरिया आधारित मॉडल में-काफी बढ़ोतरी हुई।

कई मामलों में शुल्क 5 से 10 गुना तक बढ़ गया, जिससे आम नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा और निर्माण व पुनर्विकास गतिविधियां ठप हो गईं। इस वजह से कई संपत्ति मालिक NOC प्राप्त नहीं कर पा रहे थे, जिससे बिल्डिंग अप्रूवल और प्रोजेक्ट्स में लगातार देरी हो रही थी।

इस फैसले पर बोलते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा

हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऊंचा IFC लोगों को अपना घर बनाने से रोक रहा है। यह न तो नागरिकों के लिए उचित था और न ही सिस्टम के लिए प्रभावी। हमने इसे एक व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण से ठीक करने का फैसला किया। हम सिस्टम को लोगों के अनुकूल बना रहे हैं, न कि लोगों को सिस्टम के अनुसार संघर्ष करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

अब सिर्फ 25% भुगतान के साथ निर्माण शुरू किया जा सकता है और बाकी राशि का निष्पक्ष समायोजन बाद में किया जाएगा। सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Ease of Doing Business’ के विज़न के अनुरूप है। उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, बाधाओं को हटाना और नागरिकों व डेवलपर्स को बिना देरी आगे बढ़ने के लिए सशक्त करना है। कुशल और नागरिक-अनुकूल प्रशासन का मॉडल बनाना है।

मुख्य लाभ

* रुके हुए प्रोजेक्ट्स को तुरंत मंजूरी* तेज़ अप्रूवल और निर्माण कार्य में तेजी* शुरुआती वित्तीय बोझ में बड़ी कमी* सिस्टम में पारदर्शिता और लचीलापन

अतिरिक्त राहत

200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां IFC से मुक्त रहेंगी, जबकि बड़े प्लॉट्स को भी संशोधित और तर्कसंगत ढांचे का लाभ मिलेगा। अनुमान है कि कई मामलों में कुल IFC देनदारी 50% से 70% तक कम हो सकती है, जिससे नागरिकों पर लागत का बोझ काफी घटेगा।

यह सुधार:* निर्माण और पुनर्विकास गतिविधियों को बढ़ावा देगा* रोजगार और आर्थिक गति को बढ़ाएगा* सरकारी सिस्टम में भरोसा और अनुपालन को मजबूत करेगा* दिल्ली में निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाएगा

प्रवेश साहिब सिंह ने कहा:

“हमारा उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि एक न्यायसंगत और संतुलित व्यवस्था बनाना है। जब लोग आसानी से भुगतान कर पाएंगे, तभी सिस्टम मजबूत होगा। हम दिल्ली में घर बनाना सरल, तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

टॅग्स :Delhi Jal Boardदिल्ली सरकारDelhi Government
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