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सीईआरसी ने बीएसईएस वितरण कंपनियों को एनटीपीसी के दादरी संयंत्र के साथ पीपीए से हटने की अनुमति दी

By भाषा | Updated: July 2, 2021 22:47 IST

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नयी दिल्ली, दो जुलाई केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की वितरण कंपनियों बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर को एनटीपीसी के दादारी-I बिजली संयंत्र के साथ किये गये बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) से बाहर निकलने की अनुमति दे दी। इस संयंत्र ने पिछले साल 30 नवंबर को वाणिज्यिक स्तर पर सेवा के 25 साल पूरे कर लिये।

सीईआरसी का आदेश एक जुलाई, 2021 को जारी किया गया। यह दिल्ली में काम कर रही बीएसईएस बिजली वितरण कंपनियों के महंगे बिजली संयंत्रों के साथ समझौते से बाहर निकलकर बिजली खरीद लागत को कम करने के प्रयासों के अनुरूप है। साथ ही यह उनके नवीकरणीय बिजली खरीद बाध्यता (आरपीओ) के भी अनुरूप है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग ने आरपीओ को लेकर वितरण कंपनियों को जिम्मेदारी दे रखी है।

आरपीओ के तहत वितरण कंपनियों को बिजली नियामकों द्वारा अनिवार्य किये गये नवीकरणीय स्रोतों से बिजली का एक निश्चित अनुपात खरीदना आवश्यक है। वे आरपीओ को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र भी खरीद सकते हैं।

आदेश में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता दादरी-I उत्पादन संयंत्र से अपनी हिस्सेदारी के अनुसार बिजली आबंटन समाप्त करने को लेकर बिजली मंत्रालय से संपर्क कर पीपीपी/पूरक बिजली खरीद समझौते से अलग हो सकते हैं। दादरी-I संयंत्र ने 30 नवंबर, 2020 को अपने वाणिज्यिक परिचालन की तारीख से 25 साल पहले ही पूरे कर लिए हैं, बिजली मंत्रालय द्वारा याचिकाकर्ताओं के हिस्से का आवंटन रद्द करने के बाद, इनकार के पहले अधिकार से संबंधित नियमन 17 (2) के प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे...।’’

नियमन 17 (2) के तहत वितरण कंपनियों के पास आबंटन के विपरीत बिजली खरीद से इनकार का पहला अधिकार है।

दादरी-I बिजली संयंत्र से बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर को क्रमश: 62 मेगावाट और 562 मेगावाट बिजली हिस्सेदारी आबंटित की गयी थी।

बीएसईएस वितरण कंपनियों ने एनटीपीसी के दादरी-I संयंत्र से नवंबर 2020 में, यानी बिजलीघर के वाणिज्यिक संचालन की तारीख से 25 साल पूरे होने पर बिजली लेनी बंद कर दी थी और दादरी- I प्लांट से जुड़े समझौते से बाहर निकलने की मांग की थी।

एनटीपीसी ने बीएसईएस वितरण कंपनियों के बाहर होने से इनकार किया था। उसके बाद दोनों कंपनियां इस मामले में सीईआरसी के पास गयी थी।

बीएसईएस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सीईआरसी ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 25 साल बाद बिजली खरीद समझौते को समाप्त करने का अधिकार है।’’

‘‘इससे डिस्कॉम की बिजली खरीद लागत में कमी आएगी और बिजली दरों को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे दिल्ली में बीएसईएस के 45 लाख उपभोक्ताओं को लाभ होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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