नागपुर: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार काे केंद्रीय बजट पेश किया. इसमें हाईस्पीड रेलवे काॅरिडाेर विकसित करने की घाेषणा की गई. इन काॅरिडाेर में मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु और दिल्ली–वाराणसी काॅरिडाेर का समावेश है. लेकिन नागपुर-मुंबई हाईस्पीड रेलवे काॅरिडाेर का जिक्र तक नहीं किया गया.
जबकि, इस काॅरिडाेर के लिए आवश्यक प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2021 में ही हाे गई थी. यहां तक की विस्तृत प्रकल्प रिपाेर्ट यानी डीपीआर भी बनाकर रेलवे बाेर्ड के हवाले किया जा चुका था. ऐसे में बजट में नागपुर-मुंबई हाईस्पीड रेलवे काॅरिडाेर की घाेषणा न हाेने से नागपुर सहित समूचे महाराष्ट्र के रेलयात्री सरकार से यही सवाल पूछ रहे हैं कि नागपुर-मुंबई हाईस्पीड का डीपीआर क्याें बनाया रे...!.
गाैरतलब है कि नागपुर-मुंबई हाईस्पीड रेलवे कॉरिडोर को साकार करने की दृष्टि से वर्ष जनवरी 2021 से एरियल सहित सभी आवश्यक सर्वे वर्क किए गए. लगभग 10 माह तक चले इन एरियल (लीडार) सर्वे, राइडरशिप सर्वे, एन्यरोन्मेंटल इम्पैक्ट सर्वे और सोशल इम्पैक्ट सर्वे के बाद सर्वे से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करके विस्तृत प्रकल्प रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू हुआ.
वर्ष 2022 की शुरुआत में ही तत्कालीन रेल राज्यमंत्री रावसाहब दानवे ने नागपुर में हुई पत्र परिषद में स्पष्ट रूप से कहा था कि डीपीआर बनाने का काम शीघ्र पूरा हाेकर इसे मार्च 2022 तक रेल मंत्रालय काे साैंपा जा सकता है. उन्हाेंने ये भी कहा था कि बुलेट ट्रेन समृद्धि महामार्ग के सामांतर दौड़ेगी. इसके लिए केवल 30 फीसदी भूमि अधिग्रहण करनी होगी.
नागपुर-मुंबई बुलेट ट्रेन का अधिकांश भाग (एलिवेटेड) रहेगा. इसलिए किसानों को नुकसान नहीं होगा. उधर, नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लि. दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी लाेकमत समाचार से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि तमाम सर्वे पूरे हाेकर डीपीआर तैयार किया जा रहा है और इसे मार्च 2022 तक रेलवे बाेर्ड के हवाले किया जा सकता है. यदि ऐसा हाेता ताे रेल मंत्रालय डीपीआर को मंजूरी देता और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी मंजूरी ली जाती.
इसके बाद नागपुर-मुंबई हाईस्पीड रेलवे कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हाे सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हाे सका. इसके उलट, इस बार के बजट में देश के अन्य इलाकाें में छह हाईस्पीड रेलवे काॅरिडाेर की घाेषणा करके नागपुर सहित विदर्भ और महाराष्ट्र के यात्रियाें और नागरिकाें काे ठेंगा दिखाने का काम किया गया है.
350 किमी की रफ्तार से दाैड़ती ट्रेन
नागपुर-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट 741 किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित था. इसमें प्रस्तावित स्टेशनों में नागपुर, खापरी डिपो, वर्धा, पुलगांव, कारंजालाड, मालेगांव, जहांगीर, मेहकर, जालना, औरंगाबाद, शिरडी, नासिक, इगतपुरी और शाहपुर का समावेश था. इस कॉरिडोर में हाईस्पीड ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किमी प्रति घंटे की हाेती थी. इस ट्रेन में 750 यात्री यात्रा कर सकते थे. लेकिन अब सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया है.
प्रति किलाेमीटर ₹232 करोड़ अनुमानित खर्च
नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने नागपुर–मुंबई हाईस्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर परियोजना के लिए जाे डीपीआर बनाकर रेलवे बाेर्ड के पास मंजूरी के लिए भेजा था, उसके अनुसार 766 किमी लंबी इस परियोजना के लिए प्रति किमी 232 करोड़ रुपए खर्च आने का अनुमान था. ये परियोजना पूरी होने पर मुंबई–नागपुर की यात्रा केवल 3.5 घंटे में पूरी हो सकती थी. बुलेट ट्रेन का कॉरिडोर समृद्धि महामार्ग, राष्ट्रीय महामार्ग और अन्य मार्गों के समानांतर रखा जाना था.