नई दिल्लीः केंद्र सरकार द्वारा रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश आम बजट में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए 3.09 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 2.87 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से लगभग आठ प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के लिए आवंटन को पिछले वर्ष के 1.70 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.87 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा।
कैंसर की दवाएं, माइक्रोवेव ओवन होंगे सस्ते; आयातित छाते, एटीएम महंगे
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 में सीमा शुल्क में कटौती की घोषणा की। इससे 17 कैंसर की दवाओं के साथ-साथ सात दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेष चिकित्सकीय आवश्यकताओं वाली दवाओं एवं खाद्य पदार्थों के साथ-साथ ‘माइक्रोवेव ओवन’ में उपयोग होने वाले कलपुर्जों की कीमत भी कम हो जाएगी। आयातित सस्ते छाते, एटीएम/कैश डिस्पेंसर जैसी कुछ वस्तुएं मूल सीमा शुल्क में वृद्धि के कारण महंगी हो जाएंगी।
सस्ती होने वाली वस्तुएं-
*कैंसर की दवाएं
*सात दुर्लभ बीमारियों से संबंधित विशेष चिकित्सा प्रयोजनों के लिए दवाएं, औषधियां और खाद्य पदार्थ
*व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित दवाएं *माइक्रोवेव ओवन के प्रमुख कलपुर्जे
*विमान के इंजन सहित कलपुर्जे
* ‘सोलर ग्लास’ के कलपुर्जे
*परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आयातित सामान
*महत्वपूर्ण खनिजों के लिए पूंजीगत सामान
महंगी होने वाली वस्तुएं व सेवाएं-
*कम लागत वाले आयातित छाते
*पोटेशियम हाइड्रोक्साइड
*एटीएम/कैश डिस्पेंसर मशीन और उसके कलपुर्जे
*विदेशी लोगों के लिए फिल्म और प्रसारण उपकरण
*चिड़ियाघर में बाहर से जानवर व पक्षी लाना
*अमोनियम फॉस्फेट/नाइट्रो-फॉस्फेट उर्वरक और नेफ्था जैसे उर्वरक
*कॉफी भूनने, बनाने या बेचने की मशीन
*अरंडी खल।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एनएचएआई मार्च में समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में अपने ऋण को दो लाख करोड़ रुपये से नीचे लाने की योजना बना रहा है। एनएचएआई की ऋण देनदारी 2021-22 में 3.5 लाख करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, 31 दिसंबर, 2025 तक, यह घटकर 2.35 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।
भारत में मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बीच केंद्रीय बजट 2026-27 में विधि मंत्रालय को मतदाता पहचान पत्रों के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि लोकसभा चुनाव से संबंधित खर्चों को निपटाने के लिए 500 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं। मतदाता फोटो पहचान पत्रों (ईपीआईसी) पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्यों के बीच बराबर बांटा जाता है।
प्रत्येक राज्य अपने मतदाताओं की संख्या के अनुपात में राशि का भुगतान करता है। भारत में मतदाताओं की संख्या वर्तमान में लगभग 99 करोड़ है। केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, संशोधित अनुमानों के तहत 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बजट अनुमानों के अनुसार, यह राशि 300 करोड़ रुपये थी।
इसके अलावा निर्वाचन आयोग, चुनाव कानूनों, संबंधित नियमों और निर्वाचन आयोग की नियुक्तियों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने वाले विधि मंत्रालय को 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के लिए 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। किसी भी चुनाव के बाद विभिन्न एजेंसियों और राज्यों द्वारा इस उद्देश्य के लिए किए गए खर्चों को पूरा करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।