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मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा-ठीक है, दवा हो रहा, असर भी दिख रहा और घबराइए नहीं, सब कुछ होगा?, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर सीओ और आरओ

By एस पी सिन्हा | Updated: February 2, 2026 16:33 IST

बिहार राजस्व सेवा संघ के अनिश्चितकालीन अवकाश (हड़ताल) पर जाने की घोषणा के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है।

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ठळक मुद्देबिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कब्जा है।ठीक है, दवा हो रहा है, दवा का असर भी हो रहा है। घबराइए नहीं, सब कुछ होगाजब तक मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं होगा, राजस्व कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा।

पटनाः बिहार राजस्व सेवा संघ के आह्वान पर सूबे के सभी अंचलों के अंचलाधिकारी (सीओे) और राजस्व अधिकारी (आरओ) सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इसी क्रम में राजधानी पटना के बीआरएसए भवन में आयोजित सभा में बिहार राजस्व सेवा के पदाधिकारी इकट्ठा हुए थे। वहीं, सीओ और आरओ के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने को लेकर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि “ठीक है, दवा हो रहा है, दवा का असर भी हो रहा है। घबराइए नहीं, सब कुछ होगा।

जब दवा का असर दिखेगा, तब वही लोग कहेंगे कि सरकार अच्छा काम कर रही है।” उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से सुधार होगा और सरकार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। जब उनसे जिलों में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “ठीक है, देखते हैं क्या होता है? बातचीत होगी तो करेंगे। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं, सब कुछ का समाधान निकलेगा।

बता दें कि सीओ और आरओ के हड़ताल पर जाने की मुख्य वजह बिहार राजस्व सेवा संवर्ग नियमावली 2010 का अनुपालन है। संघ की मांग है कि राजस्व सेवा के अधिकारियों को डीसीएलआर (डीसीएलआर) और भू-अर्जन पदाधिकारी के पदों पर पदस्थापित किया जाए। वर्तमान में इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कब्जा है।

जिसे लेकर बिहार प्रशासनिक सेवा और बिहार राजस्व सेवा संघ के बीच लंबे समय से 'शीतयुद्ध' जारी है। इसके साथ ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक अधिसूचना, जिसमें 'अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी' के नाम का उल्लेख है, के संबंध में संघ का कहना है कि यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है और पूर्व में मुख्य सचिव को भी इससे अवगत कराया जा चुका है।

लेकिन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अधिकारियों को हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। इस आंदोलन को 'यूनाइटेड बिहार राजस्व सेवा संघ' (बिरसा यूनाइटेड) का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ है। बिरसा यूनाइटेड के अध्यक्ष आदित्य शिवम शंकर ने सीओ और आरओ के इस फैसले का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और विभागीय प्रधान सचिव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं होगा, राजस्व कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा।

इस हड़ताल के कारण जिले में दाखिल-खारिज, जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र का निर्गमन, अतिक्रमण हटाओ अभियान और भू-सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं। इसबीच बिहार राजस्व सेवा संघ के अनिश्चितकालीन अवकाश (हड़ताल) पर जाने की घोषणा के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है।

इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिला समाहर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि हड़ताल के बावजूद राजस्व प्रशासन का कार्य बाधित न हो और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रधान सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि अंचल कार्यालयों के कार्य ठप होने की आशंका है।

इसे देखते हुए राज्य सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं। पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि अधिकारियों से सरकारी डोंगल और वाहन तत्काल वापस ले लिए जाएं। इसके अलावा अंचल कार्यालयों में बक्सों और आलमारियों में संधारित राजस्व अभिलेखों की चाबियां भी संबंधित पदाधिकारियों से हस्तगत कर ली जाएं, ताकि सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और कार्य बाधित न हो।

सरकार ने यह भी कहा है कि हड़ताल पर जाने वाले पदाधिकारियों की सेवा अवधि को “नो वर्क, नो पे” के आधार पर परिगणित करने पर विचार किया जाएगा। यानी हड़ताल की अवधि के लिए वेतन भुगतान नहीं किया जा सकता है। इसे हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

प्रधान सचिव ने सभी जिला समाहर्ताओं से अनुरोध किया है कि अनिश्चितकालीन हड़ताल की अवधि तक अंचल कार्यालयों को चलाने के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आदेश की प्रतिलिपि ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, अपर समाहर्ताओं और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

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