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भारत की विकास दर चालू वित्त वर्ष में 7 फीसदी रहने का ADB ने जताया अनुमान

By आकाश चौरसिया | Updated: April 11, 2024 10:31 IST

भारत की विकास दर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में इतने फीसद रहने वाला है। इस बात का अनुमान एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने जता दिया है। इसके साथ 2022-23 में चालू वित्त वर्ष की तुलना में विकास दर काफी ज्यादा बताई थी।

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ठळक मुद्देएशियाई विकास बैंक ने भारत की विकास दर को लेकर अनुमान जाहिर किया एडीबी ने बताया कि विकास दर 7 फीसद तक रहेगीलेकिन, पिछले वित्त वर्ष में अब की तुलना में अनुमान काफी ज्यादा था

नई दिल्ली: एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त-वर्ष 2024-25 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर का अनुमान पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर गुरुवार को सात प्रतिशत कर दिया। एडीबी ने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की निवेश मांग से मजबूत बढ़ोतरी होने के साथ इसका मार्ग प्रशस्त होगा।

हालांकि, 2024-25 का विकास अनुमान 2022-23 वित्त वर्ष के अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है। एडीबी ने पिछले साल दिसंबर में वित्त-वर्ष 2024-25 में विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। एशियाई विकास बैंक ने इस वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत किया।

एडीबी ने नोट कराते हुए बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2022-23 में अपने अनुमानति आंकड़ें से बेहतर करने में सफल रही है। इस दौरान भारत की मैन्युफेक्चरिंग और सेवा क्षेत्र ने काफी अच्छा परफॉर्म किया। यह ग्रोथ पूर्वानुमानित सीमा से अधिक जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि 2024-25 और 2025-26 वित्तीय वर्षों में यह धीमी भी हो सकती है।

IMF ने क्या कहा..अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से कहा गया है कि विश्व भर में विकास दर धीमे रहने वाली है। जबकि, विश्व अर्थव्यवस्था 2030 तक विकास दर 2.3 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ये भी बताया कि बड़े रिफॉर्म होंगे जिससे उत्पादकता और तकनीकी रूप से आगे यह कारवां बढ़ने जा रहा है। इसमें आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस जैसी सुविधा भी शामिल है। आगे ये भी बताया कि वित्त-वर्ष 2008-2009 से आर्थिक विकास दर धीरे होती गई और अब यह अनुमान आईएमएफ ने जाहिर किया।

एडीबी रिपोर्ट के अनुसार, ग्रोथ डिमांड और और सप्लाई पर निर्भर करेगा। लेकिन, मुद्रास्फीति आगे भी डाउनवर्ड ट्रेंड में वैश्विक रूप से बनी रहेगी। इससे उबरने के लिए फेडरल बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक अपने स्तर से नई नीतियों का निर्माण कर सकते हैं। 

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