kissa court kachahari Review: अदालती कहानियों पर बनी फिल्में अक्सर कानूनी धाराओं और वकीलों की तीखी दलीलों तक ही सिमट कर रह जाती हैं, लेकिन "किस्सा कोर्ट कचहरी का" इस घिसी-पिटी धारणा को पूरी तरह तोड़ती है। लवली फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनी यह फिल्म केवल कानूनी दांव-पेच की कहानी नहीं है, बल्कि उस 'इंसान' की मर्मस्पर्शी दास्तान है जो न्याय की जटिल मशीनरी के बीच पिसता है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत निर्देशक रजनीश जायसवाल का विजन और उनकी गहरी सोच है। उन्होंने फिल्म को पारंपरिक 'फिल्मी मेलोड्रामा' बनाने के बजाय 'यथार्थ' के धरातल पर रखा है। जायसवाल की निर्देशन शैली की विशेषता यह है कि उन्होंने एक ठंडे अदालती फैसले के पीछे छिपे मानवीय दर्द और मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है।
उनकी सोच ने कोर्ट की चारदीवारी को केवल एक निर्जीव सेट के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत 'चरित्र' के रूप में पेश किया है। फिल्म की गति और दृश्यों का चुनाव यह दर्शाता है कि निर्देशक का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि दर्शकों को व्यवस्था के भीतर छिपे सच से रूबरू कराना था। विजन ने फिल्म को एक साधारण कानूनी ड्रामे से ऊपर उठाकर एक सार्थक सिनेमा की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।
फिल्म की जान इसके मंझे हुए कलाकार हैं जैसे राजेश शर्मा, जिन्होंने अपनी सशक्त स्क्रीन उपस्थिति और संवाद अदायगी से उन्होंने फिल्म में एक भारीपन पैदा किया है। कानूनी व्यवस्था पर उनका दृष्टिकोण दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। इसके साथ ही अनुभवी अभिनेता बृजेंद्र काला ने एक बार फिर साबित किया है कि वे सूक्ष्म अभिनय के उस्ताद हैं।
कानून के धुंधले क्षेत्रों और मानवीय धैर्य को उन्होंने जिस सहजता से जिया है, वह काबिले-तारीफ है। सह-कलाकार के रूप में नीलू कोहली, सुशील चंद्रभान, कृष्ण सिंह बिष्ट, अंजू जाधव, संजीव जायसवाल, लोकेश तिलकधारी और नन्हीं अवन्या कुमारी का अभिनय कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है। पूरी कास्ट की परफॉरमेंस इतनी स्वाभाविक है कि कहीं भी कृत्रिमता महसूस नहीं होती।
फिल्म का तकनीकी पक्ष इसके कथानक को मजबूती देता है। धर्मेश बिस्वास की सिनेमैटोग्राफी (DOP) कोर्ट के तनावपूर्ण और बोझिल माहौल को बखूबी पकड़ती है। वहीं, संगीत निर्देशक प्रवेश मलिक का 'रूहानी संगीत' कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है और दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखता है।
निर्माता अरुण कुमार इस गंभीर और चुनौतीपूर्ण विषय को बड़े पर्दे पर लाने के साहस के लिए सराहना के पात्र हैं। किस्सा कोर्ट कचहरी का" एक ईमानदार और विचारोत्तेजक फिल्म है। यह हमें याद दिलाती है कि न्याय के तराजू में केवल बेजान सबूत नहीं, बल्कि सिसकती भावनाएं भी तौली जाती हैं। यदि आप एक ऐसी कहानी देखना चाहते हैं जो दिल और दिमाग दोनों पर दस्तक दे, तो यह फिल्म आपके लिए है।
Court Kacheri Series Review:
रेटिंगः 3.5
निर्देशकः रजनीश जायसवाल
निर्माताः अरुण कुमार