Do Deewane Seher Mein movie review: आत्मविश्वास की कमी है, क्योंकि वह "श" की जगह "स" बोलता है। इसीलिए इसका शीर्षक "दो दीवाने शहर में" नहीं है। चौकोर चश्मे पहनती है और अपनी शक्ल-सूरत को लेकर हीन भावना से ग्रस्त है। रोशनी श्रीवास्तव (मृणाल ठाकुर), एक आत्मसंदेह से ग्रस्त, लेकिन महत्वाकांक्षी युवती शशांक शर्मा (सिद्धांत चतुर्वेदी) से मिलती है, जो एक दयालु व्यक्ति है और बोलने में कठिनाई के कारण अपने आत्मविश्वास को खो बैठा है। करियर के दबाव, पारिवारिक अपेक्षाओं और शहरी अकेलेपन का सामना करते हैं। इस सप्ताह सिनेमागृहो में सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर स्टारर फ़िल्म दो दीवाने एक शहर में रिलीज़ हुई है।
मेट्रो शहर की भागदौड़ में अपने कॉर्पोरेट जॉब की दैनिक चैलेंजेज के बीच रिश्तों और सच्चे प्यार को समझने साथ ही एक बढ़िया कहानी के साथ प्रस्तुत करती है तेज़ रफ्तार और भावनात्मक रूप से व्यस्त जीवन वाली Mumbai के बीच यह फिल्म एक ऐसी प्रेम कहानी दिखाती है जो दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चाई और कमियों से बनती है।
यह कहानी बताती है कि आज के दौर में प्यार परफेक्ट नहीं होता — वह उलझा हुआ, अधूरा लेकिन फिर भी खूबसूरत होता है। फ़िल्म की कहानी मुंबई महानगर के दो युवा, रोशनी श्रीवास्तव ( मृणाल ठाकुर) और शशांक शर्मा ( सिद्धांत चतुर्वेदी) की कहानी है यह एक मिलेनियल लव स्टोरी है शशांक शर्मा एक कॉरपोरेट कंपनी में जॉब करते है लेकिन उन्हें श और स बोलने में प्रॉब्लम है।
रोशनी एक मीडिया एजेंसी में जब करती है लेकिन उसका भी एक कॉम्प्लेक्स है उसका चेहरा बहुत अच्छा नहीं है वह फिट नहीं है इसलिए वह एक मोटा चश्मा पहनती है. रोशनी और शशांक के परिवार वाले चाहते है की उनकी शादी हो जाये . लेकिन दोनों टालते रहते है दोनों होशियार, शानदार, और चुपचाप अपनी इनसिक्योरिटीज़ से लड़ रहे हैं।
एक ऐसी दुनिया में जो प्रोजेक्शन से ऑब्सेस्ड है - आप कैसे दिखते हैं, कैसे बोलते हैं, खुद को कैसे दिखाते हैं, रोशनी और शशांक फिट होने के लिए स्ट्रगल करते हैं। दोनों सोशली ऑक्वर्ड हैं, दोनों अपने कुछ हिस्से छिपाते हैं, उन्हें पता चलता है कि वे जितना ज़्यादा दिखावा करते हैं,
उतने ही खोए हुए होते हैं - जब तक कि वे धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्यार में नहीं पड़ जाते। यह रॉ होने की खूबसूरती की कहानी है। रियल होने की हिम्मत, अनफिल्टर्ड होने की। एक ऐसा सफर जहाँ दो इम्परफेक्ट लोग धीरे-धीरे अपनी सभी इम्परफेक्शन के साथ खुद को अपनाना सीखते हैं।
सिद्धांत चतुर्वेदी ने एक बेहद काम्पेक्स किरदार को सहजता से निभाया है. उनके अभिनय में किरदार की बेबसी बहुत ही नेचुरल देखिती है कई सीन में उनका अंदर का डर और सेल्फ-डाउट बिना ज्यादा डायलॉग के महसूस होता है। मृणाल ठाकुर ने रोशनी के किरदार में बहुत ही शानदार अभिनय किया है।
उनका किरदार मॉडर्न वर्किंग वुमन की रियल स्ट्रगल और इमोशनल बैलेंस को बहुत अच्छे से दिखाता है। नैना के किरदार में संदीपा धार के दृश्य सीमित है लेकिन असरदार है इला अरुण को देखना सुखद लगता है।
डायरेक्शन
निर्देशक रवि उदयवार ने महानगर के बैकड्रॉप पर आम से दिखने वाले साधारण किरदारों की कहानी को बहुत ही स्वाभाविक तरीक़े से दिखाया है. कहानी के साथ दर्शक बहुत जल्दी जुड़ जाते है. कभी यह रोशनी की कहानी लगती है तो कभी शशांक की लगती है .
और फ़िल्म इन दोनों के प्यार की कहानी लगती है फिल्म क्लासिक रोमांस की सॉफ्ट फीलिंग और आज के रिलेशनशिप की रियलिटी के बीच बहुत अच्छा बैलेंस बनाती है। डायलॉग्स नैचुरल, कोटेबल और जेन जी फ्रेंडली हैं,
फ़ाइनल वर्डिक्ट
तेज़ रफ्तार और भावनात्मक रूप से व्यस्त जीवन वाली मुंबई के बीच यह फिल्म एक ऐसी प्रेम कहानी बताती है कि आज के दौर में प्यार परफेक्ट नहीं होता। वह उलझा हुआ, अधूरा लेकिन फिर भी खूबसूरत होता है। रोशनी और शशांक के सफ़र के साथ यह फ़िल्म मुंबई की बेचैन अफरा-तफरी से लेकर उसके पुराने ज़माने के चार्म तक, और आखिर में कुमाऊं, उत्तराखंड के बर्फ से ढके पहाड़ों तक - यह फिल्म बहुत ही सुंदर दिखाई देती है । 'दो दीवाने शहर में' एक ऐसे प्यार को पाने के बारे में है जो आपको आज़ाद कर दे। एक ऐसा प्यार जो आपको बिना बदले बेहतर बना दे। एक ऐसा प्यार जो धीरे से आपसे कहे - आप जैसे हैं वैसे ही काफी हैं।
Do Deewane Seher Mein movie review:
कास्ट : सिद्धांत चतुर्वेदी, मृणाल ठाकुर, इला अरुण, जॉय सेनगुप्ता, आयशा रजा, इनेश कोटियन, संदीपा धर, दीपराज राणा, मोना अंबेगांवकर, अचिंत कौर, नवीन कौशिक, विराज घेलानीडायरेक्टर: रवि उदयवारप्रोड्यूसर: संजय लीला भंसाली, प्रेरणा सिंह, उमेश कुमार बंसल, भारत कुमार रंगाजॉनर: रोमांटिक ड्रामाअवधि: 2 घंटे 18 मिनट लैंग्वेज: हिंदीसेंसर : यू/ए रिलीज़ डेट : 20 फरवरी 2026
रेटिंग: 3.5