US Attack on Venezuela: यह कैसी नजीर पेश कर रहा है अमेरिका?
By रहीस सिंह | Updated: January 8, 2026 05:42 IST2026-01-08T05:42:09+5:302026-01-08T05:42:09+5:30
US Attack on Venezuela: ट्रम्प द्वारा सोशल मीडिया पर हथकड़ी लगाकर एक तस्वीर पोस्ट करना- यह किस तरह का संदेश है?

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US Attack on Venezuela: एक संप्रभु देश के चुने हुए राष्ट्रपति की किसी दूसरे देश द्वारा गिरफ्तारी और फिर उस देश के राष्ट्रपति द्वारा यह घोषणा करना कि उस देश पर शासन हम करेंगे. इस कार्रवाई को किस श्रेणी में रखा जाए? यह न संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेदों के अधीन सही ठहराई जा सकती है और न ही किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय कानून की परिधि में आती है.
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजाल्व के तहत वेनेजुएला पर कार्रवाई करना, उनके कमांडोज द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को घसीटते हुए बाहर लाना और फिर ट्रम्प द्वारा सोशल मीडिया पर हथकड़ी लगाकर एक तस्वीर पोस्ट करना- यह किस तरह का संदेश है? क्या वेनेजुएला में हुई कार्रवाई अपवाद तक सीमित रहेगी या फिर यह एक नजीर की तरह सामने आएगी जिसे अमेरिका सेट कर रहा है?
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस यह मान रहे हैं कि ‘अमेरिका की कार्रवाई खतरनाक नजीर बन सकती है.’ यह सच है लेकिन इसके आगे क्या? क्या यह 21वीं सदी की सच्चाई बनने जा रही है? हालांकि अमेरिका के अंदर से भी इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज आ रही है. यही कि बिना युद्ध की औपचारिक घोषणा या कांग्रेस की अनुमति के बिना की गई सैन्य कार्रवाई संवैधानिक रूप से गलत है.
लेकिन प्रश्न यह उठता है कि यदि यह गलत है तो क्या डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? नहीं. करवाई तो तब भी नहीं हुई थी जब जॉर्ज बुश जूनियर ने रासायनिक हथियारों का बहाना बनाकर बगदाद (इराक) का ध्वंस किया था और सद्दाम हुसैन का खात्मा. पर क्या वहां से कोई रासायनिक हथियार मिला था? नहीं न. फिर भी दुनिया चुप रही.
कहीं ट्रम्प यह संदेश देने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं कि यही उनका ‘मागा’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) प्लान है और यही ‘अमेरिका फर्स्ट’ की राह? ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी. वहां से उनके देश के खिलाफ साजिशें रची जा रही थीं.
वे यह भी आरोप लगाते हैं कि वेनेजुएला सरकार नार्काे आतंकवादी नेटवर्क का समर्थन कर रही थी और अमेरिका में ड्रग्स भेज रही थी. उनकी नजर में वेनेजुएला में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था. लेकिन मानवाधिकारों का उल्लंघन तो उनके पाकिस्तानी मित्र असीम मुनीर के यहां भी हो रहा है.
क्या किया उन्होंने? उसे तो व्हाइट हाउस में बैठकर लंच और डिनर कराया गया. वेनेजुएला और अमेरिका के खिलाफ साजिश, यह दावा मजाक सा नहीं लगता! वे यह भी दावा करते हैं कि राष्ट्रपति मादुरो अवैध गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे. संभव है ऐसा हो, लेकिन इसके लिए आपको कार्रवाई के लिए किसने अधिकृत किया?
संयुक्त राष्ट्र संघ ने? सुरक्षा परिषद में हुए निर्णय ने? अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने? अमेरिकी कांग्रेस ने? इनमें से किसी ने नहीं. फिर किसने? ट्रम्प की अंतरात्मा ने या फिर अमेरिका के इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेस ने! दरअसल अमेरिका दुनिया को यह भुलावा देने की कोशिश कर रहा है कि कार्रवाई उसकी आत्मरक्षा का विस्तारित रूप है और कुछ नहीं.
हालांकि इसके पक्ष में उसके पास कोई साक्ष्य नहीं है. संयुक्त राष्ट्र संघ का चार्टर स्पष्ट रूप से आर्टिकल 2(4) में कहता है कि किसी अन्य राज्य पर बल प्रयोग तभी किया जा सकता है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमति दी हो या जब आत्मरक्षा का स्पष्ट प्रमाण मौजूद हो. यहां तो दोनों ही नहीं थे. तो क्या ट्रम्प विश्व व्यवस्था को अपनी मुट्ठी में करने के लिए खतरनाक खेल खेल रहे हैं?
दरअसल वेनेजुएला पर डोनाल्ड ट्रम्प की गिद्ध दृष्टि काफी पहले से लगी हुई है. वेनेजुएला ही नहीं, उनकी नजर हर उस देश या द्वीप पर है जहां तेल, गैस या रेयर अर्थ जैसे बहुमूल्य खनिज हैं. वे हर उस देश को इसी तरह से धमका रहे हैं जहां से उन्हें प्राकृतिक संपदा हासिल हो सकती है. रही बात वेनेजुएला की तो ट्रम्प ने उसकी घेरेबंदी कई महीने पहले ही आरम्भ कर दी थी.
उन्होंने सितंबर 2025 में कैरेबियन सागर में उसकी दो दर्जन से अधिक नावों पर हमला किया था जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे. उस समय अमेरिका की तरफ से दावा किया गया था कि जिन नावों को निशाना बनाया गया है उनमें मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही थी. लेकिन सबूत पेश नहीं कर पाया.
दरअसल अमेरिका के अधिकारी तो खुलेआम यह ऐलान करते हुए देखे गए हैं कि वेनेजुएला का तेल वाशिंगटन का है. यही इस खेल के केंद्र में है. अमेरिका ने अक्तूबर 2025 में ही कैरेबियन सागर में नौसेना के यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को तैनात कर दिया था. इसके साथ ही करीब 5000 सैनिकों की तैनाती दक्षिणी अमेरिका में की गई. दरअसल यह वेनेजुएला की नौसैनिक घेरेबंदी थी, और कुछ नहीं.
इस सम्पूर्ण टकराव के केंद्र में तेल है. दुनिया जानती है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. तेल ही नहीं वेनेजुएला तो गैस, सोना, लोहा, निकल और बॉक्साइट जैसे खनिजों के मामले में भी बहुत संपन्न है. इतिहास इस बात का गवाह है कि साम्राज्यवादी शक्तियां सदैव ऐसे प्राकृतिक संसाधनों पर वक्रदृष्टि रखती हैं.
वे अवसर तलाशती हैं और कब्जा करने की युक्तियां भी. अमेरिका ने भी यही किया. थोड़ा पीछे जाकर देखें तो 1990 के दशक के पूरे होने से कुछ समय पहले तक यानी 1999 तक अमेरिकी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल से भरपूर लाभ उठाया. उस समय तक वेनेजुएला एक खुली अर्थव्यवस्था अपनाए हुए था जिसके चलते वहां अमेरिकी कंपनियों का वर्चस्व था लेकिन 1999 में ह्यूगो शावेज सत्ता में आए और उन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया. इससे अमेरिकी कंपनियों का खेल बिगड़ गया.
2002 में उनके तख्तापलट की असफल कोशिश भी हुई. 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद निकोलस मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने. उनका पैटर्न वही रहा जिसे शावेज ने सेट किया था. अब अमेरिका का या यूं कहें कि अमेरिका के असल सत्ताधारी अर्थात इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का सब्र टूटने लगा क्योंकि वह तो यही मान रहा था कि वेनेजुएलाई तेल वाशिंगटन का है.
ट्रम्प स्वयं कारोबारी हैं इसलिए जब वे सत्ता में आए तो उन्हें औरों की अपेक्षा इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स की आवाज अधिक सुनाई दी. फलतः उन्होंने 2017 में वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया. 2019 में इन्हें और कठोर बनाया ताकि वेनेजुएला अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने कच्चे तेल को न बेच पाए.
उसे दिक्कतें हुईं भी लेकिन वह झुका नहीं. जो बाइडेन ने भी इन प्रतिबंधों को जारी रखा. जब ट्रम्प दूसरी बार सत्ता में आए तो उन्होंने मादुरो का गेम ओवर करने का निर्णय ले लिया. ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजाल्व इसी का परिणाम है.