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वेद प्रताप वैदिक का ब्लॉग: चीन अपनी हठधर्मिता छोड़े

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: March 30, 2019 07:03 IST

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति में यह प्रस्ताव चार बार गिर चुका है, सिर्फ चीन के विरोध के कारण. अब सुरक्षा परिषद में यदि चीन ने वीटो नहीं किया या वह तटस्थ रहा तो प्रतिबंध की घोषणा हो जाएगी.

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अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंध लगवाने की ठान रखी है. ऐसा लगता है कि जिसने दर्द दिया, वही दवा भी देगा. अफगानिस्तान में सोवियत रूस का मुकाबला करने के लिए 30-35 साल पहले अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बना दिया था.

उसका खामियाजा ईरान से लेकर भारत तक सभी देश भुगत रहे थे. स्वयं अमेरिका और पाकिस्तान भी उसके शिकार बन गए. अब ट्रम्प प्रशासन सीधे सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव ला रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति में यह प्रस्ताव चार बार गिर चुका है, सिर्फ चीन के विरोध के कारण. अब सुरक्षा परिषद में यदि चीन ने वीटो नहीं किया या वह तटस्थ रहा तो प्रतिबंध की घोषणा हो जाएगी. यदि चीन ने यहां भी वीटो किया तो उसे इसकी सफाई देनी होगी. यह सफाई चीन की छवि खराब कर देगी.

अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के संयुक्त दबाव के कारण चीन कुछ नरम पड़ा था. उसने मांग की थी कि यदि भारत पाकिस्तान के साथ संवाद शुरू करे और उसके विरुद्ध अपनी फौजी तैयारी रोके तो वह प्रतिबंध का समर्थन कर सकता है. लेकिन भारत यह कैसे कर सकता है? पुलवामा हमले पर जांच का जो दस्तावेज भारत ने दिया था, पाक सरकार ने उसे रद्द कर दिया है. उसने कहा है कि पुलवामा-कांड में पाक का कोई हाथ नहीं है और पाक में 22 आतंकवादी शिविरों के चलने की बात झूठी है. 

इमरान सरकार आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की घोषणा करती है लेकिन पाक फौज के सामने वह निढाल है. पाकिस्तान में फौज और चीन, इन दोनों की चल रही है, इमरान की नहीं. इमरान का यह कहना कितना हास्यास्पद है कि उन्हें पता ही नहीं कि चीन के उइगर मुसलमानों पर चीन कोई अत्याचार कर रहा है या नहीं? चीन अपना और पाकिस्तान, दोनों का नुकसान कर रहा है. यह सही समय है जब चीन को अपनी हठधर्मिता छोड़ देनी चाहिए.

टॅग्स :चीनमसूद अजहर
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