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ब्लॉग: ट्विटर से 54 लाख यूजर्स के डेटा की चोरी! सोशल मीडिया को समझना होगा उसकी सुरक्षा में हैं कई खामियां

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: August 8, 2022 14:14 IST

ट्विटर को रोज 1.45 करोड़ यूजर्स इस्तेमाल करते हैं, जबकि 3.3 करोड़ हर माह उसे उपयोग में लाते हैं. ट्विटर पर हर दिन 50 करोड़ ट्‌वीट किए जाते हैं,

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विश्व के चर्चित माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म और सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ का विवादों से पुराना नाता है. पहले उद्योगपति एलन मस्क के साथ विवाद के बाद अब उसके डाटा की चोरी की पुष्टि हो चली है. हालांकि वर्ष 2006 में सैनफ्रांसिस्को में स्थापित कंपनी के डाटा की सुरक्षा पर सवाल हमेशा से हैं. 

इस बार कंपनी ने मान लिया है कि पिछले साल कई उपयोगकर्ताओं के खातों की निजता उस समय जोखिम में पड़ गई थी, जब उसके सॉफ्टवेयर में खामी का फायदा उठाकर हैकर्स ने सेंधमारी की थी. फिलहाल 1.3 अरब खातेदारों को साथ लेकर चलने वाली कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने उपयोगकर्ताओं का डाटा चोरी हुआ, लेकिन अपुष्ट खबरों में 54 लाख उपयोगकर्ताओं के डाटा चोरी की बात सामने आई है. लेकिन आंकड़ों को लेकर ट्विटर ने कोई पुष्टि नहीं की और न ही कोई ठोस बयान दिया. मगर डाटा सुरक्षा को लेकर उपयोगकर्ताओं को आश्वासन जरूर दिया है. 

विदित हो कि ट्विटर को रोजाना 1.45 करोड़ उसके उपयोगकर्ता इस्तेमाल करते हैं, जबकि 3.3 करोड़ हर माह उसे उपयोग में लाते हैं. ट्विटर पर हर दिन 50 करोड़ ट्‌वीट किए जाते हैं, जो हर साल 200 अरब पहुंच जाते हैं. इतना बड़ा दायरा होने के बावजूद डाटा असुरक्षा हमेशा जगजाहिर होती रहती है. 

ताजा मामले को साल की शुरुआत में री-स्टोर प्राइवेसी की एक रिपोर्ट में पाया गया था. तब बताया गया था कि डाटा चोरी ‘ट्विटर’ के ‘एंड्रॉयड’ उपयोगकर्ताओं की ‘ऑथराइजेशन प्रोसेस’ के एक बग से हुई, जिससे उपयोगकर्ताओं के फोन नंबर, ई-मेल, आईडी, नाम और पते चोरी हुए. सॉफ्टवेयर गड़बड़ी से जुटाए गए ब्यौरे को एक लोकप्रिय हैकिंग प्लेटफॉर्म पर 30,000 डॉलर में बेचा भी गया. इसकी पुष्टि डाटा चोरी की वजह बने बग के लिए ‘बग बाउंट प्रोग्राम’ के तहत एक हैकर को ट्विटर की ओर से 5,040 डॉलर देने से हुई थी. 

सभी कड़ियों को साथ जोड़ने के बाद यह साफ है कि ‘माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म’ पर उपयोगकर्ताओं का डाटा पूर्णत: सुरक्षित नहीं है. इसी बात को लेकर भारत सरकार ने अनेक बार उसे कठघरे में खड़ा किया और कानून के दायरे में काम करने के लिए कहा है. किंतु अपने उपयोगकर्ताओं को उन्मुक्त मंच प्रदान करने की कोशिश में बार-बार उसके डाटा सुरक्षा की कलई खुलती जा रही है. 

उपयोगकर्ताओं की संख्या और उनकी पृष्ठभूमि के कारण अपना महत्व अधिक समझने वाली साइट को अब यह समझना होगा कि उसकी सुरक्षा में कई छेद हैं. लगातार बदलती तकनीक और गड़बड़ियों से अतिसुरक्षा का दावा बेमायने है. बेहतर होगा कि वह भारत जैसे देश के कानून का पालन कर सुरक्षा का एक अधिकार पा ले. अन्यथा उसे उपयोगकर्ताओं के कोपभाजन का शिकार तो होना ही पड़ेगा और अविश्वसनीयता के धब्बे के साथ दुनिया के देशों के कानून के चंगुल से फंसकर निकलना आसान नहीं होगा. 

टॅग्स :ट्विटरएलन मस्क
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