Manasi Joshi: The Inspirational Story of International Level Para Badminton Player | Manasi Joshi: जिसने हमें सिखाया की सपनों को छूने के लिए पैरों की नहीं हौसले की ज़रुरत होती है

“I was on my way to work on a two wheeler one day when a trucked rammed into me and completely crushed my leg. It wasn’t the driver’s fault – there was a pillar which hindered his vision. People around immediately took me to the hospital and even though it happened around 9:30 am I was only operated upon at 5:30 pm. The doctors tried to save my leg but after a few days it got infected and I had to be amputated. When the doctor told me, I asked him ‘why did you take so long? I knew for a while that this would happen.” — Manasi Joshi, 26 – An International Level Para-Badminton Player!

2 दिसंबर 2011 को हुई ये दुर्घटना किसी भी इंसान के आत्मविश्वास को ना सिर्फ ख़त्म कर देती है बल्कि उसकी जीवन के प्रति एक नकारात्मक सोच को विकसित करना शुरू कर देती है. लेकिन उनका संकल्प दृढ़ होता है उसको ऐसी कठिनाईयां विचलित तो कर सकती हैं लेकिन उनके साहस को ख़त्म नहीं कर सकती, उनके सपनों को समाप्त नहीं कर सकती।

ये कहानी है 26 साल की एक बहुत ही बहादुर युवती की जिसने अपनी ज़िंदगी को सदैव सकारात्मकता से जिया और इतनी कठिनाईयों के बावजूद अपने सपने को कभी टूटने नहीं दिया।

मानसी जोशी, 26 साल की एक International Level Para-Badminton Player, जो पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. मानसी सिर्फ 22 साल की थी जब एक दुर्घटना में ट्रक ने उनके पैरों को बुरी तरह से कुचल दिया, इतना की दोनों पैरों में इन्फेक्शन होने लगा और अंत में उनको काट कर अलग करना पड़ा.

अगर आपने ऊपर लिखे फेसबुक पोस्ट में गौर किया हो तो मानसी से लिखा है कि इस दुर्घटना में ट्रक ड्राइवर की कोई गलती नहीं थी, उसके आगे एक खंभा था जिसकी वज़ह से वो मानसी को देख नहीं पाया। इस एक पोस्ट से साफ़ झलकता है कि मानसी कितनी ज़िंदादिल इंसान हैं और उनमें दूसरों को माफ़ करने की खासियत भरी हुई है.

इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी मानसी ने अपने बचपन की मेहनत और अपने सपने को खोने नहीं दिया। 45 दिनों तक हॉस्पिटल में रहने के बाद मानसी उसी पुराने ज़ज़्बे के साथ वापस लौटी और कृत्रिम पैरों की मदद से अपने सपने को दोबारा जीना शुरू किया – वो सपना जो उन्होंने 6 साल की उम्र में अपने एक बहुत पुराने बैडमिंटन के साथ देखना शुरू किया था. दुर्घटना से उबरने के बाद उन्होंने अगस्त 2012 में अपना पहला मैच खेल और महिलाओं के सिंगल्स में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद मानसी ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और अब तक ना जाने कितने मेडल्स इस Hero के नाम हो चुके हैं.   

मानसी अभी भी अपने सपने को जी रही है एक बैडमिंटन चैम्पियन बनने का, और दूसरा पूरी दुनिया देखने का, मानसी अब तक पूरा भारत देख चुकी है और उसने अपनी स्कूबा डाइविंग की ट्रेनिंग भी पूरी कर ली है.

अगर आपको लगता है कि आपकी ज़िंदगी कठिनाईयों से भरी हुई है और आप पूरे निराशा से भरे हुए हैं तो मानसी जोशी की ये कहानी ज़रूर पढ़ियेगा।

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English summary :
Manasi Joshi: The Inspirational Story of International Level Para Badminton Player. Her Story will melt your heart and will motivate you to do which you feel is impossible for you to do.