आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने का लेना होगा संकल्प
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 1, 2026 07:34 IST2026-01-01T07:33:42+5:302026-01-01T07:34:07+5:30
इस जरूरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद सरकार ने स्वीकार किया है कि भारत में पिछले दो वर्षों में विमानों के जीपीएस सिस्टम के साथ 1951 बार छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी हैं.

प्रतीकात्मक फोटो
किसी दार्शनिक ने कहा है कि गलतियां करना गुनाह नहीं है लेकिन गलतियों को दोहराना गुनाह है. आज नए साल के पहले दिन हमारे सामने यही संकल्प लेने का अवसर है कि पिछले साल की गलतियों को दोहराने से हम बचें और प्रगति के नए शिखरों पर पहुंचने की कोशिश करें. नए साल में भारत के सामने एक बड़ी चुनौती अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की होगी, खासकर बांग्लादेश और नेपाल के साथ. बांग्लादेश अपने निर्माण के समय से ही भारत का एक महत्वपूर्ण सहयोगी देश रहा है, लेकिन वर्ष 2024 में दुनिया के कुछ बड़े देशों ने अपने निहित स्वार्थ के लिए जिस तरह से शेख हसीना का तख्ता पलट करवाया, उसके बाद से शेख यूनुस की सरकार के साथ भारत के रिश्ते सामान्य नहीं हो सके हैं.
रोटी-बेटी के रिश्तों वाले नेपाल के साथ भी इन दिनों भारत के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं और वहां के शासकों का झुकाव चीन की तरफ बढ़ रहा है. अमेरिका के साथ बनते-बिगड़ते रिश्तों के भविष्य की दृष्टि से भी वर्ष 2026 अहम होगा और इसके लिए हमें चीन से सीख लेनी होगी, जिसने रेयर अर्थ एलिमेंट्स सहित दुनिया के लिए महत्वपूर्ण कई चीजों पर लगभग एकाधिकार कायम करके अमेरिका की ऐसी नकेल कस रखी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहकर भी चीन पर अपनी धौंस जमा नहीं पा रहे हैं.
चीन ने ये उपलब्धियां एक-दो वर्षों में हासिल नहीं की हैं, बल्कि दशकों पहले से उसने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी थीं. वैश्विक उथल-पुथल और सभी देशों द्वारा अपने-अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दिए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘वैश्वीकरण’ का गुब्बारा अब फूट चुका है तथा ‘स्वदेशी’ को बढ़ावा देकर ही हमें दुनिया में अपने बल पर आगे बढ़ना होगा.
भारत के पास इतना बड़ा उपभोक्ता बाजार है कि हमें दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत ही नहीं है, बल्कि दूसरे देश हमारे बाजार से जो फायदा उठा रहे हैं, स्वदेशी को बढ़ावा देकर अगर हम उसे रोक सकें तो उसी से अपने देश को और समृद्ध बना सकते हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भी हमें नए साल में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि भविष्य में जीवन के हर क्षेत्र में इसका महत्व बढ़ने वाला है. अंतरिक्ष के क्षेत्र में हालांकि हमने काफी तरक्की की है और ढेरों उपग्रह लांच किए हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है. इस जरूरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद सरकार ने स्वीकार किया है कि भारत में पिछले दो वर्षों में विमानों के जीपीएस सिस्टम के साथ 1951 बार छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी हैं.
जीपीएस डेटा में गड़बड़ी से विमान की दिशा भटक सकती है, जो किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है. हालांकि भारत के पास अपना खुद का नाविक नामक स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम है जिसे इसरो ने बनाया है लेकिन इसे अभी और भी मजबूत बनाए जाने की जरूरत है ताकि विदेशी जीपीएस पर निर्भरता खत्म या कम की जा सके. कुल मिलाकर वर्ष 2026 में हमें हर क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में ध्यान देना होगा ताकि अमेरिका जैसे देशों की टैरिफ की धमकियों से हम बेअसर रहें और उथल-पुथल भरी दुनिया में भी आत्मनिर्भर बने रह सकें.