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अवधेश कुमार का ब्लॉग: जनसंख्या को अभिशाप नहीं, वरदान समझो

By अवधेश कुमार | Updated: August 14, 2019 05:58 IST

वर्षों पहले अमेरिका सहित पश्चिमी देशों और एशिया में जापान ने अपने यहां शिक्षा के माध्यम से लोगों में यह भाव पैदा किया और उनके यहां जनसंख्या नियंत्रित रही. हमारे यहां भी इसकी कोशिशें हुईं और यह कहना गलत है कि इसका प्रभाव नहीं पड़ा.

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ठळक मुद्देआज हमारे यहां जनसंख्या बढ़ने की औसत दर दो तीन दशक पहले से कम है. बावजूद इसके बड़े वर्ग को लग रहा है कि यह समस्या है और सरकार को ध्यान देना चाहिए.पूरा यूरोप और जापान बूढ़ों का देश हो रहा है.

भारत में एक बड़ा वर्ग जनसंख्या वृद्धि को सबसे बड़ी चुनौती मानकर इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा कारगर कदम उठाने की मांग करता रहा है. नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्नी बने हैं, उनके फेसबुक, ट्विटर, नमो एप से लेकर पत्नों के माध्यम से जनसंख्या नियंत्नण के लिए कानून बनाने की मांग की जा रही है. इसमें कई तरह के सुझाव आ रहे हैं. मसलन, दो से ज्यादा बच्चा पैदा करने वालों को सरकारी कल्याण कार्यक्रमों से वंचित कर दिया जाए, नौकरी में हैं तो प्रोन्नति न हो, मतदान का अधिकार ले लिया जाए आदि आदि. 

वर्षों पहले अमेरिका सहित पश्चिमी देशों और एशिया में जापान ने अपने यहां शिक्षा के माध्यम से लोगों में यह भाव पैदा किया और उनके यहां जनसंख्या नियंत्रित रही. हमारे यहां भी इसकी कोशिशें हुईं और यह कहना गलत है कि इसका प्रभाव नहीं पड़ा. आज हमारे यहां जनसंख्या बढ़ने की औसत दर दो तीन दशक पहले से कम है. बावजूद इसके बड़े वर्ग को लग रहा है कि यह समस्या है और सरकार को ध्यान देना चाहिए. हमारे सामने चीन का उदाहरण है जिसने माओत्से तुंग के कार्यकाल में ही आबादी नियंत्नण के सख्त नियम लागू किए. प्रश्न है कि क्या भारत में ऐसे ही सख्त नियम बनाए जाएं और क्या इसकी आवश्यकता है?

भारत को दुनिया भविष्य की महाशक्ति इसलिए मान रही है कि यहां युवा आबादी सबसे ज्यादा है. प्रधानमंत्नी कहते हैं कि हम सवा सौ करोड़ के देश हैं, इसलिए दुनिया से आंखें मिलाकर बात करते हैं. चीन में यह चिंता बढ़ रही है कि जनसंख्या नियंत्नण के कारण युवा आबादी में वह भारत से पीछे हो रहा है. अब चीन की कोशिश है कि युवा समय पर शादियां करें ताकि बच्चे पैदा हों. जापान में सरकार की ओर से लोगों से बच्चे पैदा करने की अपील की जा रही है. सरकार आंकड़ा जारी कर बता रही है कि अगर यह स्थिति रही तो लगातार आबादी घटती जाएगी. 

इसके अनुसार 2050 तक वहां दो करोड़ आबादी कम हो जाएगी. इटली की सरकार ने अपने पिछले वर्ष के बजट में प्रावधान किया कि जो भी दंपति तीन बच्चे पैदा करेगा उसे प्रोत्साहन के रूप में कृषि योग्य भूमि दी जाएगी. ये कुछ उदाहरण यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि घटती आबादी और उसमें भी काम करने योग्य युवा आबादी में ह्रास के कारण किस तरह दुनिया के देश चिंतित हैं. 

पूरा यूरोप और जापान बूढ़ों का देश हो रहा है. सामाजिक कल्याण के तहत इन पर काफी खर्च हो रहा है. इससे सभी देश परेशानी महसूस कर रहे हैं. परिवार प्रथा खत्म होते जाने के कारण पेंशन का बोझ सरकारों पर ही है. 

कहने का तात्पर्य यह कि जनसंख्या नियंत्नण के लिए कानून बनाकर हम भी कल उसी दशा में न पहुंच जाएं. जनसंख्या न समस्या थी, न हो सकती है. इस संदर्भ में विचार करें तो मूल बात दिखाई देगी जनसंख्या को संसाधन में परिणत करना. इसके लिए कार्यक्रम चलाए जाने की आवश्यकता है.

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