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कायराना हमलों से कश्मीर की जनता को डिगाया नहीं जा सकता

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: December 26, 2023 11:40 IST

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है और खुद का वजूद साबित करने के लिए पाकिस्तान के सक्रिय संरक्षण और सहयोग से भारत के विरुद्ध साजिश कर रहे आतंकवादी कभी सेना, कभी युवाओं तो कभी बुजुर्गों पर कायराना हमले करने लगे हैं।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है लेकिन खुद का वजूद साबित करने के लिए पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को संरक्षण दे रहा हैपाकिस्तान की नापाक हरकतों से न तो भारत सरकार के इरादे डिग सकते हैं और न ही कमजोर हो सकते हैं

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है और खुद का वजूद साबित करने के लिए पाकिस्तान के सक्रिय संरक्षण और सहयोग से भारत के विरुद्ध साजिश कर रहे आतंकवादी कभी सेना, कभी युवाओं तो कभी बुजुर्गों पर कायराना हमले करने लगे हैं।

उनकी इन हरकतों से न तो भारत सरकार के इरादे डिग सकते हैं और न ही जांबाज जवानों एवं राष्ट्रभक्त नागरिकों के हौसलों को कमजोर किया जा सकता है। कश्मीर में भीषण ठंड पड़ रही है और इसका फायदा उठाकर पाकिस्तानी सेना तथा उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवादियों की भारत में घुसपैठ करवा रही है।

पिछले हफ्ते आतंकवादियों ने चरवाहों के वेश में सेना के जवानों पर हमला किया और रविवार को तो उन्होंने धर्मस्थल में अजान पढ़ रहे पूर्व पुलिस अधिकारी की नृशंस हत्या कर दी। जिस धर्म की रक्षा के नाम पर आतंकवादी अपने कृत्यों को जायज ठहराते हैं, उसी का अनुकरण कर रहे निर्दोष लोगों के खून से हाथ रंगने में उन्हें जरा सा भी संकोच नहीं होता। रविवार को कश्मीर के बारामूला जिले में आतंकवादियों ने 72 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद शफी मीर की उस वक्त हत्या कर दी जब वह अजान पढ़ रहे थे।

आतंकवादियों के इस अमानवीय कृत्य से पूरे कश्मीर में रोष फैल गया है। मोहम्मद शफी मीर ने आजीवन देश, धर्म तथा आम आदमी की सेवा की। पुलिस अफसर रहते हुए उन्होंने आतंकवाद से न केवल लोहा लिया बल्कि उसके खूनी पंजे से लोगों की रक्षा भी की। एक देशभक्त अफसर होने के नाते देश के हितों की रक्षा उनके लिए सर्वोपरि रही और इसीलिए वे आतंकवादियों की नजर में खटक रहे थे।

कश्मीर में हाल के कुछ महीनों में लक्षित हत्याएं (टारगेट किलिंग) हो रही है। आतंकवादी दहशत फैलाने के इरादे से ऐसे लोगों को निशाना बना रहे हैं जो आतंकवाद के आगे नहीं झुकते। यह जगजाहिर है कि इन आतंकवादियों को पाकिस्तान ही प्रशिक्षण, धन तथा अन्य तरह की सहायता उपलब्ध करवा रहा है। कश्मीर को पाने के लिए पाकिस्तान हताशा भरे कदम उठा रहा है लेकिन उसके मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों के कारण अपना पूर्वी हिस्सा गंवा चुका है और उसके कुछ अन्य हिस्से स्वतंत्र राष्ट्र बनने के लिए छटपटा रहे हैं। पाकिस्तान को कश्मीर से  ज्यादा चिंता अपना अस्तित्व बचाने की होनी चाहिए। वह कंगाल हो चुका है, खुद आतंकवाद को झेल रहा है और उसकी जनता का बड़ा हिस्सा अपना अलग देश चाहता है।

अमेरिका ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देने पर अंकुश इसलिए लगाया क्योंकि मदद की राशि का इस्तेमाल वह आतंकवाद के वित्त पोषण के लिए कर रहा था। आज पाकिस्तान का साथ उसके अमेरिका जैसे मित्रों ने छोड़ दिया है। अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पाकिस्तानी शासन तथा सेना दुनियाभर के वित्तीय संस्थानों के आगे हाथ पसारे खड़े हैं लेकिन पाकिस्तान की छवि इतनी खराब हो चुकी है कि विश्व बैंक, अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष, एशियाई विकास बैंक जैसी वित्तीय संस्थाएं उसकी सहायता करने को तैयार नहीं हैं।

पाकिस्तान गलतियों से सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। भारत ने अपना सारा ध्यान विकास और दुनियाभर में मित्र बनाने पर केंद्रित किया। आजादी के बाद हुए विदेशी हमलों और उसके बाद आतंकवादियों के जरिये खून बहाने की साजिशों का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन शांति, सद्भाव और मैत्री का रास्ता नहीं छोड़ा। जिस पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आतंकवादी अपने अड्डे चलाते हैं, वहां की जनता के सुर भारत में विलय के लिए उठने लगे हैं।

कश्मीर में हर शहादत आतंकवाद के खिलाफ हमारे हौसलों को और मजबूत बनाती है। जम्मू-कश्मीर आतंकवाद से मुक्त होने के करीब है। कश्मीर में चल रही तेज आर्थिक गतिविधियां और आम कश्मीरी नागरिक की विकास की मुख्य धारा में शामिल होने की ललक इसका प्रमाण है। इन सबके बावजूद भारत को आतंवादियों के विरुद्ध अपने अभियान को और मजबूत करना होगा।

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