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ब्लॉग: कई चुनौतियों से घिरी है देश की लाइफ लाइन

By अरविंद कुमार | Updated: February 3, 2024 15:26 IST

अंतरिम रेल बजट में रेलवे के आधारभूत ढांचे और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए 2024-25 में रेलवे को 2 लाख 52 हजार करोड़ का बजट मिला है। उम्मीद थी रेल बजट में वरिष्ठ नागरिकों और पत्रकारों समेत तमाम उन श्रेणियों के किराए पर छूट बहाल होगी, जिसे कोरोना काल में बंद कर दिया गया था।

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ठळक मुद्देसुरक्षा परियोजनाओं के लिए 2024-25 में रेलवे को 2 लाख 52 हजार करोड़ का बजट मिलाभारतीय रेल का समग्र शुद्ध राजस्व 2023-24 में 2000 करोड़ रुपए है2024-25 में 2800 करोड़ रुपए आंका गया है

अंतरिम रेल बजट में रेलवे के आधारभूत ढांचे और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए 2024-25 में रेलवे को 2 लाख 52 हजार करोड़ का बजट मिला है। उम्मीद थी रेल बजट में वरिष्ठ नागरिकों और पत्रकारों समेत तमाम उन श्रेणियों के किराए पर छूट बहाल होगी, जिसे कोरोना काल में बंद कर दिया गया था। पर ऐसा नहीं हुआ।

समग्र रूप से भारतीय रेल का समग्र शुद्ध राजस्व 2023-24 में 2000 करोड़ रुपए है, जबकि 2024-25 में 2800 करोड़ रुपए आंका गया है। यह आंकड़ा चिंताजनक दिखता है। भारतीय रेल की यातायात से कुल प्राप्तियां 2024-25 में 278500 करोड़ होंगी, जिसमें से अकेले संचालन व्यय पर ही 273000 करोड़ व्यय होगा।

फिलहाल इस बजट तक रेलवे का परिचालन अनुपात 98।22 फीसदी पर है और कई क्षेत्रीय रेलों पर आमदनी से अधिक व्यय हो रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे का परिचालन अनुपात 206।8 फीसदी पर आ गया है, जबकि उत्तर रेलवे का 132।8 फीसदी। कई दूसरे रेलवे जोन 100 रुपए कमाने के लिए 100 से अधिक रुपए व्यय कर रहे हैं।

इस लिहाज से देखें तो 2017 से रेल बजट को आम बजट में समाहित करते समय जो बातें कही गई थीं, उस दिशा में कहीं रेल नहीं नजर आती। तब कहा गया था कि रेलवे की अलग पहचान बरकरार रहेगी और उसे मिलनेवाली सहायता में किसी तरह की कमी नहीं होगी। पर रेलवे की अब पहले जैसी हैसियत नहीं रही। हालांकि केंद्रीय परिवहन ढांचे में सरकार ने रेलवे को सबसे अधिक तवज्जो दी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गति शक्ति के तहत तीन प्रमुख आर्थिक गलियारों का शुभारंभ करने की बात कही है जिसमें पहला ऊर्जा, खनिज और सीमेंट गलियारा होगा, जबकि दूसरा बंदरगाह संपर्कता और तीसरा अधिक यातायात वाला गलियारा। यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए 40000 सामान्य रेल डिब्बों को 'वंदे भारत' मानकों के अनुरूप परिवर्तित किया जाएगा। नगरीय रेल प्रणाली पर ध्यान दिया जाएगा।

रेलवे का आवंटन इस बार करीब 3 लाख करोड़ माना जा रहा था, पर 2024-25 के लिए जो 2।52 लाख करोड़ रुपए का परिव्यय आवंटित हुआ है वह अब तक सबसे अधिक है। 2023-24 में रेलवे के हिस्से में 2।4 लाख करोड़ रुपए आए थे। रेलवे को बजट में आवंटन लगातार बढ़ता गया है, लेकिन इसके साथ ही रेलवे की चुनौतियां भी बढ़ती रही हैं।

आजादी के बाद भारतीय रेल का फोकस यात्री सेवाओं पर था, पर अब यह कमाई पर केंद्रित हो रहा है। यात्री सेवाओं को भारतीय रेल भले सब्सिडाइज कर रहा है, पर रियायतें समाप्त कर दी गई हैं। किसानों से लेकर फौजियों, पत्रकारों और मजदूरों, कलाकारों से लेकर सीनियर सिटिजन आदि की 53 श्रेणी में रियायतें रेलवे देता था। पर कोरोना के बाद दिव्यांगों और छात्रों समेत 11 श्रेणी को छोड़ कर बाकी बंद हैं। रेलवे संसदीय समिति की सिफारिश और तमाम नेताओं की मांग के बाद भी ये बहाल नहीं हुई हैं।

2017 में रेल बजट को आम बजट में समाहित करने के बाद से इस बात ने जोर पकड़ा था कि सरकार अब रेल, सड़क, जहाजरानी और विमानन को मिला कर एक नया मंत्रालय बनाएगी। ऐसा तो नहीं हुआ, पर रेल नेटवर्क को विद्युतीकृत करने का एक बड़ा कदम रेलवे ने उठाया है। 2021-22 तक सारी रेल लाइनों का विद्युतीकरण होना था लेकिन देरी हुई। यह जल्दी ही हो जाएगा और सभी गाड़ियां बिजली से चलने लगेंगी तो ईंधन बिल में सालाना 13510 करोड़ रुपए की बचत होगी और क्षमता बढ़ेगी।

हाल के वर्षों में रेलवे ने सात प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया। सुरक्षा, परियोजना क्रियान्वयन, यात्री सुविधाएं और खान-पान सेवा, वित्तीय अनुशासन, संसाधन प्रबंधन, आईटी पहल और पारदर्शिता के साथ रेल प्रणाली में सुधार। पर यात्री सेवाओं का घाटा चिंताजनक गति से बढ़ने के कारण कई चुनौतियां आईं। पीपीपी और अतिरिक्त धन अर्जन की योजनाएं रेलवे को अपेक्षित सफलता नहीं दे सकी हैं।

अभी भी रेलवे का यात्री सेवाओं में सबसे अधिक जोर वंदे भारत पर ही है। अन्य यात्री सेवाएं बेहाल हैं। ट्रेनों की लेट-लतीफी भी समाप्त नहीं हुई है। रेलवे में स्वीकृत कुल पदों 1506299 की तुलना में इस समय कुल 12।03 लाख कर्मचारी हैं। हर साल काफी तादाद में पदों को सरेंडर किया जा रहा है। इस बीच में 2 जून, 2023 को बालासोर रेल हादसे के बाद भारतीय रेल आत्ममंथन के लिए भी विवश हुई है।

भारतीय रेल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क ही नहीं, भारत की लाइफ लाइन है। रोज इसके बूते ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर लोग सड़क या दूसरे साधनों से सस्ते में गंतव्य तक पहुंचते हैं। सवा दो करोड़ से ढाई करोड़ मुसाफिरों का जीवन इसी तंत्र के हाथ में है जो रोज औसतन 13523 सवारी और 9146 मालगाड़ियों का संचालन करता है। इसी नाते ये देश की लाइफ लाइन कही जाती है।

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