कौशल विकास योजना से खिलवाड़ करने वालों पर हो कठोर कार्रवाई
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 8, 2026 07:24 IST2026-01-08T07:23:26+5:302026-01-08T07:24:19+5:30
कैग की रिपोर्ट में योजना में इस तरह की अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिससे ऐसा लगता है कि दाल में काला नहीं है बल्कि पूरी दाल ही काली है!

कौशल विकास योजना से खिलवाड़ करने वालों पर हो कठोर कार्रवाई
युवाओं काे राेजगार के लिए काबिल बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की एक प्रमुख योजना - प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) - में भारी अनियमितता को लेकर कैग की रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चिंताजनक है. हजारों करोड़ रुपए खर्च करके स्किल्ड बनाए गए युवाओं में से अगर आधे को भी रोजगार नहीं मिल पाया है तो जाहिर है कि किसी न किसी स्तर पर योजना में भारी गड़बड़ी हुई है.
हाल ही में जारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के लिए वर्ष 2015 से 2024 के बीच कुल बजट लगभग 14450 करोड़ रु. था, जिसमें से 9261 करोड़ रु. खर्च किए गए. इस अवधि के दौरान 1.32 करोड़ युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य था, जिसमें से 1.1 करोड़ को सर्टिफिकेट भी दे दिया गया, लेकिन नौकरी मिली सिर्फ 41.29 प्रतिशत युवाओं को!
योजना में अनियमितता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उम्मीदवारों के लिए मोबाइल नंबर के इस्तेमाल के मामलों में लगभग 87 हजार ऐसे मोबाइल नंबर देखे गए जिनमें दस से कम डिजिट थे. कई ट्रेनिंग सेंटर बंद थे लेकिन कागज पर चलते दिखाए जा रहे थे. 94 प्रतिशत से ज्यादा रिकॉर्ड्स में तो बैंक खाते की वैध जानकारी ही नहीं थी, जिससे 34 लाख सर्टिफाइड युवाओं को 500 रुपए का रिवार्ड भी नहीं मिला यानी अरबों रुपए हजम कर लिए गए!
इस योजना में बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवारों को भी सर्टिफिकेट दे दिया गया जो जॉब-रोल की जरूरतों के लिए न्यूनतम एंट्री मापदंडों को भी पूरा नहीं करते थे. कैग की रिपोर्ट में योजना में इस तरह की अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिससे ऐसा लगता है कि दाल में काला नहीं है बल्कि पूरी दाल ही काली है!
ऐसे समय में, जबकि देश में कंपनियां कुशल कर्मचारियों के अभाव के संकट से जूझ रही हैं, एक बहुत ही नेक उद्देश्य से शुरू की गई योजना का ऐसा हश्र होना बेहद चिंतित करता है. निश्चित रूप से इस अनियमितता की समग्र जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि बेरोजगारों का यथार्थ में कौशल विकास हो सके, उन्हें रोजगार मिल सके और कंपनियों को कुशल कर्मचारियों के अभाव से न जूझना पड़े.