plastic pollution has become a big challenge | BLOG: जानें कब मुक्ति मिलेगी इस चुनौती बन चुके प्लास्टिक प्रदूषण से ?

महाराष्ट्र में हाल ही में प्लास्टिक के प्रयोग पर पूरी तरह से रोक लग गई है। उसके बाद से ही एक सावल मन मे है कि कब होगा जब पूरे देश में प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगेगी। क्योंकि प्लास्टिक ही है जो सबसे ज्यादा आज के समय में हमारे लिए हानिकारक है।

सभी को प्लास्टिक की दुनिया बहुत बड़ी है, आजकल प्लास्टिक का उपयोग हर जगह हो रहा है। एक प्लास्टिक बैग में उसके वजन से 2,000 गुना ज्यादा भार ढोया जा सकता है। हर साल दुनिया में 500 खरब प्लास्टिक बैग प्रयोग में लाए जाते हैं। यानिकि हर मिनट 20 लाख प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल लोग करते हैं। एक अनुमान के अनुसार हिन्दुस्तान में एक व्यक्ति एक वर्ष में लगभग 9.7 किलो प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन प्लास्टिक की बनी चीजों का आप उपयोग कर रहे हैं वह आपके लिये सही है या नहीं?

कहते हैं कि प्रकृति ने इंसान को जल, जंगल, जमीन, आकाश और अग्नि को दिया था ताकि वह सुख-शांति से दुनिया में रहे लेकिन आज हम कुदरत को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा स्वरूप बड़े रूप में प्लास्टिक का उपयोग है। प्लास्टिक का रूप हमें नदियों के जरिए देखने को मिल रहा है। तालाब अपना नामो-निशान खो रहे हैं और पीने का पानी हमें जल की निर्मल धारा के रूप में नहीं, बोतलों में मिल रहा है।

  जैसा कि सभी को पता है बोतलें प्लास्टिक से बनती हैं और यही प्लास्टिक आज हमारे सामने चुनौती बनकर खड़ा है, इससे होने वाले प्रदूषण से मुक्ति पाने की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस पर रोक लगना आज और आने वाले कल दोनों के लिए बेहद आवश्यक है। पैकेजिंग उद्योग में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इलैक्ट्रॉनिक उद्योग से निकलने वाला प्लास्टिक कचरा उसी से जुड़े लघु उद्योगों में इस्तेमाल किया जा रहा है। मुझे लगता है कि हम प्लास्टिक के बिना सुखी जीवन जीने की कल्पना भी कर सकते हैं। 

प्लास्टिक कोई समस्या नहीं है बल्कि समस्या यह है कि प्लास्टिक के साथ हम क्या करते हैं और उससे बनाई जाने वाली वस्तुओं को इस्तेमाल करने के बाद जो कचरा निकलता है उसका क्या करते हैं? गलती हमारी सबसे ज्यादा है अगर हम प्लास्टिक का प्रयोग करते हैं तो हमारा ही फर्ज है कि उसको प्रयोग में लाने के बाद सही ठिकाने पर उसको पहुंचाया जाए, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं इसी कारण से प्लास्टिक का प्रदूषण दिन पे दिन जान लेवा बन रहा है। इससे मुक्ति तब तक नहीं मिलेगी जब तक की हम खुद कोशिश नहीं करेंगे।


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