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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: नए निर्यात मौकों को मुट्ठी में करने का नया परिदृश्य

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: May 6, 2020 12:41 IST

इस समय देश के निर्यात संगठनों का कहना है कि वैश्विक निर्यात बाजार में निर्मित हो रहे नए निर्यात अवसरों को मुट्ठी में करने के लिए जरूरी है कि सरकार द्वारा देश के निर्यातकों की मुश्किलों को दूर किया जाए और उन्हें निर्यात बढ़ाने के लिए हर संभव सहारा दिया जाए. ऐसा होने पर निश्चित रूप से वैश्विक निर्यात बाजार में चीन के खाली होते हुए स्थान को भारत भरते हुए दिखाई देगा.

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हाल ही में 4 मई को गुटनिरपेक्ष देशों के वर्चुअल सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना संकट के समय दुनिया में भारत को मददगार देश माना जा रहा है. भारत ने 120 से ज्यादा देशों को दवाइयां निर्यात की हैं. ऐसे में भारत को दुनिया की नई फॉर्मेसी के रूप में देखा जा रहा है. निस्संदेह जहां कोरोना संकट से परेशानियों का सामना कर रहे कई देशों को भारत ने दवाइयों और खाद्य पदार्थो सहित कई वस्तुओं का निर्यात करके उन देशों के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है, वहीं भारत के लिए नई निर्यात संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया है.

गौरतलब है कि पिछले दिनों  प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के खिलाफ नए वैश्विक मौकों को भारत की ओर आकर्षित करने की रणनीतियों पर चर्चा हेतु एक व्यापक बैठक आयोजित की. इसमें प्रधानमंत्नी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अफरा-तफरी है और चीन में कार्यरत कई देशों की निर्यातक कंपनियां चीन से बाहर निकलकर विकल्प देश की तलाश में हैं. ऐसी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करने और भारत से निर्यात बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा रणनीतिक कदम उठाए जाने चाहिए.

ऐसे में वैश्विक निर्यात की नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सरकार के कुछ विभाग आगे बढ़ते हुए दिखाई भी दे रहे हैं. केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्नालय ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ बैठक आयोजित की, जिसमें कोरोना वायरस का संकट खत्म होने के बाद भारत को पूरी दुनिया की सप्लाई चेन का प्रमुख हिस्सा बनाने एवं भारत को दुनिया का अग्रणी निर्यातक बनाने की बेहतर संभावनाओं को मुट्ठी में करने की योजना पर काम शुरू करने का निर्णय लिया गया.

चूंकि इस समय दुनिया में दवाओं सहित कृषि, प्रोसेस्ड फूड, गारमेंट, जेम्स व ज्वेलरी, लेदर एवं लेदर प्रोडक्ट, कारपेट और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट जैसी कई वस्तुओं के निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं, अतएव ऐसे निर्यात क्षेत्नों के लिए सरकार के रणनीतिक प्रयत्न लाभप्रद होंगे. इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारतीय फार्मा उद्योग पूरी दुनिया में अहमियत रखता है.

भारत अकेला ऐसा देश है जिसके पास यूएसएफडीए के मानकों के अनुरूप अमेरिका से बाहर सबसे अधिक संख्या में दवा बनाने के प्लांट हैं. ऐसे में पिछले वर्ष 2019-20 में भारत से 21.98 लाख करोड़ रुपए मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया गया था. अब नए परिदृश्य में भारत से अधिक निर्यात बढ़ाकर निर्यात मूल्य को ऊंचाई पर ले जाने की संभावनाएं हैं. खास तौर से विशेष आर्थिक क्षेत्न (सेज), एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट (ईओयू), औद्योगिक टाउनशिप एवं ग्रामीण इलाकों में काम कर रही निर्यात इकाइयों में 20 अप्रैल से उत्पादन शुरू हो जाने से दुनिया के निर्यात बाजार में यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत नई निर्यात मांग पूरी कर सकता है.

ज्ञातव्य है कि देश में 238 सेज के तहत 5000 से अधिक इकाइयों में 21 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं. पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सेज इकाइयों से करीब 7.85 लाख करोड़ रु पए का निर्यात किया गया था.

इस समय देश के निर्यात संगठनों का कहना है कि वैश्विक निर्यात बाजार में निर्मित हो रहे नए निर्यात अवसरों को मुट्ठी में करने के लिए जरूरी है कि सरकार द्वारा देश के निर्यातकों की मुश्किलों को दूर किया जाए और उन्हें निर्यात बढ़ाने के लिए हर संभव सहारा दिया जाए. ऐसा होने पर निश्चित रूप से वैश्विक निर्यात बाजार में चीन के खाली होते हुए स्थान को भारत भरते हुए दिखाई देगा.

हम उम्मीद करें कि प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के खिलाफ अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और देश से निर्यात बढ़ाने के लिए जो रणनीति बनाई है उससे चीन से बाहर निकलते हुए निर्यात मौकों को भारत अपनी मुट्ठियों में लेते हुए दिखाई दे सकेगा. उम्मीद करें कि सरकार द्वारा देश की निर्यातक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक प्रोत्साहन दिए जाएंगे. इससे निश्चित रूप से देश की निर्यातक इकाइयां सुविधा पूर्वक उत्पादन करके निर्यात बाजार में तेजी से आगे बढ़ेंगी.

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