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रमेश ठाकुर का ब्लॉग: जेएनयू में आंदोलनों की आग में न झुलसे शिक्षा

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 14, 2019 07:17 IST

दिल्ली स्थित जेएनयू में समूचे हिंदुस्तान से गरीब तबके और स्कॉलरशिप प्राप्त छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं. कम से कम 40 फीसदी छात्र ऐसे होते हैं जो बेहद गरीब परिवारों से आते हैं. उनकी चिंता यही थी कि बढ़ी हुई फीस को वह कैसे चुका पाएंगे.

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू किसी न किसी रूप में हमेशा चर्चा में रहती है. इस वक्त भी चर्चा में है. इस बार बाहरी मसले को लेकर नहीं, बल्कि अंदरूनी मसले को लेकर चर्चा में है. सर्वविदित है कि जेएनयू को वाम विचारधारा से प्रेरित गढ़ माना जाता है. इसलिए दो असामान्य विचारधाराओं के बीच टकराव होता ही रहता है. कॉलेज परिसर में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों का हंगामा इस कदर बढ़ा कि छात्र-पुलिस आपस में भिड़ते देखे गए.

हालांकि छात्रों के आंदोलन के बाद जेएनयू प्रशासन द्वारा फीस वृद्धि को आंशिक रूप से वापस लेने की खबर है, लेकिन छात्रों की आपत्ति को समझना जरूरी है कि वे आखिर विरोध किस बात का कर रहे थे. दरअसल, कॉलेज में लागू ताजा नियमों के अनुसार होस्टल की फीस में बड़ा फेरबदल किया गया. पहले होस्टल के डबल सीटर कमरे का भाड़ा मात्र दस रुपए हुआ करता था जो सालों से चला आ रहा था. उसे तीन सौ रुपए कर दिया गया. इसके अलावा सिंगल कमरे का किराया पहले बीस रुपए था जिसे बढ़ाकर छह सौ कर दिया गया. छात्र संगठनों का कहना था कि कॉलेज प्रशासन ने बिना छात्र यूनियन को सूचित किए वृद्वि की है.  

गौरतलब है कि उम्दा स्तर की शिक्षा के लिहाज से जेएनयू का आज भी कोई सानी नहीं है. मेधावियों को ही प्रवेश मिलता है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र भारत का डंका बजा रहे हैं. कमरों के भाड़े के अलावा वन टाइम मेस सिक्योरिटी फीस में दूनी से ज्यादा वृद्धि की गई. पहले 5500 रुपए थी, जो 12000 हजार कर दी गई. साथ ही छात्रों के रहन-सहन को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया.

दिल्ली स्थित जेएनयू में समूचे हिंदुस्तान से गरीब तबके और स्कॉलरशिप प्राप्त छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं. कम से कम 40 फीसदी छात्र ऐसे होते हैं जो बेहद गरीब परिवारों से आते हैं. उनकी चिंता यही थी कि बढ़ी हुई फीस को वह कैसे चुका पाएंगे. जेएनयू में 11 नवंबर को दीक्षांत समारोह था जिसमें भाग लेने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी पहुंचे. उन्हें देखकर छात्र और उग्र हो गए. छात्रों ने मंत्री के निकलने के सभी रास्तों को अवरुद्ध कर दिया. 

इस कारण कई घंटों तक एचआरडी मंत्री आडिटोरियम में ही फंसे रहे.  इसके अलावा दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी शामिल होने के लिए पहुंचे, उनको भी छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. उनको भी छात्रों ने घेर लिया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनको किसी तरह वहां से बाहर निकाला और वह दीक्षांत समारोह से निकल गए. जेएनयू में आंदोलनों का असर शिक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए.

टॅग्स :जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू)
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