Is hindi queen or servant | हिंदी महारानी है या दासी!
हिंदी महारानी है या दासी!

शुक्रवार (14 सितंबर) को हिंदी दिवस मनाया गया। यह कौन सा दिवस है, हिंदी के महारानी बनने का या दासी बनने का? मैं तो समझता हूं कि आजादी के बाद हिंदी की हालत दासी से भी बदतर हो गई है। आप हिंदी के सहारे सरकार में एक बाबू की नौकरी भी नहीं पा सकते और हिंदी जाने बिना आप बड़े पद पर भी पहुंच सकते हैं। इस पर ही मैं पूछता हूं कि हिंदी राजभाषा कैसे हो गई? आपका राज-काज किस भाषा में चलता है? अंग्रेजी में! तो इसका अर्थ क्या है? 

हमारी सरकारें हिंदुस्तान की जनता के साथ धोखा कर रही हैं। उसकी आंख में धूल झोंक रही हैं। भारत का प्रामाणिक संविधान अंग्रेजी में है। भारत की सभी ऊंची अदालतों की भाषा अंग्रेजी है। सरकार की सारी नीतियां अंग्रेजी में बनती हैं। उन्हें अफसर बनाते हैं और नेता लोग उन पर अपने दस्तखत चिपका देते हैं। सारे सांसदों की संसद तक पहुंचने की सीढ़ियां उनकी अपनी भाषाएं होती हैं लेकिन सारे कानून अंग्रेजी में बनते हैं।  

सरकार का सारा महत्वपूर्ण कामकाज अंग्रेजी में होता है। सरकारी नौकरियों की भर्ती में अंग्रेजी अनिवार्य है। उच्च सरकारी नौकरियां पानेवालों में अंग्रेजी माध्यमवालों की भरमार है। उच्च शिक्षा का तो बेड़ा ही गर्क है। चिकित्सा, विज्ञान और गणित की बात जाने दीजिए, समाजशास्त्नीय विषयों में भी उच्च शिक्षा और शोध का माध्यम आज तक अंग्रेजी ही है।

अंग्रेजी भाषा को नहीं उसके वर्चस्व को चुनौती देना आज देश का सबसे पहला काम होना चाहिए लेकिन हिंदी दिवस के नाम पर हमारी सरकारें एक रस्म-अदायगी, खानापूरी हर साल कर डालती हैं। प्रधानमंत्नी ने केंद्रीय हिंदी समिति की बैठक बुलाई। उसकी वेबसाइट अभी तक सिर्फ अंग्रेजी में ही है। यदि देश में कोई सच्चा नेता हो और उसकी सच्ची राष्ट्रवादी सरकार हो तो वह संविधान की धारा 343 को निकाल बाहर करे और हिंदी को राष्ट्रभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं को राजकाज भाषाएं बनाए। ऐसा किए बिना यह देश न तो संपन्न बन सकता है, न समतामूलक, न महाशक्ति!


Web Title: Is hindi queen or servant
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