IAS Arti Dogra appoints Ajmer District Collector, initiative and motivational Story | IAS आरती डोगराः पंख से कुछ नहीं होता, हौसले से उड़ान होती है!

राजस्थान सरकार ने पिछले हफ्ते 81 आइएएस अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया। इस लिस्ट में महिला आईएएस आरती डोगरा का नाम भी शामिल था। अन्य अधिकारियों के लिए ये रूटीन ट्रांसफर था लेकिन आरती डोगरा के ट्रांसफर ने उनके विभाग के लोगों को भावुक कर दिया। लोग उनके काम की सराहना करते हुए संदेश भेजने लगे आरती डोगरा को अजमेर के जिलाधिकारी का जिम्मा सौपा गया है। इसके पहले वो डिस्कॉम की मैनेजिंग डायरेक्टर, बीकानेर की जिलाधिकारी रहते हुए अपने काम का लोहा मनवा चुकी हैं। आरती डोगरा की ऊंचाई भले ही महज 3 फीट 2 इंच हो लेकिन उनके हौसले आसमान से ऊंचे हैं।

आरती डोगरा के पिता आर्मी ऑफिसर और मां स्कूल टीचर थी। उनकी पैदाइश के बाद ही लोगों ने शारीरिक बनावट को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लेकिन माता-पिता ने तय किया कि उनकी बेटी सामान्य स्कूल में अन्य बच्चों के साथ पढ़ाई करेगी। आरती अपने माता-पिता की एकलौती संतान हैं। एक इंटरव्यू में आरती बताती हैं, 'लोग मेरी मां से पूछते थे कि अब अगला बच्चा कब होगा। मेरे पैरेंट्स ने कहा कि एक बेटी ही काफी है। उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया।'

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आरती की स्कूलिंग देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल में हुई थी। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वो देरहरादून चली गई जहां उनकी मुलाकात आईएएस मनीषा से हुई। यहां से उनकी सोच ने एक बड़ी करवट ली। आरती के आत्मविश्वास की बानगी ऐसी थी कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर ली और IAS अधिकारी बन गईं।

आरती डोगरा के इनीशिएटिवः-

- आरती जब बीकानेर की जिलाधिकारी थी तो उन्होंने 'बंको बिकाणो' अभियान की शुरुआत की। इसमें लोगों को खुले में शौच ना करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए प्रशासन के लोग सुुबह गांव जाकर लोगों को खुले में शौच करने से रोकते थे। गांव-गांव पक्के शौचालय बनवाए गए जिसकी मॉनीटरिंग मोबाइल सॉफ्टवेयर के जरिए की जाती थी। यह अभियान 195 ग्राम पंचायतों तक सफलता पूर्वक चलाया गया। बंको बिकाणो की सफलता के बाद आस-पास से जिलों ने भी इस पैटर्न को अपनाया। आरती डोगरा को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

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- बीकानेर में उन्होंने मिशन अगेंस्ट एनीमिया (MAA) की शुरुआत की। इसके जरिए सभी डॉक्टरों से अपील की गई वो वॉट्सऐप से जुड़े रहें और दूर-दराज के क्षेत्रों में वाट्सऐप के जरिए ईलाज करें। यह कार्यक्रम भी काफी सराहा गया।

- बीकानेर की डीएम रहते हुए आरती डोगरा ने कई अनाथ बच्चियों की सहायता की थी जो आज भी उनसे संपर्क में रहती हैं।

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आरती डोगरा का मानना है कि पुरुष और महिला अधिकारियों को एक समान नजर से देखना चाहिए। उन्हें अपने अबतक के जीवन को लेकर कोई मलाल नहीं है। एक पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने बताया, 'जब उन्होंने आईएएस परीक्षा पास की तो सैकड़ो लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे। कुछ लोगों ने मेरी मम्मी से कहा कि बेटी ने बेटे की कमी पूरी कर दी। मेरी मम्मी का जवाब था कि हमें बेटे की कमी कभी थी ही नहीं। वो हमारी बेटी है और उसने अपना काम किया है।' Salute Arti Dogra!!!


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