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Divya Deshmukh: दिव्य, अनुपम और अतुलनीय है दिव्या की उपलब्धि, विश्व चैंपियन का ताज रातोंरात हासिल नहीं हुआ

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: July 30, 2025 05:21 IST

Divya Deshmukh: दिव्या देशमुख ने रविवार को जॉर्जिया के बाटुमी में हमवतन कोनेरू हम्पी को शिकस्त देकर विश्व चैंपियन बनने के साथ ही भारत की चौथी ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया.

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ठळक मुद्देविश्व चैंपियन का ताज दिव्या को रातोंरात हासिल नहीं हुआ. मेहनत, लगन, समर्पण के साथ अभिभावकों के त्याग का प्रतिफल भी है. नागपुर वैसे भी शतरंज के खिलाड़ियों का वर्षों से गढ़ रहा है.

Divya Deshmukh: काफी साल हो गए, एक बड़े स्तर के शतरंज टूर्नामेंट के उद्घाटन के लिए विश्वनाथन आनंद नागपुर में थे. आनंद से मिलने के लिए एक नन्हीं बच्ची बहुत बेकल नजर आ रही थी. अभिभावकों की भी ख्वाहिश थी कि ये शतरंज का बाजीगर, पांच बार का चैंपियन किसी तरह उनकी बेटी से रू-ब-रू हो जाए. आज वही विश्वनाथन आनंद उसी बच्ची को विश्वविजेता बनने पर बधाई दे रहे हैं. दिव्या देशमुख ने रविवार को जॉर्जिया के बाटुमी में हमवतन कोनेरू हम्पी को शिकस्त देकर विश्व चैंपियन बनने के साथ ही भारत की चौथी ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया.

जाहिर सी बात है, विश्व चैंपियन का ताज दिव्या को रातोंरात हासिल नहीं हुआ. यह कड़ी मेहनत, लगन, समर्पण के साथ उनके अभिभावकों के त्याग का प्रतिफल भी है. दिव्या की चिकित्सक मां ने बेटी को खेल के शीर्ष पर पहुंचते देखने के लिए अपने करियर पर विराम लगा दिया था. बहरहाल, नागपुर वैसे भी शतरंज के खिलाड़ियों का वर्षों से गढ़ रहा है.

कहना गलत न होगा कि नागपुर की फिजा में शतरंज घुला हुआ है. अलबत्ता, काफी बच्चे क्रिकेट में करियर बनाना चाहते हैं लेकिन कई बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने शतरंज को अपनाया. नागपुर के ही संकल्प गुप्ता, रौनक साधवानी और स्वप्निल धोपाड़े  ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं. रौनक ने तो केवल तेरह बरस की उम्र में शतरंज की दुनिया का यह लब्धप्रतिष्ठित आसन हासिल कर लिया था.

बरअक्स, दिव्या अपने साथी खिलाड़ियों से काफी आगे निकल गईं और अब जब बाटुमी से वह लौटेंगी तो सबसे कम उम्र की शतरंज की ‘महारानी’ का ताज उनके सिर पर होगा.  पिछले कुछ समय से दक्षिण भारत 64 खानों के हीरे तैयार करने की ‘इकाई’ रहा है. दक्षिणी राज्यों से शतरंज के 23 ग्रैंडमास्टर बने हैं.

महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के अलावा गुकेश, प्रज्ञाननंदा और उनकी बहन आर. वैशाली, हरिकृष्णा, कोनेरू हम्पी, हरिका द्रोणावल्ली, पेंटाला हरिकृष्णा, अर्जुन एरिगेसी सभी का वास्ता दक्षिण भारत के राज्यों से रहा है. वर्षों बाद दिव्या देशमुख पहली ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने दक्षिण से दिग्गज शतरंज खिलाड़ियों के उपजने के मिथक को तोड़ते हुए विश्व चैंपियन बनकर नागपुर समेत महाराष्ट्र का नाम रोशन किया. दरअसल महाराष्ट्र में महिलाओं के प्रति परिवारों में वैचारिक सकारात्मकता के कारण दिव्या कामयाबियों की बुलंदियों पर पहुंची हैं.

महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है और महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले जैसी महिलाओं ने नारी की स्वतंत्रता को हमेशा सर्वोपरि माना. उनके विचार समाज में धीरे-धीरे ही सही, प्रसारित और प्रचारित होते रहे. इसी के बल पर दिव्या देशमुख ने भी महिलाओं के सम्मान को आगे बढ़ाया है. दिव्या का अब तक का करियर ग्राफ दर्शाता है कि वह चुनौतियों का डटकर सामना करना पसंद करती हैं.

दिव्या ने ओलंपियाड में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने के अलावा एशियाई चैंपियनशिप, विश्व जूनियर चैंपियनशिप और विश्व युवा चैंपियनशिप में भी कई स्वर्ण पदक जीते हैं.   दिव्या को उनकी सूझबूझ, आक्रामक खेल शैली और निरंतरता के लिए जाना जाता है. 2013 में, वे सबसे कम उम्र की महिला फिडे मास्टर (डब्ल्यूएफएम) बनी थीं. 2021 में भारत की वह ग्रैंडमास्टर बनीं,

जबकि 2023 में अंतरराष्ट्रीय मास्टर (आईएम) बनने की उपलब्धि उन्होंने हासिल कर ली. इतना ही नहीं पिछले साल बुडापेस्ट में आयोजित 45वें शतरंज  ओलंपियाड में चैंपियन बने भारतीय दल का भी वह हिस्सा थीं. और केवल 19 बरस की उम्र में दिव्या की उपलब्धियों की यह फेहरिस्त है.

दिव्या का लक्ष्य अब महिलाओं का कैंडिडेट्स टूर्नामेंट है जो अगले साल संभवतः अप्रैल में होगा. कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करनेवाली दिव्या पहली भारतीय महिला हैं. इस टूर्नामेंट में अगर वह जीत जाती हैं तो फिर महिला विश्व चैंपियशिप के लिए क्वालिफाई कर लेंगी जहां उनका सामना चैलेंजर चीनी ग्रैंडमास्टर वेंजुन जू के साथ होगा.

पुरुष वर्ग में विश्व चैंपियनशिप का खिताब पिछले साल भारत जीत चुका है. गुकेश ने सिंगापुर में आयोजित चैंपियनशिप में संयोग से चीनी खिलाड़ी डिंग लिरेन को परास्त किया था. फिलहाल तो दिव्या को विश्वविजेता बनने की कामयाबी पर जश्न मनाना चाहिए. करोड़ों भारतीयों की शुभकामनाएं और दुआएं उनके साथ हैं कि भविष्य में भी उनकी सफलताओं का ग्राफ ऊंचा होता रहे. 

टॅग्स :Chess Federation of Indiaमहाराष्ट्रशतरंजChess
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