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रमेश ठाकुर का ब्लॉगः अनेक खामियों का नतीजा है दिल्ली का अग्निकांड

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 9, 2019 09:04 IST

दिल्ली अग्निकांडः शुरुआती जांच के आधार पर अग्निकांड का कारण शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है. जिस मकान में घटना घटी वह छह मंजिला है जबकि बिजली मीटर लगाने की इजाजत तीसरी मंजिल तक ही थी. लेकिन भवन मालिक ने बिजली जबरदस्ती सभी मंजिलों पर पहुंचाई हुई थी.

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रमेश ठाकुरदिल्ली के घनी अबादी वाले अनाजमंडी इलाके में रविवार तड़के दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने दिल्ली के सबसे बड़े उपहार सिनेमा अग्निकांड की यादें ताजा कर दीं. हादसा सुबह करीब सवा चार बजे उस वक्त हुआ जब पूरी दिल्ली गहरी नींद में सो रही थी. पुरानी दिल्ली स्थित फिल्मिस्तान इलाके में जहां आग लगी वहां के स्थानीय लोग थोड़ी देर के लिए समझ ही नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है. पूरे इलाके में धुएं का गुबार छाया हुआ था. मौत और आग का तांडव करीब दो घंटे तक चला.  

जब सुबह हुई तो विभिन्न सियासी दलों का वही पुराना एक ही राग, एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हुआ. भाजपा ने जहां केजरीवाल पर घटना का आरोप मढ़ा, तो वहीं केजरीवाल ने भाजपा पर आरोप लगाए, क्योंकि दिल्ली की तीनों एमसीडी पर इस समय भाजपा का कब्जा है. भवनों की देखरेख एमसीडी के अधीन है.

शुरुआती जांच के आधार पर अग्निकांड का कारण शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है. जिस मकान में घटना घटी वह छह मंजिला है जबकि बिजली मीटर लगाने की इजाजत तीसरी मंजिल तक ही थी. लेकिन भवन मालिक ने बिजली जबरदस्ती सभी मंजिलों पर पहुंचाई हुई थी. मीटरों पर ज्यादा लोड पड़ने के कारण ही शॉर्ट सर्किट हुआ, जो हादसे का कारण बना. इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन मकान मालिक द्वारा बिजली की चोरी जारी थी. बिल्डिंग कमर्शियल थी तो मीटर भी कमर्शियल लगा था. हाइटेंशन तार के कारण आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया. इसके अलावा हादसे का एक और कारण निकल कर आया है. कमर्शियल गतिविधियों के लिए फायर ब्रिगेड से एनओसी लेनी होती है वह भी नहीं ली गई थी.  

घटना के पीछे स्थानीय पुलिस की चूक भी सामने आई है. नियम के मुताबिक सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में काम करने और किराए पर रहने वालों का दिल्ली में पुलिस सत्यापन अनिवार्य है. लेकिन बिल्डिंग में कितने लोग रहते थे और कितने काम करते थे, पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. खामियां ही खामियां सामने निकल कर सामने आई हैं. आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है लेकिन उस संकरी गली में बने उस मकान में बच्चों के खिलौने बनाने का कारखाना चल रहा था. यह एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता था.

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