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Bihar LS polls 2024: चिराग ने 2020 के विधानसभा चुनाव में सीएम नीतीश के साथ किया था, लोकसभा में पुराना हिसाब चुका रहे हैं मुख्यमंत्री!, जानें कहानी

By हरीश गुप्ता | Updated: May 10, 2024 11:19 IST

Bihar LS polls 2024: मुस्लिम समुदाय में पिछड़ों को आरक्षण देने के खिलाफ खुलकर बात करना शुरू कर दिया. इससे बड़ी संख्या में मुसलमानों का इंडिया गठबंधन में जाना नीतीश कुमार को कमजोर कर रहा है.

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ठळक मुद्देनीतीश भी चिराग पासवान के साथ जैसे काे तैसा व्यवहार करना चाहते हैं. जनता दल (यू) ने बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन में 115 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था.43 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही. भाजपा ने 243 सीटों वाले सदन में 74 सीटें जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया.

Bihar LS polls 2024: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमारलोकसभा चुनाव में चिराग पासवान के साथ वही कर रहे हैं जो चिराग ने 2020 के विधानसभा चुनाव में उनके साथ किया था. चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से पांच पर चुनाव लड़ रही है और नीतीश कुमार उनकी हार सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. भाजपा और जद (यू) ने कुछ हफ्ते के बाद ही व्यावहारिक कारणों से संयुक्त प्रचार अभियान छोड़ दिया है. जद (यू) परेशान है क्योंकि भाजपा नेतृत्व ने अचानक अपना प्रचार अभियान बदल दिया और मुस्लिम समुदाय में पिछड़ों को आरक्षण देने के खिलाफ खुलकर बात करना शुरू कर दिया. इससे बड़ी संख्या में मुसलमानों का इंडिया गठबंधन में जाना नीतीश कुमार को कमजोर कर रहा है.

दूसरे, नीतीश भी चिराग पासवान के साथ जैसे काे तैसा व्यवहार करना चाहते हैं. जनता दल (यू) ने बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन में 115 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और 43 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही. भाजपा ने 243 सीटों वाले सदन में 74 सीटें जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया. जबकि राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी.

जद (यू) का प्रदर्शन सबसे खराब इसलिए रहा क्योंकि चिराग पासवान ने एनडीए छोड़ दी और 80 उम्मीदवार इस तरह से मैदान में उतारे कि नीतीश बुरी तरह हार जाएं. नाराज नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ लिया और राष्ट्रीय संयोजक बनने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल हो गए.

भाजपा ने इस बार चिराग पासवान के साथ गठबंधन में बिहार की सभी 40 लोकसभा सीटों पर पंजाब की तरह ही चुनाव लड़ने का फैसला किया. लेकिन नीतीश ने भाजपा नेतृत्व को संदेश भेज दिया और पार्टी ने ‘पलटू राम’ को फिर से गले लगा लिया. आम लोग इसके खिलाफ थे लेकिन नेतृत्व ने उनके साथ जाने का फैसला किया. अब नीतीश कुमार के फिर से खेला करने के साथ, भाजपा बिहार में नुकसान होने की आशंका को असहाय होकर देख रही है.

प्रियंका गांधी का उभार

प्रियंका गांधी वाड्रा कुछ महीने पहले तक वस्तुतः राजनीतिक गुमनामी में थीं और निजी यात्रा पर अमेरिका चली गई थीं क्योंकि उन्हें कोई काम नहीं दिया गया था. हालांकि वह कांग्रेस की महासचिव हैं, लेकिन जब भाई राहुल गांधी 67 दिनों की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर थे, तब उनकी कोई भूमिका नहीं थी.

जब तेलंगाना, रायबरेली और कुछ अन्य स्थानों के कांग्रेसियों ने मांग की कि प्रियंका गांधी को उनके क्षेत्रों से मैदान में उतारा जाना चाहिए, तो कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, पूरी तरह से सन्नाटा छाया था. अप्रैल के अंत में ही राहुल गांधी को लगा कि प्रियंका को रायबरेली से चुनाव लड़ना चाहिए क्योंकि वह केरल में अपनी वायनाड सीट से खुश थे.

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और एआईसीसी प्रमुख खड़गे और अन्य के दबाव के कारण राहुल को आगे आना पड़ा. प्रियंका की किस्मत बदल गई और वह अब पार्टी की स्टार प्रचारक के रूप में शीर्ष पर हैं. वह जहां भी जा रही हैं, उन्हें जबरदस्त आकर्षण मिल रहा है और वह भावुक हो जाती हैं व भीड़ को अपने पिता और इंदिरा गांधी के बलिदान की याद दिलाती हैं.

वह अपने भाषणों में शायद ही कभी लड़खड़ाती हैं क्योंकि वह लिखित नोट्स रखती हैं और दर्शकों से जुड़ने में सक्षम हैं. राहुल गांधी सोशल मीडिया के प्रिय हैं, जहां उनके ऊपर मोदी समर्थकों के चुटकुलों की भरमार है. लेकिन प्रियंका गांधी ने अपना मजाक उड़ाने का मौका कभी नहीं दिया है.

राहुल शायद ही कभी मुस्कुराते हैं जबकि प्रियंका गांधी हमेशा सौम्य दिखती हैं. अगले 18 दिनों तक अमेठी में डेरा डालने का उनका फैसला केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की रातों की नींद उड़ा सकता है. कांग्रेस के के.एल. शर्मा हल्के उम्मीदवार लग सकते हैं. लेकिन वह ईरानी को कड़ी टक्कर देंगे क्योंकि वह 40 वर्षों से जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे हैं.

निर्वाचन क्षेत्र को बारीकी से जानते हैं. राहुल गांधी भी रायबरेली में चैन की सांस ले सकते हैं. लेकिन 2024 में प्रियंका गांधी आ गई हैं और अगर राहुल गांधी रायबरेली जीतते हैं तो वे वायनाड से चुनाव लड़कर लोकसभा में पहुंच सकती हैं.

नया प्रधानमंत्री आवास परिसर तैयार

नया प्रधानमंत्री आवास परिसर समय सीमा से पहले तैयार हो गया है और अपने रहने वाले के आने का इंतजार कर रहा है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दारा शिकोह मार्ग पर राष्ट्रपति भवन के पास स्थित इस नए भवन में स्थानांतरित हो सकते थे, लेकिन उन्होंने अभी लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास में रहना ही उचित समझा है.

वे 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. उनके निकटतम पड़ोसी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ हैं जो पहले ही 15 एकड़ में फैले आलीशान बंगले में स्थानांतरित हो चुके हैं. 467 करोड़ रुपए की लागत से बने प्रधानमंत्री आवास परिसर में पीएमओ, संसद भवन, नए एग्जीक्यूटिव काॅम्प्लेक्स, उपराष्ट्रपति भवन आदि को जोड़ने के लिए एक भूमिगत सुरंग है.

सुरंग का उद्देश्य सुरक्षा के मद्देनजर ट्रैफिक जाम से बचना है. सूत्रों की मानें तो नई बिल्डिंग में एक सुरक्षा नेटवर्क होगा जो बाहर से होने वाले हर तरह के हमले से निपटने में सक्षम होगा. कॉम्प्लेक्स का कुल निर्मित क्षेत्र 2,26,203 वर्ग फुट है और इसमें से प्रधानमंत्री का आवास 36,328 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला होगा. पीएम एन्क्लेव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है और इसमें उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री आवास, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) भवन और केंद्रीय सम्मेलन केंद्र शामिल हैं.

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