देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की यह घोषणा राहत देने वाली है कि देश में ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र खोलकर सरकार अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देगी. गडकरी ने कहा कि सरकार उद्योग जगत के सहयोग से अगले पांच साल में 120 आकांक्षी जिलों और 500 सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े प्रखंडों में चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए स्कूल खोलेगी. हालांकि यह सच है कि वाहन चालकों को ड्राइविंग के नियमों की जानकारी न होना ही सड़क दुर्घटनाओं का एकमात्र कारण नहीं है.
जैसा कि गडकरी ने ही बताया, सड़क हादसों के चार मुख्य कारणों में से पहला कारण सड़क डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग है. इसके लिए कुछ खराब जगहों की पहचान की गई है और उन्हें ठीक करने के लिए चालीस हजार करोड़ रु. खर्च भी किए गए हैं. दुर्घटनाओं का दूसरा कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन है और इसके लिए भी 350 जगहों की पहचान कर लगभग 280 जगहों में सुधार किया गया है.
लेकिन सड़क दुर्घटनाओं का तीसरा कारण कानून का पालन न होना है और चौथा कारण मानवीय व्यवहार है. जहां तक कानून के उल्लंघन का सवाल है तो ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, गलत साइड में गाड़ी चलाना और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के यात्रा करना हादसे के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा इसमें गाड़ी चलाते समय गुस्सा करने या आक्रामकता दिखाने (रोड रेज), मोबाइल के उपयोग, थकान या फिर ध्यान भटकने जैेसे मानवीय व्यवहार भी अक्सर बड़े हादसों की वजह बनते हैं. बल्कि आंकड़े तो यहां तक संकेत देते हैं कि 85 प्रतिशत से अधिक सड़क दुर्घटनाएं चालकों के कौशल की कमी और खराब ट्रैफिक सेंस के कारण होती हैं.
हालत यह है कि देश में मौजूदा समय में तकरीबन 22 लाख ड्राइवरों की कमी है, लेकिन लाइसेंसधारी जो ड्राइवर हैं भी, उनमें से भी कितने ऐसे हैं जो वास्तव में ड्राइविंग नियमों की समुचित जानकारी रखते हों? अव्वल तो बहुत सारे ड्राइवरों को ड्राइविंग नियमों की पर्याप्त जानकारी ही नहीं है और जिन्हें जानकारी है भी, उनमें भी कम ही लोग ऐसे हैं जो उनका ईमानदारी के साथ पालन करते हैं.
सब जानते हैं कि हेलमेट ट्रैफिक पुलिस के डर से नहीं बल्कि अपनी जान बचाने के लिए पहनना चाहिए, लेकिन कितने ही ऐसे लोग मिल जाएंगे जो वाहन के हैंडल में हेलमेट इसलिए लटकाकर चलते हैं ताकि ट्रैफिक पुलिस के दिखने पर पहन सकें! इसलिए सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल नियमों को सख्त करना ही काफी नहीं है, बल्कि चालकों में ड्राइविंग के प्रति सही कौशल, दृष्टिकोण और ट्रैफिक सेंस विकसित करना भी अत्यंत आवश्यक है, तभी सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाने में मदद मिल सकेगी.