हर वर्ष सात मार्च को जन औषधि दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूक करना तथा इलाज के बढ़ते खर्च को कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करना है. भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला व्यक्तिगत खर्च लंबे समय से एक बड़ी चिंता रहा है. बड़ी संख्या में लोगों को दवाओं के महंगे दाम के कारण इलाज अधूरा छोड़ना पड़ता है. ऐसे में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के माध्यम से सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत लोगों को किफायती कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी. इस योजना के तहत देशभर में जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जहां ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इन केंद्रों पर उपलब्ध दवाएं सामान्य बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाओं से लगभग 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं, जिससे मरीजों के इलाज का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है. पिछले एक दशक में इस योजना का विस्तार तेजी से हुआ है. वर्ष 2014 में जहां देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या केवल 80 के आसपास थी,
वहीं अब यह बढ़कर 15 हजार से अधिक हो चुकी है और ये लगभग सभी राज्यों और जिलों तक पहुंच चुके हैं. इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब दस लाख लोग सस्ती दवाओं का लाभ उठा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक देशभर में 25 हजार जन औषधि केंद्र स्थापित करने का है, ताकि दूरदराज के इलाकों तक भी किफायती दवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके.
जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध दवाओं की सूची भी लगातार बढ़ाई जा रही है. वर्तमान में इस योजना के तहत 2047 प्रकार की दवाएं और लगभग 300 प्रकार के सर्जिकल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इनमें हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, संक्रमण, एलर्जी, गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारियों सहित अनेक रोगों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं.
इस विस्तृत दवा सूची के कारण मरीजों को एक ही स्थान पर कई आवश्यक दवाएं मिल जाती हैं, जिससे उन्हें अलग-अलग दवा दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. जन औषधि परियोजना केवल सस्ती दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर रही है. सरकार इस योजना के तहत जन औषधि केंद्र खोलने के लिए युवाओं, फार्मासिस्टों और स्वयंसहायता समूहों को प्रोत्साहित करती है.