चेचक और पोलियो के बाद अब मलेरिया को विदा करने की बारी

By योगेश कुमार गोयल | Updated: April 25, 2026 05:39 IST2026-04-25T05:39:33+5:302026-04-25T05:39:33+5:30

वर्ष 2000 में जहां 108 देश मलेरिया से प्रभावित थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर 80 रह गई है. ज्ञान ने हमें साधन दिए हैं, नीतियों ने दिशा दी है और अनुभव ने हमें सिखाया है.

health news 25 april smallpox and polio, it's time to banish malaria blog Yogesh Kumar Goyal | चेचक और पोलियो के बाद अब मलेरिया को विदा करने की बारी

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Highlightsअब जरूरत है तो केवल सामूहिक इच्छाशक्ति और सतत प्रयासों की.यदि हर नागरिक इस अभियान में अपनी भूमिका निभाए तो वह दिन दूर नहीं.जब मलेरिया भी इतिहास के पन्नों में दर्ज एक बीती हुई बीमारी बन जाएगा.

मलेरिया आज भी मानवता के सामने खड़ी उन पुरानी लेकिन जिद्दी चुनौतियों में से एक है, जो विज्ञान की प्रगति के बावजूद पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है. यह एक परजीवीजनित रोग है, जो संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलता है और प्लाज्मोडियम परजीवी के माध्यम से मानव शरीर के यकृत तथा लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है.

तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं लेकिन समय पर उपचार न मिले तो यह घातक रूप ले सकता है. विशेष रूप से प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम संक्रमण गंभीर खतरा बन जाता है. हर वर्ष 25 अप्रैल को ‘विश्व मलेरिया दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को गति देना है.

वर्ष 2026 की थीम ‘मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं. अब हमें करना ही होगा’ केवल एक नारा नहीं बल्कि एक निर्णायक आह्वान है. यह थीम इस तथ्य को रेखांकित करती है कि आज हमारे पास मलेरिया को समाप्त करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक साधन, तकनीकी क्षमता और अनुभव मौजूद है लेकिन इन संसाधनों को प्रभावी कार्रवाई में बदलने की तत्काल आवश्यकता है.

विज्ञान ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में अभूतपूर्व प्रगति की है. पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमारे जीवनकाल में मलेरिया का उन्मूलन संभव हो सकता है. इसके लिए टीकों का विकास इस दिशा में मील का पत्थर है. आज 25 से अधिक देश हर वर्ष लगभग एक करोड़ बच्चों को मलेरिया टीकों से सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं.

इसके साथ ही, वितरित की जा रही मच्छरदानियों में 84 प्रतिशत अगली पीढ़ी की हैं, जो अधिक प्रभावी और टिकाऊ हैं. नई तकनीकों का उपयोग इस लड़ाई को और सशक्त बना रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से मलेरिया-प्रवण क्षेत्रों की पहचान, ड्रोन द्वारा कीटनाशक छिड़काव और स्मार्ट डायग्नोस्टिक उपकरणों के जरिए त्वरित जांच जैसी पहलें स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही हैं.

इसके अलावा, मच्छरों के आनुवंशिक संशोधन और दीर्घकालिक प्रभाव वाले इंजेक्शन जैसी उभरती तकनीकें भविष्य में इस बीमारी के पूर्ण उन्मूलन का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं. हालांकि प्रगति उल्लेखनीय है लेकिन चुनौतियां अभी भी गंभीर हैं. वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर मलेरिया के लगभग 28.2 करोड़ मामले सामने आए और 6.1 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा अधिक है.

यह स्थिति बताती है कि प्रगति असमान है और कई क्षेत्रों, विशेषकर अफ्रीका और दक्षिण एशिया के गरीब इलाकों में, यह बीमारी अभी भी व्यापक रूप से फैली हुई है. फिर भी उपलब्धियां प्रेरणादायक हैं. वर्ष 2000 से अब तक 23 लाख मामलों और 1.4 करोड़ मौतों को रोका जा चुका है. आज तक 47 देशों को मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है.

वर्ष 2000 में जहां 108 देश मलेरिया से प्रभावित थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर 80 रह गई है. ज्ञान ने हमें साधन दिए हैं, नीतियों ने दिशा दी है और अनुभव ने हमें सिखाया है. अब जरूरत है तो केवल सामूहिक इच्छाशक्ति और सतत प्रयासों की. यदि हर नागरिक इस अभियान में अपनी भूमिका निभाए तो वह दिन दूर नहीं, जब मलेरिया भी इतिहास के पन्नों में दर्ज एक बीती हुई बीमारी बन जाएगा.  

Web Title: health news 25 april smallpox and polio, it's time to banish malaria blog Yogesh Kumar Goyal

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