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वरुण कपूर का ब्लॉग-साइबर सुरक्षा : जुनून भी खतरनाक

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 11, 2018 19:12 IST

जिस आसानी से आम लोग वचरुअल स्पेस में  साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं और धोखाधड़ी करने वालों के लिए यह जगह इतनी सरल हो गई है

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(लेखक-वरुण कपूर)जिस आसानी से आम लोग वचरुअल स्पेस में  साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं और धोखाधड़ी करने वालों के लिए यह जगह इतनी सरल हो गई है, उसके वैसे तो कई कारण हैं लेकिन मुख्य कारण है अपराध के परिदृश्य से अपराधी की अनुपस्थिति. नतीजतन लक्षित व्यक्ति को अपने सामने कोई आसन्न खतरा दिखाई नहीं देता. 

 साइबर अपराध के बारे में इतनी तरह की खबरें सामने आ रही हैं कि प्राय: आम आदमी को समझ में ही नहीं आता कि वह क्या करे और क्या न करे. देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरह के साइबर अपराध रोज हो रहे हैं और लोग जितना ही उनके बारे में पढ़ते हैं उतना ही डर जाते हैं. ऐसा ही एक मामला मेरी नजर में आया. एक शादीशुदा महिला शहर में कथित साइबर विशेषज्ञों द्वारा आयोजित साइबर सुरक्षा सत्र में शामिल हुई.

सुरक्षा प्रस्तुति के दौरान उन लोगों ने इस वास्तविकता को पेश किया कि बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियां उपयोगकर्ताओं का डाटा बेचकर राजस्व हासिल करती हैं.  इसलिए हम जो डाटा साझा करते हैं, उसके बारे में सतर्क रहना चाहिए. यह सुन कर वह महिला डर गई. ऐसा इसलिए क्योंकि उसने अपनी कुछ निजी तस्वीरें क्लिक करके अपने मोबाइल फोन के एल्बम सेक्शन में संगृहीत किया था. हालांकि उसे सत्र में बताया गया कि केवल शेयर किया जाने वाला डाटा ही बेचकर कंपनियां पैसा अजिर्त करती हैं, लेकिन उसका डर कम नहीं हुआ.

पहले तो उसने अपने डिवाइस से पूरा ‘आपत्तिजनक’ डाटा डिलीट किया और फिर गूगल से संपर्क कर तस्दीक करनी चाही कि कहीं उसके मोबाइल डिवाइस में मौजूद डाटा किसी के साथ साझा तो नहीं किया गया है. लेकिन उनके बार-बार आश्वस्त करने के बावजूद उसे संतुष्टि नहीं हुई.  यहां तक कि वह अवसाद का शिकार हो गई और उसने लोगों से मिलना-जुलना तक बंद कर दिया. उसके मन में डर बना रहा कि उसके डिवाइस में मौजूद तस्वीरों को साझा कर दिया गया होगा और शीघ्र ही उसे शर्मनाक स्थितियों का सामना करना पड़ेगा.

उसके पति और बेटे ने समझाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. मैंने उसे पूरे एक घंटे तक समझाया तब जाकर उसे भरोसा हुआ और राहत मिली. कहने का मतलब यह कि यद्यपि साइबर सुरक्षा एक बेहद गंभीर मुद्दा है और इसके प्रति सजग रहना ही चाहिए, लेकिन उसे लेकर जुनूनी नहीं हो जाना चाहिए. चीजों को उसी रूप में समझना चाहिए जैसी वे हैं. आधा सच और आधी जानकारी  सबसे हानिकारक चीज हैं.

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